जिस तरह से गोरक्षपीठ ने सामाजिक समरसता का संदेश दिया है, वैसा ही संदेश अयोध्या में बनने वाले भव्य राम मंदिर से भी मिलेगा। गोरक्षपीठ के मुख्य पुजारी कमलनाथ अनुसूचित जाति (एससी) के हैं।
जिस तरह से गोरक्षपीठ से मिला ये संदेश, वैसा ही अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर से भी मिलेगा
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मंदिर के सचिव द्वारिका तिवारी ने कहा कि यह प्रेरणा शायद गोरक्षपीठ से ही मिली होगी। गोरक्षपीठ सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल है। यहां न कोई छोटा, न कोई बड़ा है। इतना ही नहीं श्रीराम जन्म भूमि आंदोलन में गोरक्षपीठ की तीन पीढ़ियों का योगदान रहा है। जन्मभूमि आंदोलन की शुरूआत जब हुई तो उसमें महंत दिग्विजयनाथ ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। वह जब तक जिंदा रहे, हिंदू महासभा के अध्यक्ष के रूप में अग्रणी भूमिका निभाते रहे। विश्व हिंदू परिषद ने जब आंदोलन खड़ा किया तो राम जन्मभूमि यज्ञ समिति अध्यक्ष महंत अवेद्यनाथ को बनाया गया। उस पर वह जीवन पर्यंत विराजमान रहे। वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ भी उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। वह यूपी के मुख्यमंत्री भी हैं।
महंत अवेद्यनाथ ने दिलाया सम्मान
गोरखनाथ मंदिर के सचिव द्वारिका तिवारी ने बताया कि तत्कालीन गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ ने छुआछूत के खिलाफ पूरे देश में अभियान चलाया। इसकी शुरूआत दक्षिण भारत के मीनाक्षीपुरम मंदिर से की, जहां एससी का प्रवेश वर्जित था। महंत अवेद्यनाथ ने वहां जाकर धरना दिया। संतों को समझाया और कहा जब हिंदू नहीं रहेगा तो कौन आप को पूछेगा। इसके बाद दक्षिण के मंदिरों में एससी का प्रवेश शुरू हुआ। उन्होंने पटना के हनुमान मंदिर का महंत भी एससी को बना कर साबित किया कि हिंदू समाज में भेदभाव की कोई जगह नहीं है। इतना ही नही श्री राम जन्म भूमि का जब शिलान्यास किया गया तो उसकी शुरूआत अवेद्यनाथ जी महराज ने एक एससी कामेश्वर से कराई थी।
25 सालों से मंदिर के मुख्य पुजारी हैं कमलनाथ
गोरखनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी कमलनाथ 25 साल से काम देख रहे हैं। युवा अवस्था में ही वह सांसारिक सुख से परे हो गए। वे बताते हैं कि छत्तीसगढ़ के एक एससी परिवार में पैदा हुए। युवा अवस्था में ही घर छोड़ दिया। उनकी इच्छा योग धारण करने की थी। वह 1980 में गोरखनाथ मंदिर आए। तब ब्रह्मलीन पीठाधीश्वर के गुरु भाई नवमीनाथ महराज की सेवा करने लगे। दो साल तक उनकी सेवा की, फिर उन्होंने अपना शिष्य बना लिया।
महंत अवेद्यनाथ महराज का भी उन पर आशीर्वाद रहा। यही कारण है कि वह 25 साल से मंदिर के मुख्य पुजारी का दायित्व निभा रहे हैं। वह कहते हैं कि नाथ पंथ में कोई भेदभाव नहीं है। यह सामाजिक समरसता का संदेश वह पूरे हिंदू समाज को देते हैं कि आपस में प्रेम करना सीखो। सभी भगवान की संतान हैं। इसलिए यहां कोई छोटा है न बड़ा है। वह कहते हैं कि प्रधानमंत्री ने नरेंद्र मोदी ने जिस ट्रस्ट की घोषणा की है, वह बहुत ही प्रशंसनीय है।