बुढ़ापे को जीवन का सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण समय माना जाता है। इस अवस्था में शरीर के ज्यादातर अंग कमजोर हो जाते हैं जिसके कारण कई प्रकार की बीमारियां घेर लेती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यदि 20 से 40 वर्ष की आयु में कुछ नियमों को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिया जाए तो आप बुढ़ापे में भी काफी हद तक चु्स्त और तंदुरुस्त रह सकते हैं। हाल ही में हुए एक शोध के दौरान विशेषज्ञों ने पाया कि नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम के साथ फलों-सब्जियों और अन्य प्रकार के पौष्टिक आहारों को खान-पान में शामिल करके आप बुढ़ापे में भी मध्यम आयु जैसे बने रह सकते हैं। आइए जानते हैं कि आखिर इस तरह का खान-पान और जीवनशैली हमारे स्वास्थ्य को किस तरह से प्रभावित करता है?
2 of 5
वृद्ध नागरिक
- फोटो : PTI
फ्रैमिंघम हार्ट स्टडी के डेटा के आधार पर किए गए इस शोध को जर्नल ऑफ अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में प्रकाशित किया गया। इस रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने बताया कि कार्डियोमेटाबॉलिक स्वास्थ्य जोखिम कारकों में मेटाबॉलिक सिंड्रोम, कमर के आसपास अतिरिक्त वसा का जमा होना, इंसुलिन प्रतिरोध और उच्च रक्तचाप शामिल है। मेटाबॉलिक सिंड्रोम के कारण हृदय रोग, स्ट्रोक और टाइप-2 डायबिटीज जैसे रोगों के विकसित होने का खतरा रहता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर खान-पान के साथ नियमित व्यायाम और जीवनशैली में सुधार कर लिया जाए तो भविष्य में होने वाली इस प्रकार की समस्याओं से खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है। अध्ययन के दौरान विशेषज्ञों ने 18 और उससे अधिक उम्र वाले 2,379 वयस्कों की डेटा की जांच की। जिसके आधार पर उन्होंने पाया कि वयस्कावस्था में खान-पान और नियमित रूप से व्यायाम आदि को पालन में लाकर बुढ़ापे को स्वस्थ बनाने की कोशिश की जा सकती है।
शारीरिक गतिविधियों से संबंधित दिशानिर्देश में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि एक वयस्क को सप्ताह कम से कम 150 मिनट की मध्यम या 75 मिनट की उच्चस्तरीय व्यायाम क्रियाओं को प्रयोग में लाना चाहिए। इसके लिए वॉक करना या तैरकी जैसी शारीरिक क्रियाओं को किया जा सकता है।
जनवरी 2021 में अपडेट किए गए आहार दिशानिर्देशों के अनुसार वयस्क को पौष्टिक भोजन के पैटर्न का पालन करने का साथ पोषण के लक्ष्य का पालन और आहार सीमा को बनाकर रखना चाहिए। भोजन का पौष्टिक होना न सिर्फ हमें मौजूदा समय में स्वस्थ रखने में सहायक है, साथ ही इसका असर आपको बुढ़ापे में भी देखने को मिल सकता है।