गोरखपुर जिले के बरगदवां इंडस्ट्रियल एरिया में रहने वाली स्प्रिंगर पब्लिक स्कूल की डायरेक्टर शिप्रा श्रीवास्तव को बागवानी का शौक उनके पति वैभव श्रीवास्तव से मिला है। उनके पति अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन वे उनकी स्मृतियों को और सुबह में बागवानी को सहेजकर रखती हैं। उन्होंने अपने घर के अंदर पांच हजार स्क्वायर फीट में किचन गार्डेन तो इतने में ही लॉन भी तैयार किया है।
'मोरनी' को भी सुहाती है शिप्रा के बगिया की हरियाली, रजनीगंधा व रातरानी से महकती है इनकी बालकनी
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अमर उजाला से बातचीत में शिप्रा ने बताया कि उनके पति को बागवानी से बेहद लगाव था। वो अक्सर पौधों की एक से बढ़कर एक प्रजातियों को अपने गार्डेन के लिए खरीदकर लाते थे। वर्ष 2011 में उनके निधन के बाद शिप्रा ने स्कूल के साथ बागवानी की कमान संभाली। गार्डेन में लगे पेड़, पौधे और हरी घास इसे प्राकृतिक रूप देते हैं। यही वजह है कि हर रोज सुबह उनके गार्डेन में मोरनी आकर टहलती है। औषधीय पौधों के साथ ही फूल गार्डेन की शोभा को बढ़ाते हैं। बेटे अर्जुन और आर्यन भी सहयोग करते हैं।
रजनीगंधा व रातरानी से महकती है सुधा की बालकनी
बशारतपुर के जेमिनी रेजिडेंसी में रहने वाली सुधा चौरसिया ने घर की बालकनी में 30 गमलों में बेततरीन पौधे लगाए हैं। उन्होंने बताया कि पूरे साल कुछ सीजनल पौधे लगाती रहती हैं। जब कई तरह के फूल खिलते है तो तितलियां भी खूब आती हैं। रात में बेली, रजनीगंधा और रातरानी की खुशबू से मन मंत्रमुग्ध हो जाता है।
मानव के साथ प्रकृति सेवा में जुटी हैं मनीषा
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बतौर स्टाफ नर्स कार्यरत मनीषा सिंह मानव सेवा के साथ ही प्रकृति की सेवा के लिए भी रोजाना समय निकालती हैं। उन्होंने झुंगिया बाजार स्थित अपने आवास की छत पर एक हजार स्क्वायर फीट में टैरेस गार्डेन तैयार किया है। वे मौसमी सब्जियां भी गमलों में ही उगाती हैं। पति कपिलदेव सिंह के साथ रहने वाले मनीषा ने बताया कि उनके घर में आम, अमरूद, लीची, मौसमी, संतरा, चीकू, नींबू, अंजीर, बेर, अंगूर, अनार, अमरख और शरीफा के पौधे चार चांद लगाते हैं।
अपराजिता चौधरी को बागवानी का शौक बचपन से रहा है। घंटाघर स्थित घर में उन्होंने 3000 स्क्वायर फीट का गार्डेन तैयार किया है। वे रोजाना दो घंटे का समय बागवानी के शौक को पूरा करने के लिए निकालती हैं। पति पावस चौधरी व्यवसायी हैं। उन्होंने कई देसी और विदेशी फूलों के पौधे लगाए हैं। बेटी मानविका और सास शैल चौधरी भी उनका सहयोग करती हैं।