क्या आप जानते हैं कि जब हम खुश होते हैं तो हमारे ब्रेन में क्या चल रहा है होता है? इसके पीछे तंत्रिकाओं और हार्मोन्स की बड़ी भूमिका होती है। आपने भी सुना होगा कि हमें खुश महसूस कराने में डोपामाइन हार्मोन जरूरी होता है।
Happy Hormones: दिमाग का हैप्पी स्विच है डोपामाइन, जानिए इसे बढ़ाने के आसान तरीके
डोपामाइन को अक्सर फील-गुड या हैप्पी हार्मोन कहा जाता है, हालांकि वैज्ञानिक रूप से यह एक न्यूरोट्रांसमीटर है। दिमाग की कोशिकाओं के बीच संदेश पहुंचाता है। यह सिर्फ खुशी महसूस कराने तक सीमित नहीं है।
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कहीं आपमें डोपामाइन की कमी तो नहीं?
क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ दिनों में बिना किसी खास वजह के काम करने का मन क्यों नहीं करता? सुबह उठने में आलस महसूस होती है, छोटी-छोटी चीजें भी बोझ लगने लगी हैं और पहले जिन चीजों से खुशी मिलती थी वे भी अब फीकी लगने लगती हैं।
कई लोग इसे सिर्फ तनाव, थकान या खराब मूड समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसके पीछे भी डोपाइमन की भूमिका मानी जाती है। डोपामाइन का स्तर कम होने से इस तरह की दिक्कतें बढ़ जाती हैं।
क्या बढ़ रही है लो डोपामाइन की समस्या?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लगातार मोबाइल-लैपटॉप पर काम करते रहना, सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल, जंक फूड, नींद की कमी और लगातार तनाव जैसी स्थितियां दिमाग के डोपामाइन सिस्टम को प्रभावित कर सकती है।
अच्छी बात यह है कि डोपामाइन बढ़ाने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों में बदलाव आपके लिए काफी मददगार हो सकते हैं।
- नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, धूप में समय बिताने और मेडिटेशन को इसमें बड़ा फायदेमंद पाया गया है।
- डोपामाइन बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ अमीनो एसिड एल-टायरोसिन और मैग्नीशियम प्रदान करते हैं, जिनकी आपके शरीर को फील-गुड न्यूरोट्रांसमीटर को प्राकृतिक रूप से बनाने के लिए आवश्यकता होती है। यानी डोपामाइन सीधे भोजन से नहीं मिलता, लेकिन शरीर इसे टायरोसीन नामक अमीनो एसिड से बनाता है।
- टायरोसीन से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे अंडा, दूध, दही, पनीर, सोयाबीन, कद्दू के बीज आपके लिए फायदेमंद हो सकते हैं।
अच्छी नींद और धूप में समय बिताएं
नींद के दौरान दिमाग खुद को रिपेयर करता है और न्यूरोट्रांसमीटर सिस्टम को संतुलित रखता है। यदि लगातार आपकी नींद पूरी नहीं होती तो डोपामाइन रिसेप्टर्स की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। इसका असर अगले दिन फोकस, मूड और निर्णय लेने की क्षमता पर दिखाई देता है। इसलिए अच्छी नींद जरूरी है।
इसी तरह सुबह की हल्की धूप में समय बिताएं। प्राकृतिक वातावरण में समय बिताने से तनाव वाले हार्मोन कम हो सकते हैं, जिससे व्यक्ति अधिक शांत और ऊर्जावान महसूस करता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।