Mathura- Varanasi Me Holi Kab Hai: एक ओर गलियों में उड़ता गुलाल, कहीं लट्ठ और फूलों की मार... तो वहीं दूसरी ओर गंगा के शांत घाटों पर अघोरीसाधु-संतों के बीच चिता-भस्म को होली का दृश्य, सोचिए दोनों का ही नजारा कितना अलौकिक होगा। कृष्ण की बाललीलाओं से लेकर शिव की भक्ति में लीन होने तक होली सच में कितने ही रंगों से रंगी होती है।
Mathura Vs Varanasi Holi 2026: लठमार से लेकर घाटों की भस्म तक, मथुरा और काशी में होली कब है?
Mathura vs Varanasi Holi: रंगों की होली देखनी हो या भस्म की होली, दोनों ही रंग उत्तर प्रदेश में देखने को मिलते हैं। एक ओर कान्हा की भक्ति में लोग झूमते हैं तो दूसरी ओर शिव की भक्ति में लीन हो जाते हैं। आइए जानते हैं मथुरा और वाराणसी की होली की खासियत, परंपरा और यात्रा विवरण।
इस साल होलिका दहन 3 मार्च 2026, मंगलवार को होना है। कुछ स्थानों पर चंद्र ग्रहण के कारण 2 मार्च को भी होलिका दहन किया जाएगा।
वहीं रंगों की होली यानी धुलेंडी 4 मार्च 2026, बुधवार को खेली जाएगी।
मथुरा और काशी में मुख्य उत्सव इन्हीं तिथियों के आसपास मनाया जाएगा, लेकिन मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में होली लगभग एक सप्ताह पहले से शुरू हो जाती है।
ब्रज होली 2026 के प्रमुख कार्यक्रमों का शेड्यूल
- 25 फरवरी: बरसाना में लड्डू मार होली
- 26 फरवरी: बरसाना में लट्ठमार होली
- 27 फरवरी: नंदगांव में लट्ठमार होली
- 28 फरवरी: वृंदावन में फूलों की होली उत्सव
- 01 मार्च: गोकुल में छड़ी मार होली
- 02 मार्च: गोकुल में होली उत्सव
- 03 मार्च: होलिका दहन
- 04 मार्च: होली का पर्व
- 05 मार्च: दाऊजी मंदिर में हुरंगा होली उत्सव
वाराणसी होली 2026 के प्रमुख कार्यक्रमों का शेड्यूल
- 27 फरवरी: रंगभरी एकादशी
- 01 मार्च: मसान होली
- 03 मार्च: होलिका दहन
- 04 मार्च: रंगभरी/ धुलेंडी
मथुरा भगवान कृष्ण की जन्मस्थली है और बृज क्षेत्र राधा कृष्ण की नगरी, जहां होली के मौके पर रंगों का महासागर देखने को मिलता है। यहां होली धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ी है। यहां का मुख्य आकर्षण है,
- बरसाने की लठमार होली
- नंदगांव की होली
- बांके बिहारी मंदिर की फूलों की होली
- द्वारिकाधीश मंदिर उत्सव
मथुरा होली ट्रैवल पैकेज
होली पर मथुरा जाना चाहते हैं तो तीन दिन औऱ दो रातों के सफर की योजना बनाएं।
- पहला दिन- मथुरा पहुंचें। फिर श्रीकृष्ण जन्मभूमि में दर्शन करें। शाम को विश्राम घाट में होने वाली आरती में शामिल हों।
- दूसरा दिन- बरसाना और नंदगांव की लठमार होली में शामिल हो। यहां महिलाएं पुरुषों को प्रतिकात्मक रूप से लठ से मारती हैं और पुरुष ढाल से स्वयं की रक्षा करते हैं। यहां के मंदिरों में भी जा सकते हैं।
- तीसरा दिन- अगले दिन वृंदावन, बांके बिहारी मंदिर, प्रेम मंदिर और स्थानीय बाजारों की सैर करें।
प्रति व्यक्ति अनुमानित खर्च
होली के मौके पर मथुरा की यात्रा करना चाहते हैं तो अनुमानत: लगभग 6000 से 10000 रुपये खर्च आ सकता है। इसमें परिवहन खर्च, होटल में ठहरने, स्थानीय परिवहन, खान-पान को मिलाकर होने वाला खर्च शामिल है।
- दिल्ली से ट्रेन या बस का किराया लगभग 800 से 1500 रुपये तक लग सकता है।
- मथुरा-वृंदावन में इस दौरान होटल के दाम बढ़ जाते हैं तो लगभग 3000 से 6000 रुपये खर्च पर कमरा मिल जाएगा।
- स्थानीय परिवहन और खानपान में 1000-1500 रुपये तक व्यय हो सकता है।
वाराणसी की होली
शिव की नगरी में भांग और रंग का जो संगम देखने को मिलता है, वो सच में बहुत भव्य होता है। काशी की होली आध्यात्मिक और मस्ती का अनोखा संगम है। यहां होली पर भांग, ढोल-नगाड़े और गंगा घाटों पर रंगों की धूम देखने को मिलती है। वाराणसी की होली का मुख्य आकर्षण होता है,
- गंगा घाटों की होली
दशाश्वमेध घाट और अस्सी घाट पर सुबह से रंगों का उत्सव शुरू हो जाता है।
- भांग और संगीत
काशी में पारंपरिक भांग और लोक संगीत के साथ होली का अलग ही रंग होता है।
- शिव मंदिरों में उत्सव
काशी विश्वनाथ मंदिर में विशेष पूजा और रंगारंग कार्यक्रम होते हैं।