बीबीसी के जिस वर्ल्डवाइड पोल की अमिताभ बच्चन अक्सर खिल्ली उड़ाते रहे हैं, उसमें उन्हें पिछली सदी का महानायक माना गया। उनके दुनिया भर में फैले फैंस इन दिनों उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना कर रहे हैं। सबको उम्मीद है कि वह जल्द ही अपने घर फिर जलसा करने लौटेंगे। अपनी प्रतीक्षा कर रहे प्रशंसकों से फिर संपूर्ण स्वास्थ्य लाभ के साथ रू-ब-रू होंगे और अपनी चिर परिचित मुस्कान और फ्रेंचकट दाढ़ी के साथ फिर से हंसती मुस्कुराती तस्वीरें अपने सोशल मीडिया पर साझा करेंगे। फ्रेंचकट दाढ़ी से ये याद आया कि क्या आपको मालूम है कि ये फ्रेंच कट दाढ़ी अमिताभ बच्चन ने रखनी कब से शुरू की?
बाइस्कोप: भेड़िए के पीछे भागते मनोज बाजपेयी की आफत में फंसी थी जान, जानिए फिल्म 'अक्स' के रोचक किस्से
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मशहूर संगीतकार जोड़ी निखिल विनय के बनाए म्यूजिक एलबम उन दिनों खूब हिट हो रहे थे और निखिल विनय के पास इकट्ठा हुए तमाम गीतों पर टी सीरीज ने मौका दे दिया एक फिल्म बनाने को। तुम बिन से टी सीरीज के लिए म्यूजिक वीडियोज बनाते रहे अनुभव सिन्हा निर्देशक बने। फिल्म को पूरे देश में दिल्ली यूपी वितरण क्षेत्र में ही सबसे ज्यादा कामयाबी मिली जिसमें कुछ योगदान इसके दिल्ली यूपी के वितरक जी डी मेहता और उनके बेटे संजय मेहता की अपने वितरण क्षेत्र में पकड़ का था और कुछ योगदान इस फिल्म के अमर उजाला के साप्ताहिक फिल्म समीक्षा में छपी इसकी तारीफ का भी रहा।
अक्स और तुम बिन में से आज के बाइस्कोप में बात करेंगे अक्स की। अक्स तमाम वजहों से अपनी मेकिंग के दौरान ही चर्चा में रही फिल्म थी। अमिताभ बच्चन के परिवार के साथ राकेश मेहरा का पुराना रिश्ता रहा है। अमिताभ बच्चन ने अपने जीवन की पहली विज्ञापन फिल्म जिस उत्पाद के लिए की थी, वह कंपनी थी बीपीएल। और बीपीएल का अमिताभ बच्चन के साथ पहला विज्ञापन बनाने वाले शख्स का नाम है राकेश ओम प्रकाश मेहरा। बड़े बच्चन का म्यूजिक वीडियो एबी बेबी भी राकेश ने ही निर्देशित किया था। तो राकेश मेहरा जब दिल्ली में पढ़ लिखकर मुंबई शिफ्ट हुए और विज्ञापन फिल्में बनाने लगे तो उनका पहले प्रतीक्षा और फिर जलसा में भी खूब आना जाना लगा रहा। पिता के साथ अक्स बनाने वाले राकेश ने बेटे के साथ दिल्ली 6 भी बनाई है।
खैर हम आज के बाइस्कोप में बात कर रहे हैं फिल्म अक्स की। अक्स की कहानी हिंदी सिनेमा की आम कहानियों जैसी नहीं है। यह हकीकत और फंतासी के बीच झूलती एक ऐसी कहानी है जिसे हम समय से पहले की फिल्ममेकिंग कह सकते हैं। राकेश ने तमाम विदेशी फिल्में देख रखी थीं और उनकी मेकिंग का असर अक्स में साफ देखा जा सकता है। ये तो बाद में हुआ कि उन्होंने अपने आस पास की ओरिजिनल कहानियां तलाशनी शुरू कीं और फिर रंग दे बसंती और भाग मिल्खा भाग जैसी फिल्मों से अपना और हिंदी सिनेमा का नाम रोशन किया।
अगर आप हॉलीवुड फिल्मों के शौकीन हैं तो आपने फालेन और फेस ऑफ जैसी फिल्में या तो देख रखी होंगी और अगर नहीं देखी हैं तो नाम तो जरूर सुना होगा। अमिताभ बच्चन, मनोज बाजपेयी और रवीना टंडन स्टारर फिल्म अक्स में इन दोनों फिल्म का अक्स (परछाई) दिखता है। फिल्म में उस समय की स्टार कलाकार नंदिता दास ने अमिताभ बच्चन की पत्नी का रोल किया है। लेकिन न तो उनका ज्यादा नाम राकेश मेहरा ने फिल्म के प्रचार के समय इस्तेमाल किया और न ही फिल्म में नंदिता के ही मुताबिक उनका रोल वैसा निकला जैसा उनको बताया गया था। अमिताभ बच्चन की नंदिता दास के साथ जोड़ी जरूर लोगों को चित्ताकर्षक लगी। अगर आप अमिताभ बच्चन की फिल्मों के प्रशंसक रहे हैं तो आप ये बात तो जरूर मानेंगे कि अमिताभ की जोड़ी सांवली हीरोइनों के साथ परदे पर खूब जमती है। फिर चाहें वो रेखा हों, शबाना आजमी हों, स्मिता पाटिल हों, माधवी हों, राम्या कृष्णन हों या फिर नंदिता दास हों। नंदिता दास अपने रोल को लेकर राकेश मेहरा से बहुत ज्यादा नाराज रहीं और बाकायदा रिपोर्टर्स को बुला बुलाकर नंदिता ने अपना गुस्सा मीडिया के सामने तब जाहिर किया था।
खैर, राकेश मेहरा खुद मानते रहे हैं कि अक्स की कहानी उन्होंने तीन खास कलाकारों को ध्यान में रखते हुए लिखी। एक अमिताभ बच्चन, दूजे मनोज बाजपेयी और तीसरी रवीना टंडन। रवीना टंडन ने जो जादू का पिटारा फिल्म अक्स में अपनी खूबसूरती का खोला है, वह कम ही फिल्मों में दिखा है। ये वो दौर था जब रवीना टंडन का दिल अक्षय कुमार के धोखे से ताजा ताजा टूटा था और वह बिल्कुल खतरनाक शेरनी की तरह गुस्से में मुंबई शहर में घूमती नजर आया करती थीं। फिल्म अक्स में लोकगाथाओं की पारलौकिक परंपरा को अपनी फिल्म की अंतरधारा बना रहे राकेश मेहरा को परदे पर ऐसी ही अदाकारा की तलाश थी जो तब थिरके तो लोग सीटों पर कसमसाते नजर आएं। रवीना ने अपने किरदार को सौ फीसदी मेहनत और ईमानदारी के साथ निभाया और सौ में सौ नंबर पाए।
रोल अमिताभ बच्चन और मनोज बाजपेयी के भी राकेश मेहरा ने अच्छे ही लिखे थे। लेकिन, मनोज बाजपेयी यहां अमिताभ बच्चन के आभा मंडल में वैसे ही फंसते नजर आए जैसा तमाम फिल्मों में दूसरे दिग्गज कलाकारों के साथ हो चुका है। राजेश खन्ना से लेकर नवीन निश्चल, विनोद खन्ना, धर्मेंद्र, शशि कपूर, ऋषि कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा, गोविंदा, मिथुन चक्रवर्ती, कमल हासन, रजनीकांत और आयुष्मान खुराना तक जिस किसी भी उभरते सितारे ने अमिताभ के आभा मंडल के बराबर पहुंचने की कोशिश भी की, अपने अदाकारी के पंख अभिनय के इस सूरज के ताप में जला बैठा। मनोज बाजपेयी इस फिल्म की रिलीज से पहले इतराते फिरते थे। कहते थे राकेश मेहरा का नाम जल्द ही हिंदी सिनेमा के पांच दिग्गज निर्देशकों में गिना जाएगा। बाकी चार नाम वह शेखर कपूर, महेश भट्ट, रामगोपाल वर्मा और श्याम बेनेगल के गिनाया करते थे। बिहार में अमिताभ बच्चन की फिल्म जंजीर देखकर हीरो बनने की ठान बैठे मनोज बाजपेयी के करियर को इस फिल्म ने बहुत नुकसान पहुंचाया और खुद को कभी अगला शाहरूख खान मान बैठे मनोज बाद में हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनेता का अपने इर्द गिर्द बना फरमा अरसे तक तोड़ नहीं पाए।
क्रिस्टोफर नोलान और जैक स्नाइडर के जमाने में आने के बाद मनु वर्मा और राघवन नाम के दो किरदारों की कहानी कहती अक्स अब देखी जाए तो उतनी मुश्किल नहीं लगती जितनी आज से 19 साल पहले लगी थी। तब तो ये फिल्म दर्शकों के सिर के ऊपर से गुजर गई थी। और ये इसके बावजूद के फिल्म के लिए निर्देशक से लेकर इसके कलाकारों तक ने मेहनत खूब की थी। बताते हैं कि मनोज बाजपेयी ने तो फिल्म के एक सीन में अपनी जान तक दांव पर लगा दी थी। फिल्म का ये सीन था जिसमें उन्हें एक भेड़िए के पीछे चाकू लेकर भागना था। तय ये हुआ कि भेड़िया के ट्रेनर आगे आगे भागेगा और भेड़िया उसके पीछे पीछे। उसके पीछे मनोज दौड़ लेंगे और सिनमैटोग्राफर ट्रेनर को छोड़ केवल भेड़िए और मनोज को ही फ्रेम में रखेंगे। कुछ देर तक शॉट ठीक चला फिर अचानक भेड़िए को पीछे आ रहे मनोज दिख गए, उसने तरकीब से यू टर्न लिया और सीधे मनोज पर लपका। मनोज ने उस दिन सामने खड़ी वैन के भीतर छलांग लगाकर अपनी जान बचाई।
फिल्म के प्रचार के दौरान उस सीन का भी खूब प्रचार किया गया जिसमें मनोज बाजपेयी और अमिताभ बच्चन को एक झरने में 30 फीट से छलांग लगाते दिखाया गया है। प्रचार यही किया गया कि ये सीन दोनों ने असलियत में खुद ही किया। ये वाकया कितना सच है और कितना फिल्म की मार्केटिंग टीम का बनाया हुआ, इस पर चर्चा रहने देते हैं। और बताते हैं आपको कि आखिर इस फिल्म में अमिताभ बच्चन की एंट्री कैसे हुई।
तमाम विज्ञापन फिल्में बना लेने के बाद राकेश की कोशिश थी कि किसी तरह अपनी पहली फीचर फिल्म वह शुरू करें। उन्होंने अक्स की कहानी भी लिख ली थी और एक दिन बैठे बैठे उन्होंने ये कहानी अभिषेक बच्चन को सुनाई। अभिषेक को कहानी पसंद आई और उन्होंने ही इसके लिए अपने पिता का नाम सुझाया। अभिषेक ने खुद ही इसके लिए पैरवी भी की। तो एक दिन सुबह सुबह अमिताभ बच्चन ने अभिषेक से कहा कि वह दिल्ली जा रहे हैं और अगर राकेश के पास फिल्म की स्क्रिप्ट रेडी हो तो वह उसे रास्ते में पढ़ना चाहेंगे। उसके बाद इधर अपने घर से अमिताभ बच्चन एयरपोर्ट के लिए निकले और उधर अभिषेक का फोन पाते ही राकेश मेहरा अपने घर से। बताते हैं कि दोनों सीधे एयरपोर्ट मिले और वहीं राकेश ने अक्स की स्क्रिप्ट बड़े बच्चन के हवाले की। उन्होंने दिल्ली तक की दो घंटे की दूरी में पूरी स्क्रिप्ट पढ़ डाली। अमिताभ दिल्ली एय़रपोर्ट पर उतरे तो सीधे फोन किया राकेश मेहरा को और बोले, फिल्म कब शुरू करनी है? आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।
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