Symptoms of Thyroid in Women: थायराइड एक छोटी सी तितली के आकार की ग्रंथि है जो हमारी गर्दन के निचले हिस्से में स्थित होती है। हालांकि यह ग्रंथि छोटी है, लेकिन यह शरीर के मेटाबॉलिज्म, एनर्जी लेवल और हृदय गति को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आंकड़े बताते हैं कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को थायराइड विकार होने की आशंका कई गुना अधिक होती है।
Thyroid: थायराइड की समस्या महिलाओं में क्यों अधिक देखने को मिलती है? जान लें इसके पीछे का मूल कारण
Risks of Thyroid in Pregnancy: अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि महिलाएं थायराइड से अधिक परेशान रहती हैं। ऐसा होने के पीछे कई कारण हैं, आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
महिलाओं की प्रतिरक्षा प्रणाली
महिलाओं में थायराइड का सबसे बड़ा कारण 'ऑटोइम्यून' विकार हैं, जैसे हाशिमोटो रोग। महिलाओं की प्रतिरक्षा प्रणाली पुरुषों की तुलना में अधिक सक्रिय होती है, जिसके कारण कभी-कभी शरीर की रक्षा करने वाली कोशिकाएं गलती से अपनी ही थायराइड ग्रंथि पर हमला कर देती हैं। इससे ग्रंथि में सूजन आ जाती है और वह सही मात्रा में हार्मोन नहीं बना पाती। यही कारण है कि महिलाओं में 'हाइपोथायरायडिज्म' के मामले सबसे ज्यादा देखे जाते हैं।
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गर्भावस्था और प्रसव के बाद के शारीरिक बदलाव
गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में 'एचसीजी' और एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर काफी बढ़ जाता है, जो थायराइड को उत्तेजित करते हैं। कई महिलाओं को प्रसव के बाद 'पोस्टपार्टम थायरायडिटिस' की समस्या हो जाती है, जिसमें प्रसव के पहले साल के भीतर थायराइड ग्रंथि में सूजन आ जाती है। अगर इसे समय पर नहीं पहचाना गया, तो यह स्थाई रूप से थायराइड की बीमारी बन सकती है, जिससे मां और शिशु दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
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पोषक तत्वों की कमी
आजकल की व्यस्त जीवनशैली अत्यधिक तनाव और खान-पान में आयोडीन, सेलेनियम व आयरन की कमी महिलाओं में थायराइड के जोखिम को बढ़ा देती है। तनाव शरीर में 'कोर्टिसोल' हार्मोन को बढ़ाता है, जो थायराइड हार्मोन के उत्पादन में बाधा डालता है। इसके अलावा प्लास्टिक के बर्तनों का अधिक उपयोग और पर्यावरण में मौजूद टॉक्सिन्स भी स्रावी तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं, जिसका सीधा असर थायराइड पर पड़ता है।
थायराइड एक ऐसी समस्या है जिसे सही खान-पान, व्यायाम और समय पर ली गई दवाइयों से पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। महिलाओं को चाहिए कि वे 30 की उम्र के बाद नियमित रूप से अपना 'टी.एस.एच' टेस्ट करवाते रहें। अगर आपको लगातार थकान, कब्ज या मूड स्विंग्स महसूस हों, तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर न टालें, तुरंत डॉक्टर से मिलकर परामर्श लें।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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