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Sawan 2022: भगवान शिवशंकर को प्रसन्न करने में जुटे श्रद्धालु, शिवालयों में उमड़ी भीड़

अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 08 Aug 2022 10:51 AM IST
सार

वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, सोमवार को पूर्वाफाल्गुनी और उत्तराफाल्गुनी दोनों नक्षत्रों का सुयोग है। चंद्रमा की स्थिति कन्या राशि में है और राशि स्वामी व्यापार की वृद्धि करने वाले बुध ग्रह हैं।

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Sawan Somvar 2022 Shiva devotees arrived to temple in gorakhpur
sawan 2022 - फोटो : अमर उजाला।

देवों के देव महादेव को प्रिय श्रावण मास का चौथा सोमवार आज है। श्रद्धालु सुबह तीन बजे से ही शिवालयों में जलाभिषेक और पूजन-अर्चन कर भगवान शिव को प्रसन्न करने में जुटे हुए हैं।


 
सोमवार को महादेव झारखंडी, मुक्तेश्वरनाथ, मानसरोवर आदि शिवालयों में होने वाली भक्तों की भीड़ को देखते हुए रविवार को मंदिर प्रबंधन तैयारी में जुटा रहा।
वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, सोमवार को पूर्वाफाल्गुनी और उत्तराफाल्गुनी दोनों नक्षत्रों का सुयोग है। चंद्रमा की स्थिति कन्या राशि में है और राशि स्वामी व्यापार की वृद्धि करने वाले बुध ग्रह हैं।

 

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Sawan Somvar 2022 Shiva devotees arrived to temple in gorakhpur
sawan 2022 - फोटो : अमर उजाला।

इस दिन ध्वज नामक औदायिक योग है। इस योग में महादेव का जलाभिषेक और पूजन-अर्चन से श्रद्धालुओं की चतुर्दिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा। ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, सोमवार को शिवालय जाकर पंचाक्षरी मंत्र के साथ दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, पंचामृत, इत्र, फलों के रस, गंगाजल से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करें।

 

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Sawan Somvar 2022 Shiva devotees arrived to temple in gorakhpur
sawan 2022 - फोटो : अमर उजाला।

सावन मास से जुड़ी पौराणिक कथाएं
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, सावन का महीना अनेक पौराणिक कथाओं से जुड़ा है। यह महीना सर्वोत्तम मास के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है इस महीने में मृकंडुषि के पुत्र मार्कंडेय ने दीर्घायु होने के लिए भगवान शिव की घनघोर तपस्या की थी।

Sawan Somvar 2022 Shiva devotees arrived to temple in gorakhpur
sawan 2022 - फोटो : अमर उजाला।

ज्योतिषाचार्य पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, रुद्राभिषेक का मानव जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। रुद्राभिषेक से मन शुद्ध और सत्वगुणी होता है। इससे संकल्प शक्ति में वृद्धि होती है। इसके साथ ही ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, श्रद्धा, भक्ति और पवित्रता मे भी वृद्धि होती है। धन लाभ और आरोग्यता प्राप्त होती है। बताया कि धर्मशास्त्र में कहा गया है कि वेद शिव है और शिव वेद हैं। इसलिए वेद मंत्रों द्वारा भगवान आशुतोष का पूजन अभिषेक किया जाता है। जैसे ब्रह्म सभी पदार्थों मे व्याप्त हैं, वैसे ही भगवान रुद्र (शिव) अग्नि, जल, औषधि, वनस्पति आदि सभी पदार्थों में समाहित हैं। समस्त ब्रह्मांड को वह अपनी शक्ति से सामर्थ्यवान बनाते हैं। इसलिए उनका नाम रुद्र पड़ा है।
 

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sawan 2022 - फोटो : अमर उजाला।

ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, जल से वर्षा, कुशा के जल से शांति, दधि से पशु प्राप्ति, मधु और घी से धन, तीर्थजल से मोक्ष, दुग्ध से शीघ्र संतान प्राप्ति, प्रमेह रोग की शंति और मनोवांछित फलों की प्राप्ति, शर्करा मिले दूध से रुद्राभिषेक करने से जड़ बुद्धि निर्मल होता है। सरसों के तेल से अभिषेक करने पर विरोधियों का प्रभाव न्यून होता है। जिस ग्रह की जो समिधा है, उसको मिलाकर अभिषेक करने से उस ग्रह का प्रकोप समाप्त होता है।

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