मधुमेह (शुगर) से मरीजों की आंखों की नसें बंद हो रहीं हैं। इसकी वजह से उनकी आंखों से खून का रिसाव हो रहा है। कई मरीजों की आंखों की रोशनी भी चली गई है। इस तरह के मरीज बीआरडी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों के नेत्र रोग विशेषज्ञों के पास पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों की भाषा में इस बीमारी को प्रालिफिरेटिव डायबिटिक रेटिनोथेरेपी (पीडीआर) कहते हैं। इन मरीजों का शुगर पीपी 250 से अधिक रहा है।
मधुमेह: आंखों की नसों को सुखा दे रहा शुगर, निजी अस्पतालों में बढ़ती जा रही मरीजों की संख्या
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राम कुमार जायसवाल ने बताया कि डायबिटिक रेटिनोथेरेपी आंखों के लिए बेहद खतरनाक है। इस बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। बीआरडी में ऐसे मरीजों का इलाज चल रहा है। कुछ मरीजों की दोनों आंखों की रोशनी तक चली गई है। इसलिए शुगर के मरीजों को हर दो साल पर आंखों की जांच जरूर करा लेनी चाहिए। बताया कि बहुत ऐसे युवा भी शुगर से पीड़ित आ रहे हैं, जिनके आंखों की रोशनी कम हो रही है।
ऐसे युवा इंसुलिन से शुगर नियंत्रित कर रहे हैं। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. रजत कुमार ने बताया कि प्रालिफिरेटिव डायबिटिक रेटिनोथेरेपी, नॉन प्रालिफिरेटिव रेटिनोथेरेपी (एनपीडीआर) से ज्यादा खतरनाक है। प्रालिफिरेटिव डायबिटिक रेटिनोथेरेपी में आंखों की नसें बंद हो जाती है। खून का रिसाव आंखों के पर्दे की नलियों से होने लगता है। इसकी वजह से नसें काम करना बंद कर देती हैं। अगर मरीज सही समय पर इलाज के लिए पहुंच जाता है तो ऑपरेशन कर आंखें बचाई जा सकती हैं। पर्दे का ऑपरेशन करना पड़ता है। इस तरह के मामले हर 10 में दो मरीजों में मिल रहे हैं।
शुरुआत आंखों के धुंधलेपन से होती है
डॉ. राम कुमार जायसवाल ने बताया कि आंखों की नॉन प्रालिफिरेटिव डायबिटिक रेटिनोथेरेपी से पीड़ित मरीजों का पीपी शुगर 220 से 240 के बीच रहा है। इन मरीजों में आंखों में धुंधलेपान की शिकायत थी, यह लोग सही समय पर इलाज के लिए पहुंचे तो उनकी आंखों की रोशनी को बचा लिया गया। जबकि, प्रालिफिरेटिव डायबिटिक रेटिनोथेरेपी में मरीजों का शुगर पीपी 250 से अधिक था, इनकी आंखों की नसों में रक्त के छोटे-छोटे धब्बे बनने शुरू हुए थे और अचानक नसें बंद हो गईं। सही समय पर इलाज न मिलने से ऐसे मरीजों की आंखों की रोशनी चली गई। ऐसे मरीजों की संख्या भी साल में 20 से 25 से अधिक रही है।
डॉ रजत कुमार ने बताया कि शुगर के मरीज शुगर को नियंत्रित रखें। साथ ही हर दो साल पर आंखों की जांच कराते रहें। शुगर के मरीजों की आंखों की जांच में सही समय पर ग्लूकोमा, मोतियाबिंद, आंखों का धुंधलापन जैसी समस्याओं की जानकारी मिल जाती है। इसके अलावा जिन लोगों को 10 साल से अधिक से शुगर है वे हर साल आंखों की जांच कराते रहें।