गोरखपुर जिले के तुर्कमानपुर स्थित बर्फखाना के पास रहने वाली निगार खानम को बागवानी का शौक बचपन से है। उन्होंने अपने घर के अंदर 1400 स्क्वायर फीट का गार्डन तैयार किया है, जिसमें फलदार पेड़, सजावटी और औषधीय पौधों की विभिन्न प्रजातियों का संग्रह है। निगार के पति मो. जुबैर खान उर्फ रज्जू भाई एक कंपनी में मैनेजर हैं। निगार ने बताया कि वर्ष 1980 में शादी के बाद कुछ समय तक वह पति के साथ नेपाल में रहीं। दो साल बाद जब गोरखपुर में आवास लिया तो पति के सहयोग से बागवानी के शौक को पूरा करने में जुट गईं। उन्होंने बताया कि उनके गार्डन में अमरूद, कड़ी पत्ता, नींबू, नींबू, मेंहदी आदि का संग्रह है तो फूलों में गुलाब, गेंदा, गुड़हल की कई प्रजातियां भी मौजूद हैं। सजावटी पौधों में कैक्टस, सरकुलेंट्स, हेज, बोगनवेलिया की कई प्रजातियां हैं।
तस्वीरें: हरियाली बढ़ा देती है 'निगार' के घर की रौनक, बागवानी का शौक बना इनका जुनून
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग से सेवानिवृत्त प्रो. अजय कुमार श्रीवास्तव और उनकी पत्नी सुमन श्रीवास्तव को बागवानी से बेहद लगाव है। 40 वर्ष से दंपती बंसतपुर स्थित अपने आवास में बागवानी का शौक पूरा कर रहे हैं। उन्होंने टेरेस और बालकनी में गमलों के अंदर 600 प्रजातियों के पौधों का संरक्षण कर रखा है। दंपती ने बताया कि कैक्टस, सरकुलेंट्स, कैलेथिया, कैलाडियम, बिगोनिया, लिली, बोगनवेलिया, कमल, गुड़हल, गुलाब, कोलोकैसिया, एंथुरियम, एडेनियम, ब्लीडिंग हाट्र, लिथोप्स की सैकड़ों प्रजातियां घर की शोभा बढ़ाती हैं।
धरमपुर की नीतू श्रीवास्तव बागवानी के माध्यम से घर को हरा भरा रखती हैं। उन्होंने घर में 200 गमलों में पौधे लगा रखे हैं। उन्होंने बताया कि शादी के बाद ससुराल आना हुआ तो उन्होंने अपने बागवानी के शौक के बारे में पति को बताया। पति का सहयोग मिला तो नीतू ने शुरूआत पांच गमलों से की। 15 वर्षों में अब गमलों की संख्या बढ़कर 200 तक पहुंच गई है। उनके घर के अंदर औषधीय पौधों में तुलसी, गिलोय, पुदीना, तेजपत्ता, कड़ीपत्ता तो फूलदार में सदाबहार गुड़हल, गुलाब, कामिनी, रातरानी घर को खूबसूरती को बढ़ाते हैं। इसके साथ ही फलदार पौधों में उन्होंने अंजीर, चीकू, आम और नींबू लगाया है।
पूर्वोत्तर रेलवे मुख्यालय से सेवानिवृत्त पूनम श्रीवास्तव को बागवानी का शौक तो है ही, वह घर के किचन वेस्ट से ही अपने पौधों के लिए जैविक खाद भी तैयार करती हैं। इसके लिए केला, प्याज, आलू, लहसुन के साथ अन्य हरी सब्जियों, फल के निष्प्रयोज्य हिस्से, चायपत्ती का इस्तेमाल करती हैं। उन्होंने 1500 स्क्वायर फीट की छत को टैरेस गार्डन के रूप में तैयार किया है। करीब 100 गमलों में गुड़हल, गुलाब, मोगरा, हरसिंगार, मनी प्लांट, पोर्टलेक, सदाबहार, चांदनी, मयूरपंखी, एलमांडा, पान, मिर्च, एलोवेरा, कड़ी पत्ता, पपीता, आंवला, लाजवंती, तुलसी कनेर, पुदीना गिलोय आदि के पौधे लगा रखे हैं।
भगत चौराहा स्थित न्यू कॉलोनी कजाकपुर में रहने वाले शिक्षक डॉ. ओम प्रकाश मणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी प्रियंका त्रिपाठी को बागवानी सुहाती है। दंपती ने अपने लॉन में किचन गार्डन के साथ साथ फलदार पौधे लगाए हैं। वर्ष 2012 से बागवानी में जुटे दंपती ने बताया कि वह रोजाना बागवानी के लिए समय निकालते हैं। खासकर लॉकडाउन में उन्होंने बागवानी का जमकर लुत्फ उठाया। उनके गार्डन में एक तरफ जहां आम और आंवला के पेड़ मौजूद हैं, वहीं तुलसी, मेंहदी, गिलोय, एलोवेरा, अशोक की कई प्रजातियों के पौधों का संग्रह भी है।