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Jivitputrika Vrat 2020: संतान की दीर्घायु के लिए माताओं ने रखा जीवित्पुत्रिका निर्जला व्रत, यूट्यूब पर सुनी कथा
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 10 Sep 2020 08:56 PM IST
सार
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Jivitputrika Vrat 2020
- फोटो : अमर उजाला।
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जीवित्पुत्रिका व्रत (जिउतिया) का पर्व बृहस्पतिवार को परंपरागत रूप से श्रद्धा के साथ मनाया गया। माताओं ने संतान के दीर्घायु होने की कामना से निर्जला व्रत रखा। कोरोना से निजात के लिए भी इस दौरान प्रार्थना की गई। दोपहर के बाद माताओं ने संतान की समृद्धि और आरोग्य के मनोरथ के साथ बरियार (पौधे) की पूजा की। इसके बाद जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा भी सुनीं। माताएं शुक्रवार को अपनी संतानों के गले में जिउतिया बांधने के बाद व्रत का पारण करेंगी।
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बृहस्पतिवार को व्रत का दिन होने के चलते घरों में साफ-सफाई का सिलसिला भोर से ही शुरू हो गया। माताओं ने सूर्य उगने से पूर्व सरगही खाकर पानी पिया। फिर पूरे दिन निर्जला व्रत रखने का संकल्प लिया। दोपहर के बाद चिचिहड़ा का दातून कर माताओं ने स्नान किया और उसके बाद पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हुआ।
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माताएं बरियार के पौधे के पास पहुंचीं और पौधे को सिंदूर से टीका गया और फिर उसमें जल अर्पित किया। फिर व्रती माताओं ने समूह में बैठकर व्रत के महात्म्य की कथाएं सुनीं। माताएं व्रत का पारण शुक्रवार को संतानों को जिउतिया बांधने के बाद करेंगी।
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ये है व्रत की पौराणिक मान्यता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार द्वापर युग में देवी कुंती ने कर्ण को नदी में प्रवाहित करने के बाद उसकी रक्षा के लिए बरियार पौधे की पूजा की। मान्यतानुसार बरियार का कुंती द्वारा पूजन किए जाने से ही कर्ण का शरीर वज्र के समान हुआ था। तभी से इस व्रत की शुरुआत मानी जाती है।
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यूट्यूब पर भी सुनी कथा
कोरोना काल में आधुनिक तकनीक काम आ रही है। जिउतिया व्रत में शाम को पूजन के बाद पुरोहितों से व्रत की कथा सुनने का विधान है। लेकिन कोरोना संकट में पुरोहितों के मिलने में मुश्किल पेश हो रही है। ऐसे में गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रांगण में पूजन करने पहुंचीं महिलाओं ने मोबाइल फोन को कथा का माध्यम बनाया और यूट्यूब से जीवित्पुत्रिका के व्रत की कथा सुनी।
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