हिंदू धर्म में पेड़-पौधों का विशेष महत्व है। खासतौर पर बरगद और पीपल के पेड़ों की तो पूजा-अर्चना भी की जाती है। अब ये दोनों पेड़ ढूंढने पर भी नहीं मिल रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है अंधाधुंध विकास। सिर्फ विकास के नाम पर हर साल लाखों पेड़ काटे जा रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या बरगद और पीपल के पेड़ों की है। धार्मिक के साथ ही बरगद और पीपल के पेड़ वैज्ञानिक लिहाज से भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। क्योंकि सबसे अधिक ऑक्सीजन इन्हीं दोनों पेड़ों से प्राप्त होती है। इसके अलावा इनमें कई औषधीय गुण भी होते हैं।
तस्वीरें: विकास की भेंट चढ़ रहा 'जीवनदायी' वट वृक्ष, पूजन के लिए भटक रही महिलाएं
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शासन-प्रशासन की ओर से इन पेड़ों के बदले पौधे तो लगाए जाते हैं, लेकिन बरगद और पीपल के पौधों की संख्या बहुत कम होगी। कोरोना काल में जिस तरह से हम सभी को ऑक्सीजन की कमी का सामना करना पड़ा है, वैसी समस्याओं का सामना भविष्य में न करना पड़े इसके लिए अब आम लोगों को आगे आकर इन दोनों पेड़ों के पौधों को लगा इनका संरक्षण करना होगा।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राणि विज्ञान विभाग के भूतपूर्व विभागाध्यक्ष डीके सिंह ने बताया कि बरगद के पेड़ भरपूर ऑक्सीजन देते हैं। इसके साथ ही इसके के गुदे को खाद के रूप में इस्तेमाल हो सकता है। आयु अधिक होने से इसका विस्तार भी अधिक होता है। ऐसे में इसके आसपास प्राकृतिक माहौल तैयार हो जाता है। वर्तमान में बरगद को अधिक से अधिक संख्या में लगाए जाने की आवश्यकता है।
योग शिक्षक हरि नारायण धर दुबे ने कहा कि विकास के नाम पर बरगद और पीपल जैसे ऑक्सीजन के स्रोत वाले पेड़ों को काटा जा रहा है, इसके बदले में जो पेड़ लगाए जा रहे हैं वह भरपूर ऑक्सीजन देने में सक्षम नहीं होते हैं। ऑक्सीजन की कमी न हो इसके लिए बरगद के पेड़ खुद लगाने के साथ ही दूसरों को भी लगाने के लिए प्रेरित करूंगा।
बशारतपुर की निवासी बबिता ने बताया कि वट सावित्री व्रत करने के लिए हर साल वट वृक्ष की तलाश करनी पड़ती है। पहले असुरन चौक स्थित बरगद के पेड़ की पूजा करने जाती थी, लेकिन फोरलेन निर्माण के कारण वह काट दिया गया। अब हर साल नई जगह पर बरगद के पेड़ की तलाश न करनी पड़े, इसके लिए अब खुद बरगद का पौधा लगाऊंगी।
राप्तीनगर निवासी आंचल श्रीवास्तव ने बताया कि वट सावित्री व्रत के दिन घर से चार किलोमीटर दूर पूजा करने के लिए जाना पड़ता था, लेकिन इस बार वह पेड़ भी कट चुका है। पति से कई जगहों पर बरगद के पेड़ की तलाश कराई लेकिन पेड़ नहीं मिला। ऐसें में बरगद का पौधा खरीदकर लाई हूं। इसी की पूजा की हूं।