तेज बारिश और गंडक नदी से पानी छोड़े जाने की वजह से गोरखपुर से होकर बहने वाली नदियां फिर उफना गईं हैं। राप्ती नदी भी खतरे का निशान पार गई है। यह नदी 81 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। इसी का नतीजा है कि 12 और गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया। अभी तक 68 गांव बाढ़ से प्रभावित थे। अब संख्या बढ़कर 80 हो गई है। 19 गांव ऐसे हैं, जो बाढ़ के पानी से पूरी तरह घिर चुके हैं।
Gorakhpur Flood: गोरखपुर मंडल में फिर उफनाईं नदियां, अब 80 गांव बाढ़ के पानी से घिरे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नदियों के उफनाने से बंधों पर जबरदस्त दबाव बना है। कटान और बाढ़ का खतरा है। इससे प्रशासनिक अफसर चिंतित है। कमिश्नर जयंत नार्लिकार शुक्रवार को खुद बंधों का निरीक्षण करने निकले। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सहजनवां के साथ कई बंधों का निरीक्षण भी किया। साथ ही बाढ़ से निपटने की तैयारियों की जानकारी भी ली। बहरहाल, नदियों के उफनाने से पानी आबादी क्षेत्र में घुस गया है। ग्रामीण मवेशी के साथ तटबंधों पर आ गए हैं। अब 80 गांवों में नाव से ही आने-जाने का साधन बचा हैै।
गोरखपुर सदर, सहजनवां, कैंपियरगंज, बांसगांव, गोला और खजनी तहसील में बाढ़ का पानी ज्यादा तबाही मचा रहा है। सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न हो गई है। किसानों का कहना है कि अब धान की फसल मिल पानी संभव नहीं है। इसका बड़ा असर धान की पैदावार पर भी पड़ेगा। दूसरी तरफ बहरामपुर गांव में पानी और भर गया है। ट्रांसपोर्ट नगर के आसपास भी कुछ क्षेत्रों में राप्ती नदी का पानी पहुंचा है। राजघाट स्थित श्मशान घाट पूरी तरह से डूब चुका है।
एसडीएम, तहसीलदार को मानीटरिंग में लगाया
नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन हाई अलर्ट पर है। जिलाधिकारी के. विजयेंद्र पांडियन ने ज्यादातर एसडीएम, तहसीलदार की ड्यूटी बंधों की निगरानी में लगा दी है। शुक्रवार को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सहजनवां और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सदर के साथ ही तमाम अफसर बंधों का निरीक्षण करने निकले। रैट होल सहित तमाम सुरक्षा के मानक भी परखे गए।
अलर्ट पर एनडीआरएफ, एसडीआरएफ
बाढ़ के खतरे को देखते हुए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें अलर्ट हैं। अलग-अलग तहसील क्षेत्रों के 259 छोटी, बड़ी नाव का इंतजाम किया गया है। नाव के जरिए ही ग्रामीणों का आवागमन हो रहा है। एनडीआरफ की टीम स्टीमर के साथ राहत-बचाव कार्य में लगी है।