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Navratri: शुभ संयोगों संग दो अप्रैल से शुरू हो रहा वासंतिक नवरात्र, जानिए कलश स्थापना का मुहूर्त

संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 30 Mar 2022 01:45 PM IST
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Vasantik Navratri starting from April 2 with auspicious coincidences
नवरात्र - फोटो : अमर उजाला।

शुभ संयोगों के बीच वासंतिक नवरात्र की शुरुआत दो अप्रैल व समापन 10 अप्रैल को होगा। इस बार नवरात्र पूरे नौ दिनों का है। कोई तिथि न खंडित, (क्षय) है और न वृद्धि को प्राप्त है। यह नवरात्र संतुलन को बनाए रखने वाला और भारतीय समाज में सौम्यता और संतुलन की दृष्टि से उत्तम रहेगा।



वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, दो अप्रैल को प्रतिपदा तिथि का मान दिन में 11 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। इसी तरह रेवती नक्षत्र दिन में 12 बजकर 57 मिनट तक है। इसके पश्चात अश्विनी नक्षत्र है। ऐंद्र योग सुबह आठ बजकर 22 मिनट तक, पश्चात वैधृति योग है। इस दिन धाता नामक औदायिक योग भी है। वासंतिक नवरात्रि का समापन 10 अप्रैल को हो रहा है। इस दिन नवमी तिथि का मान संपूर्ण दिन व रात को 12 बजकर आठ मिनट तक है। इसी तरह पुष्य नक्षत्र भी संपूर्ण दिन व रात्रि शेष चार बजकर आठ मिनट तक है। दिन में सुकर्मा और धृति नाम का योग और श्रीवत्स नाम का महा औदायिक योग भी है।

 

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नवरात्र 2022 - फोटो : amar ujala

वासंतिक नवरात्र का महत्व

ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, बसंत ऋतु में होने के कारण चैत्र नवरात्र को वासंतिक नवरात्र कहा जाता है। इस दौरान हर दिन मां के नौ अलग-अलग रूपों मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना की जाती है। इसके बाद लगातार नौ दिनों तक मां की पूजा व उपवास किया जाता है। नौवें दिन ही हवन के बाद कन्या पूजन होता है। नौ दिनों तक विधि-विधान से व्रत करने वाले श्रद्धालु 10वें दिन पारण करते हैं। मान्यताओं के अनुसार, चैत्र नवरात्र के नवमी तिथि को ही भगवान राम का जन्म हुआ था।

 

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नवरात्र - फोटो : सोशल मीडिया।

आठ को महानिशा पूजा, नौ को अष्टमी का व्रत

पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, महानिशा पूजा बलिदान के लिए आठ अप्रैल का दिन मान्य रहेगा। इस दिन सप्तमी तिथि का मान आठ बजकर 29 मिनट तक पश्चात रात में अष्टमी है। इसी रात में महानिशा पूजा और देवी के निमित्त बलिदानादिक क्रियाएं संपन्न की जाएंगी। बताया कि नौ अप्रैल दिन शनिवार को महाष्टमी का व्रत किया जाएगा। इस दिन अष्टमी तिथि का मान रात्रि 10 बजकर 26 तक रहेगा। इसी तरह पुनर्वसु नक्षत्र भी संपूर्ण दिन और अर्द्धरात्रि के बाद एक बजकर 56 तक है। सूर्योदय की तिथि में अष्टमी होने से और अर्धरात्रि में नवमी का संयोग होने से महाष्टमी व्रत के लिए यह दिन पूर्ण प्रशस्त रहेगा।

 

Vasantik Navratri starting from April 2 with auspicious coincidences
नवरात्र (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

कलश स्थापना मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, कलश स्थापना दो अप्रैल सुबह पांच बजकर 51 मिनट से सुबह छह बजकर 28 मिनट तक। 10 बजकर तीन मिनट से 12 बजकर 17 मिनट तक। अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 36 मिनट से 12 बजकर 36 मिनट तक। शाम चार बजकर 48 मिनट से छह बजकर 10 मिनट तक होगा।

 

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नवरात्र - फोटो : अमर उजाला

कलश स्थापना पूजन विधि

पंडित जोखन पांडेय शास्त्री के अनुसार, वासंतिक नवरात्र का पर्व आरंभ करने के लिए मिट्टी की वेदी बनाकर उसमें जौ और गेहूं मिलाकर बोएं। उस पर विधिपूर्वक कलश स्थापित करें। कलश पर देवी जी मूर्ति (धातु या मिट्टी) अथवा चित्रपट स्थापित करें। नित्यकर्म समाप्त कर पूजा सामग्री एकत्रित कर पवित्र आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें। इसके बाद आचमन, प्राणायाम, आसन शुद्धि करके शांति मंत्र का पाठ कर संकल्प करें। रक्षादीपक जला लें। सर्वप्रथम क्रमश: गणेश-अंबिका, कलश (वरुण), मातृका पूजन, नवग्रहों तथा लेखपालों का पूजन करें। प्रधान देवता-महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती-स्वरूपिणी भगवती दुर्गा का प्रतिष्ठापूर्वक ध्यान, आह्वान, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, गन्ध, अक्षत, पुष्प, पत्र, सौभाग्य द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, ऋतुफल, ताम्बूल, निराजन, पुष्पांजलि, प्रदक्षिणा आदि षोडशोपचार से विधिपूर्वक श्रद्धा भाव से एकाग्रचित होकर पूजन करें।

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