मुंबई से एक सनसनीखेज मामला सामने आ रहा है। यहां महाराष्ट्र पुलिस ने बड़ी साजिश को नाकाम किया है। पुलिस ने मोहर्रम जुलूस के दौरान एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर उससे 14,900 से अधिक जहरीले कैप्सूल जब्त किया है। पूछताछ में पता चला कि वह बिना किसी अनुमति के कैप्सूल बांट रहा था।
Mumbai: जहरीले कैप्सूल के साथ आरोपी गिरफ्तार, क्या है जिंक फॉस्फाइड जो मिनटों में बन सकता है मौत का कारण?
मुंबई पुलिस ने शनिवार को मुहर्रम के जुलूस के दौरान जिंक फॉस्फाइड (चूहे मारने का जहर) मिली हुई कैप्सूल बांटने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। जिंक फॉस्फाइड विषाक्तता का कोई एंटीडोट उपलब्ध नहीं है। जरा-सी लापरवाही या अस्पताल पहुंचने में देरी जानलेवा साबित हो सकती है।
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चूहों को मारने के लिए इस्तेमाल होता है जिंक फॉस्फाइड
पुलिस उपायुक्त जयंत मीना ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि शुक्रवार रात एक आदमी बायकुला थाना पुलिस के इलाके में जुलूस कैप्सूल बांटते दिखा। पुलिस की पेट्रोलिंग टीम ने शक होने पर सभी कैप्सूल जब्त कर लिए। पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया- उसका मकसद मोहर्रम के जुलूस को निशाना बनाना था।
जिंक फॉस्फाइड चूहों को मारने वाली एक बहुत जहरीली दवा है। शरीर में जाने पर, यह पेट के एसिड के साथ मिलकर जानलेवा फॉस्फीन गैस बनाती है। यह कोशिकाओं तक ऑक्सीजन पहुंचने में रुकावट डालकर और दिल, फेफड़ों व लिवर जैसे कई अंगों को बुरी तरह नुकसान पहुंचा सकती है।
यहां गौरतलब है कि मई के महीने में मुंबई से खबर सामने आई थी कि तरबूज खाने से एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले की जांच में पाया गया था चारों की मौत का कारण भी जिंक फॉस्फाइड जहर ही था। यह एक बहुत ही तेज चूहा मारने वाला जहर है। फॉरेंसिक रिपोर्ट में पीड़ितों के शरीर के अंगों में इस जहरीले केमिकल के अंश मिले थे।
जहरीले कैप्सूल की इस घटना में एक बार फिर से जिंक फॉस्फाइड की चर्चा हो रही है।
जिंक फॉस्फाइड को इतना खतरनाक क्यों माना जाता है?
जिंक फॉस्फाइड शरीर में पहुंचने के बाद फॉस्फीन गैस बनाती है। यह गैस शरीर की कोशिकाओं के अंदर मौजूद माइटोकॉन्ड्रिया (कोशिकाओं का वह हिस्सा जो ऊर्जा बनाता है) को काम करने से रोक देती है। खास तौर पर यह साइटोक्रोम-सी ऑक्सीडेज नाम के एंजाइम को ब्लॉक कर देती है, जो ऊर्जा बनाने के लिए जरूरी होता है।
इसकी वजह से शरीर की कोशिकाओं में ऑक्सीजन का सही इस्तेमाल नहीं हो पाता। यानी व्यक्ति सांस तो ले रहा होता है, लेकिन शरीर के अंदर की कोशिकाएं ऑक्सीजन के बिना मरने लगती हैं। इसे सेल्युलर एनोक्सिया (कोशिकाओं तक ऑक्सीजन का इस्तेमाल न हो पाना) कहा जाता है।
- इस जहर के शरीर में पहुंचने के बाद मतली, उल्टी, चक्कर आने और बेचैनी जैसे लक्षण हो सकते हैं। कई बार शुरुआत में मरीज सामान्य या ठीक-ठाक महसूस करता है, लेकिन अचानक उसकी हालत तेजी से बिगड़ जाती है और कार्डियक अरेस्ट होने का खतरा बढ़ जाता है।
- जिंक फॉस्फाइड खाने वाले व्यक्ति की उल्टी से भी फॉस्फीन गैस निकलती रह सकती है। इसलिए मरीज की देखभाल करने वाले परिजन, आसपास मौजूद लोग और स्वास्थ्यकर्मी भी इस जहरीली गैस के संपर्क में आ सकते हैं। यही वजह है कि ऐसे मरीजों का इलाज करते समय विशेष सुरक्षा उपाय अपनाए जाते हैं।
जहर को खत्म करने के लिए कोई एंटीडोट नहीं
जिंक फॉस्फाइड के जहर को खत्म कर देने वाली कोई विशेष दवा (एंटीडोट) अभी उपलब्ध नहीं है। इसलिए मरीज की जान बचाने का सबसे बड़ा तरीका है कि उसे जितनी जल्दी हो सके अस्पताल पहुंचाया जाए।जहां डॉक्टर सांस, दिल और अन्य जरूरी अंगों को सपोर्ट देने वाला इलाज कर सकें। इलाज में देरी जानलेवा साबित हो सकती है।
- फॉस्फीन गैस खून के जरिए पूरे शरीर में फैल जाती है और कई अंगों को नुकसान पहुंचाती है। इससे दिल की धड़कन बेहद अनियमित हो सकती है (हार्ट अरेथमिया), ब्लड प्रेशर लो हो सकता है, फेफड़ों में पानी भर सकता है (पल्मोनरी एडीमा), जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा लिवर और किडनी भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं और कई बार स्थायी नुकसान भी हो सकता है।
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स्रोत:
Zinc phosphide poisoning
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