सिनेमा बनाने की जितनी भी कलाएं होती हैं, वे सारी जिस पहली कला से पूनम के चांद तक पहुंचती हैं, वह है लेखन। एक विचार, उस पर लिखी कहानी, कहानी पर बना स्क्रीनप्ले और फिर संवादों के मोतियों से सजकर ये माला जब किसी कलाकार के गले में आती है तो उसकी पहचान कभी एंग्री यंगमैन के रूप में होती है, कभी राहुल, तो कभी प्रेम और कभी रांझणा के रूप में। कालीन भैया, मोगैंबो और गब्बर भी किसी लेखक की ही रची हुई शख्सियतें हैं। इन रचनाकारों का सम्मान आमतौर पर मुंबई में होने वाले फिल्म पुरस्कार समारोहों में कम ही होता है, तो परदे के लिए लिखने वाले ये लेखक बीते पांच साल से अपना खुद का पुरस्कार समारोह करते हैं, अपने बीच के बेहतरीन लेखकों का सम्मान करते हैं और पूरी रात करते हैं जलसा, अपनी मन्नतों की गैलेक्सी के चांद बनकर।
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साल 2023 में परदे तक पहुंची फिल्मों, वेब सीरीज और टेलीविजन धारावाहिकों के रचनाकारों का ये सम्मान समारोह शनिवार की रात मुंबई के मशहूर पंचसितारा होटल ताज लैंड्स एंड में हुआ। सिनेमा की सबसे गरीब समझी जाने वाली इस कौम का बीती रात हुआ ये जलसा इस बात का भी मुजाहिरा है कि मुंबई फिल्म इंडस्ट्री का राइटर अब यहां तक आ पहुंचा है, जहां उसे फाइव स्टार होटलों में दावत के लिए किसी की मेहरबानी की जरूरत नहीं है। मशहूर लेखक रूमी जाफरी ने इस बाबत अपनी उस वक्त की यादें भी साझा कीं जब फिल्म राइटर्स एसोसिएशन (स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन का पूर्वनाम) का सदस्य बनने के लिए उन्हें रंजीत स्टूडियो, दादर का पता दिया गया और वहां पहुंचने पर टूटी मेज, गंदी फर्श देखकर उन्होंने खुद से ही पूछा कि फिल्मों का राइटर कुछ कमाता भी है कि नहीं।
एक बहुत ही भावुक लम्हा उस वक्त भी इस पुरस्कार में देखने को मिला, जब मशहूर लेखक इम्तियाज हुसैन को देखते ही निर्माता-निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा उनके पास तक आए और उनसे बड़ी आत्मीयता से बात की। विधु और इम्तियाज के बीच फिल्म ‘परिंदा’ में संवाद लेखन के क्रेडिट को लेकर लंबी रार चली और ये रार इसलिए शुरू हुई थी क्योंकि विधु ने फिल्म के संवादों की कैसेट पर इम्तियाज हुसैन का नाम नहीं दिया था। हालांकि, इस समारोह में भी विधु विनोद चोपड़ा ने इस फिल्म को अपनी लिखी ही फिल्म बताया और इम्तियाज ने इस बात पर उन्हें माफ भी कर दिया। लेकिन, इससे पहले जब इम्तियाज को मंच पर पुरस्कार देने के लिए बुलाया गया तो न सिर्फ उन्होंने फिल्म ‘परिंदा’ में जैकी श्रॉफ के लिए अपना संवाद सुनाया बल्कि वो दिन भी याद किया जब इसकी सिटिंग विधु के बांद्रा स्थित घर पर रात दो बजे तक चली थी। फिल्म ‘परिंदा’ की पटकथा शिव कुमार सुब्रहमण्यम ने लिखी।
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स्क्रीन राइटर्स अवार्ड्स का ये पांचवां साल रहा। इन पुरस्कारों का पहला आयोजन ऑनलाइन किया गया था। पुरस्कार समारोह में हिस्सा लेने हिंदी फिल्म, टीवी और ओटीटी इंडस्ट्री के तमाम दिग्गज लेखक इस दौरान मौजूद रहे। जावेद अख्तर अपनी पत्नी शबाना आजमी के साथ कार्यक्रम में समय से पहुंचे और कुछ देर रुकने के बाद चले गए। निर्देशक-लेखक सूरज बड़जात्या भी ठीक समय पर कार्यक्रम में पहुंच गए और अंत तक मौजूद रहे। इस दौरान जितने भी लोग उनके मिलने गए, उन्होंने कुर्सी से खड़े होकर सबसे हाथ मिलाया और बहुत स्नेह से बातें की। स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन (एसडब्लूए) की अध्यक्ष प्रीति ममगैन ने कार्यक्रम में आए सभी लोगों का स्वागत किया और लेखकों की इस एकजुटता के लिए सबका धन्यवाद किया। वहीं, एसडब्लूए के महासचिव जमा हबीब ने इन पुरस्कारों के बीते पांच साल के सफर को शानदार बताया और कहा कि ये कारवां यूं ही आगे बढ़ता रहेगा।
स्क्रीन अवार्ड्स 2024 के विजेताओं की सूची इस प्रकार है:
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