मधुमेह (शुगर) के कई मरीजों की जुबान अब स्वाद भूलने लगी है। उन्हें नमकीन, खट्ठे, मीठे-तीखे स्वाद के बीच फर्क पता नहीं चल पाता। डॉक्टरों के अनुसार इस समस्या को ऑटोनामिक न्यूरोपैथी डिस्फंक्शन कहते हैं। इस बीमारी से पीड़ित जिला अस्पताल से लेकर, बीआरडी मेडिकल कॉलेज और निजी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं।
मधुमेह: मरीजों की जुबान भूल रही स्वाद, खट्टे-मीठे-तीखे का अंतर करने में खा रही धोखा
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष डॉ. महिम मित्तल ने बताया कि ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी डिस्फंक्शन शरीर के किसी भी हिस्से को नुकसान पहुंचा सकता है। कुछ लोगों की याददाश्त भी चली जाती है। कई बार लोगों का स्वाद और गंध का पता नहीं चल पाता है। एमडी मेडिसिन डॉ. गौरव पांडेय ने बताया कि इस बीमारी से पीड़ित मरीजों में अधिकांश की उम्र 50 के पार है।
स्वाद और सूंघने की ग्रंथियां हो जाती है शिथिल
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी डिस्फंक्शन के चलते स्वाद और सूंघने की ग्रंथियां शिथिल हो जाती हैं। स्वाद कलिकाएं खाने का स्वाद नहीं पता कर पाती हैं। खाने में नमक कम लगता है। ऐसी स्थिति में मरीज ज्यादा नमक खाने लगता है। उसे ब्लड प्रेशर की समस्या भी हो जाती है। बताया कि ऐसे मरीजों की एचबी-टू, फास्टिंग और पीपी सैंपल टेस्ट किए गए। ये असामान्य मिले।
पैरों के तलवे में होने लगती है जलन
डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी डिस्फंक्शन के चलते हाथों -पैरों के तलवे में जलन की समस्या भी होने लगती है। ऐसे मरीजों को सलाह दी जा रही है कि वे शुगर के स्तर पर नजर रखें। अगर घट और बढ़ रहा है तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।
हर माह 25 से 30 मरीज मिल रहे
डॉक्टरों के अनुसार, बीआरडी और जिला अस्पताल में हर माह इस तरह के 25 से 30 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। डॉक्टर उन्हें शुगर स्तर नियंत्रित करने की सलाह दे रहे हैं।