गर्मी और बरसात के दिनों में पेट में गड़बड़ी, उल्टी-दस्त जैसे लक्षणों वाली समस्या काफी बढ़ जाती है। कई बार तो इसके कारण अस्पताल में भी भर्ती होना पड़ सकता है। डॉक्टर कहते हैं, पाचन संबंधित इस तरह की समस्याओं का एक बड़ा कारण फूड पॉइजनिंग हो सकता है।
Food Poisoning: क्या घर का खाना खाने से भी हो सकती है फूड पॉइजनिंग? जानिए कैसे करें पहचान
फूड पॉइजनिंग वह स्थिति है जब व्यक्ति ऐसा भोजन या पानी खा-पी लेता है जिसमें बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी या उनके द्वारा बनाए गए विषैले पदार्थ मौजूद हों। क्या घर पर तैयार भोजन से भी फूड पॉइजनिंग हो सकता है?
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गर्मियों में फूड इंफेक्शन का खतरा
फूड पॉइजनिंग के अधिकांश मामलों में उल्टी-दस्त, पेट दर्द और बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। हालांकि कई बार यह समस्या इतनी गंभीर हो सकती है कि मरीज को अस्पताल में भर्ती तक कराना पड़ जाए।
- बरसात और गर्मी के मौसम में यह समस्या और भी बढ़ जाती है क्योंकि गर्म और नम वातावरण में बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं।
- यही वजह है कि इन दिनों खाने-पीने की चीजों को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है।
- कई लोग बचा हुआ खाना बार-बार गर्म करके खा लेते हैं, लेकिन यदि उसे सही तरीके से स्टोर नहीं किया गया हो तो यह भी संक्रमण का कारण बन सकता है।
फूड पॉइजनिंग क्या है और क्यों होती है?
जब आप ऐसा भोजन खा लेते हैं जिसमें बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी से दूषित हों तो इसके कारण फूड इंफेक्शन होने का जोखिम बढ़ जाता है। आमतौर पर साल्मोनेला, ई. कोलाई, कैम्पिलोबैक्टर, लिस्टेरिया और नोरोवायरस जैसे रोगाणु इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। दूषित भोजन खाने के कुछ घंटों से लेकर कई दिनों के भीतर लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
- साल्मोनेला: कच्चे या अधपके मांस या अंडे में पाया जाता है।
- ई. कोलाई: दूषित पानी और अधपके मीट में खाने से इसका संक्रमण होता है।
- कैम्पिलोबैक्टर: दूषित पानी और कच्चे पोल्ट्री के मांस में ये पाया जाता है।
- लिस्टेरिया: यह बैक्टीरिया बिना पाश्चुरीकृत दूध और पनीर में पनपनता है।
घर का खाना खाने से भी फूड पॉइजनिंग हो सकती है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, फूड इंफेक्शन से बचने के लिए सभी लोगों को घर का खाना खाने की सलाह दी जाती है। हालांकि ये तभी सुरक्षित होता है जब उसे स्वच्छ तरीके से बनाया और रखा जाए।
- यदि कच्चे मांस और पकी हुई सब्जियों के लिए एक चाकू का इस्तेमाल किया जाए, हाथ अच्छी तरह न धोए हों, भोजन को लंबे समय तक कमरे के तापमान पर छोड़ दिया जाए तो घर का भोजन भी दूषित हो सकता है।
- बचा हुआ खाना कई घंटे बाहर रखने के बाद दोबारा गर्म करके खाने से भी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
कैसे जानें आपको फूड पॉइजनिंग तो नहीं हो गई?
फूड पॉइजनिंग में मतली, उल्टी, बार-बार दस्त, पेट में मरोड़, पेट दर्द, बुखार, कमजोरी और डिहाइड्रेशन जैसी दिक्कतें होती हैं।
- कुछ लोगों में सिरदर्द और शरीर दर्द भी हो सकता है।
- गंभीर मामलों में मल में खून, लगातार उल्टी, तेज बुखार जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
- छोटे बच्चों और बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन का खतरा ज्यादा होता है। यदि दस्त या उल्टी लगातार बनी रहे या डिहाइड्रेशन के संकेत दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
फूड पॉइजनिंग होने शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी न होने देना सबसे जरूरी है। खूब पानी पीते रहें, ओआरएस से गंभीरता को कम किया जा सकता है। मरीजों को हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन खाना चाहिए। फूड पॉइजनिंग के लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।