दुनिया भर में धार्मिक पुस्तकों के लिए प्रसिद्ध गीता प्रेस की स्थापना के 99 वर्ष शनिवार को पूरे हो जाएंगे। इसके साथ ही गीता प्रेस 100वें (शताब्दी) वर्ष में प्रवेश कर जाएगा। शताब्दी समारोह के अंतर्गत गीता प्रेस सहित देशभर में गीता प्रेस के सभी केंद्रों पर वर्ष भर कार्यक्रम आयोजित होंगे। जून के पहले सप्ताह में राष्ट्रपति के गीता प्रेस आने का कार्यक्रम भी है।
शताब्दी समारोह: आज 100वें वर्ष में प्रवेश करेगा गीता प्रेस, 74 करोड़ धार्मिक पुस्तकों का हो चुका है प्रकाशन
गीता प्रेस की 23 अप्रैल 1923 को स्थापना हुई थी। अबतक 74 करोड़ धार्मिक पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है। धूमधाम से स्थापना दिवस शताब्दी समारोह मनाया जाएगा। जून के पहले सप्ताह में राष्ट्रपति गीता प्रेस आ सकते हैं।
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प्रेस मालिक ने एक दिन कहा कि इतनी शुद्ध गीता प्रकाशित करवानी है तो अपना प्रेस लगा लीजिए। गोयंदका ने इस कार्य के लिए गोरखपुर को चुना। 23 अप्रैल 1923 को उर्दू बाजार में 10 रुपये महीने के किराए पर एक कमरा लिया गया और वहीं से शुरू हुआ गीता का प्रकाशन। धीरे-धीरे गीता प्रेस का निर्माण हुआ और इसकी वजह से पूरे विश्व में गोरखपुर को एक अलग पहचान मिली। आज प्रेस के पास दो लाख वर्ग फीट जमीन है। इसमें 1.45 लाख वर्ग फीट में प्रेस, कार्यालय व मशीनें हैं। 55 हजार वर्ग फीट में दुकानें व आवास हैं।
ऐसे हुई कल्याण की शुरुआत
गीता प्रेस के प्रबंधक लालमणि तिवारी ने बताया कि दिल्ली में अप्रैल 1926 में आयोजित मारवाड़ी अग्रवाल सभा के आठवें अधिवेशन में घनश्यामदास बिड़ला ने भाईजी को अपने विचारों व सिद्धांतों पर आधारित एक पत्रिका निकालने की सलाह दी। गीता प्रेस के संस्थापक सेठजी जयदयाल गोयंदका की सहमति से 22 अप्रैल 1926 को पत्रिका का नाम कल्याण निश्चित हुआ। इसी वर्ष भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार के संपादकत्व में कल्याण का प्रथम साधारण अंक मुंबई से प्रकाशित हुआ। दूसरे वर्ष कल्याण का प्रथम विशेषांक भगवन्नामांक गोरखपुर से प्रकाशित हुआ। तभी से कल्याण का प्रकाशन गीता प्रेस से हो रहा है।
घर-घर गीता पहुंचाने के लिए हुई गीता प्रेस की स्थापना
गीता प्रेस के प्रबंधक ने बताया कि कम दामों में शुद्ध और सरल भाषा में गीता को घर-घर पहुंचाने के लिए गीता प्रेस की स्थापना हुई थी। इसी उद्देश्य के साथ आज भी गीता के साथ ही अन्य धार्मिक पुस्तकों का प्रकाशन कर लागत से कम मूल्य पर लोगों को धार्मिक पुस्तकें उपलब्ध कराया जा रहा है।
सेठजी के बाद भाईजी ने संभाली बागडोर
गीताप्रेस से प्रकाशित होने वाली मासिक पत्रिका कल्याण के प्रथम संपादक भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार ने 17 अप्रैल 1965 को सेठजी के शरीर त्याग के बाद गीताप्रेस की बागडोर संभाल ली। उन्होंने अनेक ग्रंथों का संपादन करते हुए उनकी टीका भी लिखी है, ताकि पाठकों को आसानी से पुस्तकें समझ में आ जाए। 22 मार्च 1971 को वह भी गोलोकवासी हो गए। इस समय पूरी व्यवस्था ट्रस्टी देवीदयाल अग्रवाल देख रहे हैं।