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Exclusive: द्वितीय विश्वयुद्ध के वायुयोद्धा का बंगला चढ़ा दिया नीलामी पर, विभाग के इस कारनामे से आहत हैं 101 साल के मजीठिया
अरुण चन्द, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 12 Oct 2021 11:35 AM IST
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वायुयोद्धा स्क्वाड्रन लीडर दलीप सिंह मजीठिया
- फोटो : अमर उजाला।
जिस वायुयोद्धा स्क्वाड्रन लीडर दलीप सिंह मजीठिया ने गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) को कभी 317 एकड़ जमीन दान दी थी, उनके खुद के बंगले समेत 3.79 एकड़ जमीन चौरीचौरा तहसील प्रशासन ने नीलामी पर चढ़ा दी है। तहसील प्रशासन ने इस बंगले और जमीन को सरदारनगर स्थित सरैया चीनी मिल की जमीन के साथ कुर्क किया, जबकि 1981 में ही सिविल कोर्ट इस जमीन व बंगले को मिल की संपत्ति से अलग बता चुका है। मजीठिया, वर्ष 1945 के विश्वयुद्ध में भारतीय वायुसेना की ओर से बर्मा (अब म्यांमार) में लड़ाकू व बमवर्षक विमानों की स्क्वाड्रन का नेतृत्व कर चुके हैं।
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वायुयोद्धा स्क्वाड्रन लीडर दलीप सिंह मजीठिया को सम्मान देते एयरफोर्स अधिकारी।()फाइल
- फोटो : अमर उजाला।
दलीप सिंह मजीठिया की तरफ से दिए गए अभिलेखों के मुताबिक न्यायालय मुंसिफ, गोरखपुर के यहां सिविल सूट संख्या 1220/1981 में वादी सरदार दलीप सिंह मजीठिया ने सरैया सुगर मिल, सुरेंद्र सिंह मजीठिया, सुरजीत सिंह मजीठिया, ब्रह्मज्ञान सिंह मजीठिया के खिलाफ वाद दाखिल किया था। उन्होंने अपील की थी कि आराजी संख्या 270 में तीन एकड़ 52 डिसमिल व आराजी संख्या 190 में 27 डिसमिल में अपनी 50 साल से अधिक पहले की बिल्डिंग में परिवार सहित काबिज हैं। इसके अलावा भी सामने की जमीन है, जिसमें सरैया चीनी मिल के कुछ लोगों द्वारा कभी-कभी बाधा पहुंचाई जाती है। उन्होंने अपने हक को अलग करने की मांग की थी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद मुंसिफ-6 ने अपने आदेश दिनांक 28 जुलाई 1982 में निर्णय दिया कि वादी 3.79 एकड़ भूमि तथा उस पर स्थित मकान का मालिक एवं इस पर काबिज है।
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वायुयोद्धा स्क्वाड्रन लीडर दलीप सिंह मजीठिया
- फोटो : अमर उजाला।
चीनी मिल की जमीन की कुर्की के समय की गई लापरवाही
साल 1982 में न्यायालय के आदेश के अनुपालन में तहसील के अभिलेखों को दुरुस्त किया गया, मगर करीब एक दशक पूर्व जब सरैया चीनी मिल पर किसानों के बकाया गन्ना मूल्य के मामले में चीनी मिल की संपत्तियों को कुर्क किया गया तो तत्कालीन अधिकारियों-कर्मचारियों ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया। यह भी नहीं देखा कि उक्त आराजी नंबरों की खतौनी में भी दलीप सिंह मजीठिया का नाम दर्ज है। अब दलीप सिंह मजीठिया के परिजनों ने चौरीचौरी तहसील प्रशासन से इस गड़बड़ी को तत्काल ठीक कर उनकी जमीन कुर्क संपत्ति की सूची से बाहर करने की मांग की है।
साल 1982 में न्यायालय के आदेश के अनुपालन में तहसील के अभिलेखों को दुरुस्त किया गया, मगर करीब एक दशक पूर्व जब सरैया चीनी मिल पर किसानों के बकाया गन्ना मूल्य के मामले में चीनी मिल की संपत्तियों को कुर्क किया गया तो तत्कालीन अधिकारियों-कर्मचारियों ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया। यह भी नहीं देखा कि उक्त आराजी नंबरों की खतौनी में भी दलीप सिंह मजीठिया का नाम दर्ज है। अब दलीप सिंह मजीठिया के परिजनों ने चौरीचौरी तहसील प्रशासन से इस गड़बड़ी को तत्काल ठीक कर उनकी जमीन कुर्क संपत्ति की सूची से बाहर करने की मांग की है।
पिछले साल वायुयोद्धा स्क्वाड्रन लीडर दलीप सिंह मजीठिया के जम्नदिन के यादगार लम्हे को एयरफोर्स ने इस तरह किया था ट्वीट।
- फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर के औद्योगिक विकास में निभा चुके हैं अहम भूमिका
जुलाई 2020 में अपने जीवन का एक शतक पूरा कर चुके स्क्वाड्रन लीडर दलीप सिंह मजीठिया गोरखपुर के औद्योगिक विकास में भी पांच दशक तक अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। वह एशिया में ख्याति प्राप्त रही सरैया चीनी मिल के चेयरमैन भी रहे हैं।
नेपाल की धरती पर पहली बार विमान लैंडिंग का भी रिकॉर्ड है उनके नाम
दलीप सिंह मजीठिया को एक अगस्त 1940 को भारतीय वायुसेना में कमीशन मिला, तब दूसरा विश्वयुद्ध चल रहा था। 1945 में वह भारतीय स्क्वाड्रन में लड़ाकू, बमवर्षक विमानों के साथ बर्मा के मोर्चे पर डटे थे। नेपाल की धरती पर पहली बार विमान लैंडिंग का रिकॉर्ड भी स्क्वाड्रन लीटर दलीप सिंह मजीठिया के ही नाम है। 23 अप्रैल 1949 को काठमांडू के परेड मैदान में बतौर पायलट वह अपने निजी विमान से उतरे थे। उस समय इनके चाचा सुरजीत सिंह मजीठिया नेपाल में भारत के उच्चायुक्त थे, जो बाद में भारत के रक्षा उपमंत्री रहे।
जुलाई 2020 में अपने जीवन का एक शतक पूरा कर चुके स्क्वाड्रन लीडर दलीप सिंह मजीठिया गोरखपुर के औद्योगिक विकास में भी पांच दशक तक अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। वह एशिया में ख्याति प्राप्त रही सरैया चीनी मिल के चेयरमैन भी रहे हैं।
नेपाल की धरती पर पहली बार विमान लैंडिंग का भी रिकॉर्ड है उनके नाम
दलीप सिंह मजीठिया को एक अगस्त 1940 को भारतीय वायुसेना में कमीशन मिला, तब दूसरा विश्वयुद्ध चल रहा था। 1945 में वह भारतीय स्क्वाड्रन में लड़ाकू, बमवर्षक विमानों के साथ बर्मा के मोर्चे पर डटे थे। नेपाल की धरती पर पहली बार विमान लैंडिंग का रिकॉर्ड भी स्क्वाड्रन लीटर दलीप सिंह मजीठिया के ही नाम है। 23 अप्रैल 1949 को काठमांडू के परेड मैदान में बतौर पायलट वह अपने निजी विमान से उतरे थे। उस समय इनके चाचा सुरजीत सिंह मजीठिया नेपाल में भारत के उच्चायुक्त थे, जो बाद में भारत के रक्षा उपमंत्री रहे।
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पत्नी जॉन सैंडर्स के साथ दलीप सिंह मजीठिया।
- फोटो : अमर उजाला।
वायुसेना छोड़ा पर उड़ान का जुनून बरकरार रहा
बड़े पारिवारिक दायित्वों की वजह से कुछ वर्ष बाद ही दलीप सिंह को वायुसेना से अवकाश लेना पड़ा, मगर हवाई उड़ान का उनका जुनून बाद में भी जारी रहा। उन्होंने अमेरिका से विमान खरीदा था। इसके लिए उन्होंने सरदारनगर में रनवे भी बनवाया था। मजीठिया निजी विमान से ही गोरखपुर से दिल्ली आते-जाते थे। उन्होंने आखिरी बार 16 जनवरी 1979 को उड़ान भरी थी। साल 1946 में ऑस्ट्रेलिया में तैनाती के दौरान ही दलीप सिंह को ऑस्ट्रेलिया की जॉन सैंडर्स से प्रेम हुआ और 1947 में गोरखपुर में ही एक पारिवारिक आयोजन में उनकी शादी हुई। वायुसेना से अवकाश के बाद वह गोरखपुर आ गए और सरदारनगर स्थित अपने परिवार की सरैया सुगर मिल के प्रबंधन का कार्य देखने लगे। दलीप सिंह लंबे समय तक चीनी मिल के चेयरमैन रहे। उस दौरान सरैया स्टील कंपनी व रोलिंग मिल सहित कई उद्योग इससे जुड़े रहे।
बड़े पारिवारिक दायित्वों की वजह से कुछ वर्ष बाद ही दलीप सिंह को वायुसेना से अवकाश लेना पड़ा, मगर हवाई उड़ान का उनका जुनून बाद में भी जारी रहा। उन्होंने अमेरिका से विमान खरीदा था। इसके लिए उन्होंने सरदारनगर में रनवे भी बनवाया था। मजीठिया निजी विमान से ही गोरखपुर से दिल्ली आते-जाते थे। उन्होंने आखिरी बार 16 जनवरी 1979 को उड़ान भरी थी। साल 1946 में ऑस्ट्रेलिया में तैनाती के दौरान ही दलीप सिंह को ऑस्ट्रेलिया की जॉन सैंडर्स से प्रेम हुआ और 1947 में गोरखपुर में ही एक पारिवारिक आयोजन में उनकी शादी हुई। वायुसेना से अवकाश के बाद वह गोरखपुर आ गए और सरदारनगर स्थित अपने परिवार की सरैया सुगर मिल के प्रबंधन का कार्य देखने लगे। दलीप सिंह लंबे समय तक चीनी मिल के चेयरमैन रहे। उस दौरान सरैया स्टील कंपनी व रोलिंग मिल सहित कई उद्योग इससे जुड़े रहे।
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