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दुनिया के तमाम देशों में तेजी से बढ़ते कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। सबसे पहले साउथ अफ्रीका में देखे गए इस वैरिएंट में 30 से अधिक म्यूटेशनों के कारण इसे बेहद संक्रामक माना जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी भी बहुत कुछ है जो हम ओमिक्रॉन वैरिएंट के बारे में नहीं जानते हैं, हालांकि यह जरूर माना जा रहा है कि यह कोरोना का अब तक का सबसे संक्रामक वैरिएंट हो सकता है। इसके अलावा जिन लोगों का टीकाकरण नहीं हो सका है यह उनके लिए गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। ऐसे में एक बड़ा सवाल यह भी बना हुआ कि ओमिक्रॉन वैरिएंट, बच्चों को किस तरह से प्रभावित कर सकता है?
दुनियाभर में भले ही कोविड टीकाकरण की रफ्तार काफी तेज है हालांकि बच्चों को अब भी वैक्सीन न मिल पाना बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। इन सबके बीच कोरोना के इस घातक वैरिएंट ने समस्याओं को और बढ़ा दिया है। आइए आगे की स्लाइडों में विशेषज्ञ से जानते हैं कि ओमिक्रॉन वैरिएंट से बच्चों को कितना खतरा है और उन्हें इससे कैसे सुरक्षित किया जा सकता है?
ओमिक्रॉन संकट: विशेषज्ञ से जानिए बच्चों को संक्रमण का कितना खतरा, कैसे रखें उन्हें सुरक्षित?
बच्चों में ओमिक्रॉन का खतरा
अमर उजाला से बातचीत में लखनऊ स्थिति एक अस्पताल में इंटेसिव केयर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ अतुल भारद्वाज बताते हैं, कोरोना के इस नए खतरे के बारे में अभी इतने अध्ययन नहीं हुए हैं जिसके आधार पर आयुवर्ग से संबंधित खतरों के बारे में जाना जा सके। हां चूंकि इसे बेहद संक्रामक बताया जा रहा है ऐसे में जिन लोगों को टीकाकरण नहीं हुआ है उनमें संक्रमण का जोखिम निश्चित ही अधिक हो सकता है। बच्चों में भी संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है क्योंकि उनका अब तक टीकाकरण नहीं हो सका है। इस बात को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के उपायों का पालन करना बहुत आवश्यक है।
बच्चों में संक्रमण के मामले
नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीज के अनुसार बच्चों में ओमिक्रॉन का खतरा लगातार बना हुआ है। दक्षिण अफ्रीका में कोरोना से संक्रमित 2 साल से कम उम्र के बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने का दर करीब 10 फीसदी है। संस्थान में सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ वासीला जसत कहते हैं, आंकड़े बताते हैं कि कोरोना के इस वैरिएंट के शिकार देशों में शुरुआती चरणों की तुलना में इस बार बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने की संख्या अधिक है। डेटन चिल्ड्रन हॉस्पिटल, ओहियो की एक रिपोर्ट में कहा गया है ओमिक्रॉन वैरिएंट बच्चों को अधिक शिकार बना सकता है। हालांकि बच्चों पर इस वैरिएंट के असर को विस्तार से जानने के लिए शोध अभी भी जारी है।
इस बारे में भी जान लीजिए
कोरोना के खतरे को लेकर कुछ विशेषज्ञों का सुझाव है कि बच्चों को कोविड-19 का गंभीर असर नहीं होता है। चूंकि बच्चों को अक्सर सर्दी-जुकाम होता रहता है, इसलिए उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कोविड-19 के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करने में ज्यादा एक्टिव हो सकती है। यह भी संभव है कि बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली वयस्कों की प्रतिरक्षा प्रणाली की तुलना में वायरस का अच्छे से मुकाबला कर सकती है। फिलहाल नए वैरिएंट्स के असर को जानने के लिए विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता है।
अगले महीने तक उपलब्ध हो सकती है बच्चों के लिए वैक्सीन
भारत में 12 साल तक के बच्चों के लिए जाइकोव-डी वैक्सीन को मंजूरी मिल चुकी है। वहीं अमेरिका ने पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए फाइजर को मंजूरी दी है। मीडिया से बातचीत में कोविड टास्क फोर्स के अध्यक्ष डॉ एनके अरोड़ा बताते हैं कि कॉमरेडिटी वाले बच्चों के लिए टीकाकरण दिसंबर में शुरू होगा और उसके बाद स्वस्थ बच्चों के लिए वैक्सीन रोलआउट होगा। फिलहाल कोरोना के खतरे को देखते हुए बच्चों को सुरक्षित रखने के उपाय कराते रहने चाहिए।