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The Last Hour Review: रोचक विचार पर बुनी गई दिलचस्प कहानी, स्थानीय बोलियों व एहसासों के रंग रहे फीके

Sat, 15 May 2021 10:29 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Sat, 15 May 2021 10:29 PM IST
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The Last Hour Review by Pankaj Shukla Sanjay Kapoor Karma Takapa Amit Kumar Anupama Prime Video
द लास्ट ऑवर रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

वेब सीरीज रिव्यू: द लास्ट ऑवर


लेखक: अमित कुमार, अनुपमा मिंज
कलाकार: संजय कपूर, करमा तकापा, शायली क्रिशेन, रॉबिन तमांग, मंदाकिनी गोस्वामी, शहाना गोस्वामी और राइमा सेन।
निर्देशक: अमित कुमार
ओटीटी: अमेजन प्राइम वीडियो
रेटिंग: **

उत्तर पूर्व भारत पर इन दिनों पूरे देश की नजर है। फिल्मी सितारों के वहां जाकर शूटिंग करने से भी लोगों का ध्यान इधर खिंचा है। पहले आयुष्मान खुराना गए। फिर वरुण धवन गए। प्राइम वीडियो की नई वेब सीरीज ‘द लॉस्ट आवर’ भी इन्हीं इलाकों में शूट हुई है। ऊंचे ऊंचे दरख्तों की हरियाली और दूर दूर तक कोई सन्नाटा। अकेले, शांत खड़े पहाड़ों की चोटियों को चूमकर गुजरते बादल। और, टूटी फूटी सड़कें। वेब सीरीज ‘द लॉस्ट आवर’ की पहली झलक हमें यही दिखाती है। सीरीज की कहानी अच्छी है। ये भी अच्छा है कि इसमें काम करने वाले अधिकतर कलाकार भी उत्तर पूर्व के ही हैं। लेकिन, दृश्य श्रव्य माध्यम में इसके मेकर्स ने दृश्य पर तो पकड़ बनाए रखी लेकिन जो दर्शकों को सुनाई देता है यानी कि इसकी बोली और संवाद इसकी तस्वीरों से मेल नहीं खाते।

The Last Hour Review by Pankaj Shukla Sanjay Kapoor Karma Takapa Amit Kumar Anupama Prime Video
द लास्ट ऑवर रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म ‘बाहुबली’ में एक म्लेच्छ राजा महिष्मती पर जब हमला करता है तो वह अपनी ही बोली में धमकाता है। ‘लॉर्ड ऑफ द रिंग्स’ से ये विचार राजामौली ने उठाया। हिंदी सिनेमा और वेब सीरीज बनाने वालों को भी हर बात खड़ी बोली में ही कहने के मोह से बाहर निकलना होगा। बोलियां हिंदुस्तान की आत्मा हैं। उनके मुहावरे, लोकोक्तियां इस आत्मा की धड़कन हैं। गालियां भी। पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट से पढ़कर निकले करमा तकापा जो कि वेब सीरीज ‘द लॉस्ट आवर’ के मुख्य किरदार देव बने हैं, उन्हें तो कम से कम इस बात का प्रतिरोध करना चाहिए था कि उत्तर पूर्व का किरदार इतनी साफ हिंदी नहीं बोल सकता। अमित कुमार को अधिकतर लोग उनकी नवाजुद्दीन वाली फिल्म ‘मॉनसून शूटआउट’ से जानते हैं। अमित ने अनुपमा मिंज के साथ मिलकर इस सीरीज को रचा है। लेकिन, निर्देशन की दिक्कतें इस सीरीज की बड़ी खामी है।

The Last Hour Review by Pankaj Shukla Sanjay Kapoor Karma Takapa Amit Kumar Anupama Prime Video
द लास्ट ऑवर रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

वेब सीरीज ‘द लॉस्ट आवर’ कहानी एक शामन की है जिसे झाखरी भी कहा जाता है। स्थानीय लोककथा के मुताबिक ये लोग मौत के ठीक घंटा भर पहले की घटनाएं मरे हुए इंसान के शरीर के जरिए जान सकते हैं। पहली ऐसी रीडिंग देव को अपने भाई की ही करते दिखाया जाता है। ये सीरीज का बड़ा गच्चा है। देव की प्रेमिका मोमो खिलाती है तो ठेठ हिंदी बोलती है। शहाना गोस्वामी सैंडविच की स्टफिंग बताते हुए नागालैंड के लोगों की भोजन प्रवृत्तियों को लेकर हिंदी पट्टी में प्रचलित बातें भी पहले ही एपीसोड में सुना देती हैं। आगे कहानी के खुलासे तो होते हैं लेकिन कहानी धीरे धीरे पटरी से उतरने लगती है। महाराष्ट्र पुलिस के लिए काम करता एक पुलिस अफसर उत्तर पूर्व के किसी राज्य में किन नियमों के हिसाब से पहुंच गया, लेखकों को बताना चाहिए। उसकी बेटी के साथ देव का बनता रिश्ता दिलचस्प है और सीरीज के दूसरे सीजन के लिए उत्सुकता भी जगाता है। लेकिन, कहानी का पहली सीरीज के आखिर तक आते आते बार बार लडखड़ाना एक अच्छे विचार के साथ अन्याय है।

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The Last Hour Review by Pankaj Shukla Sanjay Kapoor Karma Takapa Amit Kumar Anupama Prime Video
द लास्ट ऑवर रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

उत्तर पूर्व जितना इस सीरीज में दिखाया गया है उससे बहुत खूबसूरत है। बागडोगरा से कलिंगपोंग की अपनी सड़क यात्रा मुझे जब भी याद आती है, मन में इस इलाके तक फिर से आने की हूक सी उठती है। जयेश नायर ने कहानी के हिसाब से लोकेशन को अच्छे से दिखाया है। लेकिन, उनका कैमरा स्थानीय रहन सहन, रंग ढंग और परंपराओं को अच्छे से फिल्माने से चूक गया। पहाड़ पर किसी सस्पेंस थ्रिलर की शूटिंग में कैमरा कैसे भागता है ये विधु विनोद चोपड़ा की 1985 में रिलीज फिल्म ‘खामोश’ को देखकर अब भी सीखा जा सकता है। पीटर एल्डेरलिएस्टन ने एडीटिंग में पहाड़ों, बादलों का वाइप में इस्तेमाल तो अच्छा किया है, लेकिन एक समय के बाद ये दर्शक को दोहराव लगने लगता है और इससे जी भी उकताने लगता है।

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The Last Hour Review by Pankaj Shukla Sanjay Kapoor Karma Takapa Amit Kumar Anupama Prime Video
द लास्ट ऑवर रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

कलाकारों में ये सीरीज करमा तकापा और शियाली क्रिशेन की शो रील बनती जा रही है। दोनों ने काम भी काफी अच्छा किया है। बस उनके संवाद अगर स्थानीय बोली का पुट लिए होते तो सोने पर सुहागा हो जाता है। शहाना गोस्वामी सब इंस्पेक्टर के रोल में फिट हैं। उनका पुलिस अफसर अरुप संग पींगें बढ़ाना कहानी को थोड़ा रूमानी रंग भी देता है। संजय कपूर के लिए ये वेब सीरीज अभिनय के मामले में नया जीवनदान हो सकती थी। शुरूआती एपीसोड्स में संजय कपूर के चेहरे पर भाव भी अलग अलग आते हैं लेकिन फिर वही सुस्ती उनको घेर लेती है जिसके चलते वह बड़े परदे पर लंबी रेस नहीं लगा पाए। वेब सीरीज ‘द लॉस्ट आवर’ ने पहले सीजन का प्लॉट अच्छा है। इस पर दूसरा सीजन देखने का इंतजार भी रहेगा, लेकिन उससे पहले इसकी क्रिएटिव टीम को थोड़ा ओवरहॉलिंग की जरूरत है।

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