खांसी एक ऐसा लक्षण है जो वायरल फीवर, कोविड और टीबी तीनों में पाया जाता है। खांसी आने पर लोग अक्सर दवा की दुकानों से सीरप या दवाएं ले लेते हैं, जो सही नहीं है। हर खांसी वायरल या कोविड नहीं होती है। अगर दो सप्ताह तक खांसी आए और शाम को पसीने के साथ बुखार हो तो टीबी जांच अवश्य कराएं।
जरूरी नहीं हर खांसी वायरल और कोविड हो, तत्काल लें डॉक्टर की सलाह और कराएं ये जांच
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रामेश्वर मिश्रा ने बताया कि समय से टीबी की जांच न होने पर और खांसी को सिर्फ बुखार का हिस्सा समझ कर दवा कराने पर बड़े खतरे को दावत दे रहे हैं। इस स्थिति में अक्सर मरीज मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट (एमडीआर) टीबी मरीज हो जाता है। इसकी वजह से उसे द्वितीय पंक्ति की दवाएं देनी पड़ती है।
कहा कि तुलनात्मक रूप से प्रथम श्रेणी के दवाओं की अपेक्षा ये दवाएं कमजोर होती हैं एवं शरीर पर दुष्प्रभाव भी ज्यादा हाता है। अगर दो सप्ताह तक लगातार खांसी आ रही हो और तेजी से वजन घट रहा हो। भूख न लगती हो। सीने में दर्द हो। शाम को हल्के बुखार के साथ पसीना आए तो टीबी की जांच अवश्य करवानी चाहिए।
48 केंद्रों पर होती है निशुल्क जांच
उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. विराट स्वरूप श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में सीएचसी, पीएचसी और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एपीएचसी) मिला कर कुल 48 केंद्रों पर टीबी के माइक्रोस्कोपिक जांच की सुविधा उपलब्ध है। माइक्रोस्पोकोपिक और एक्स-रे जांच के बाद जिन लोगों में टीबी की पुष्टि हो जाती है उनकी सीबीनेट और ट्रूनेट जांच कराई जाती है।