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तेजस की बोगियों में नहीं थम रहीं शिकायतें, अब ऑटोमेटिक डोर जाम, खोलने के लिए करनी पड़ी काफी मशक्कत
Fri, 08 Nov 2019 04:42 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 08 Nov 2019 04:42 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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देश की पहली कॉर्पोरेट ट्रेन तेजस एक्सप्रेस की बोगियां यात्रियों के लिए मुसीबत बनती जा रही हैं। गुरुवार को लखनऊ जंक्शन पर तेजस एक्सप्रेस की सी-6 बोगी का ऑटोमेटिक डोर जाम हो गया। काफी मशक्कत के बाद जब दरवाजा नहीं खुला तो यात्री परेशान हो गए। मेकेनिकल स्टाफ के आने पर इसे ठीक करवाया गया। इसके बाद ट्रेन रवाना हो सकी। दरअसल, गत चार अक्तूबर को तेजस एक्सप्रेस का शुभारंभ लखनऊ जंक्शन से नई दिल्ली के बीच शुरू हुआ था।
तेजस एक्सप्रेस
- फोटो : amar ujala
आईआरसीटीसी अधिकारियों का दावा था कि ट्रेन अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। ऑटोमेटिक डोर से लेकर सेंसरयुक्त पानी की टोटियां व डस्टबिन तक लगाए गए हैं। अब यही सुविधाएं यात्रियों के लिए मुसीबत बनती जा रही हैं। सेंसरयुक्त पानी की टोटियों पर छाया पड़ते ही पानी बहने की समस्या हाल ही में ठीक कराई गई है। वहीं बोगी के शीशों की फिटिंग को लेकर भी शिकायतें सामने आ रही हैं।
तेजस एक्सप्रेस
ऐसे ही डोरमेट को लेकर भी शिकायतें थीं, जिन्हें दूर किया गया है। कुर्सियां भी जर्जर निकल रही हैं। हाल ही में एग्जीक्यूटिव क्लास की पांच कुर्सियों को बदलवाया गया है। इतना ही नहीं ट्रायल के दौरान भी बोगियों से आवाजें आ रही थीं, जिन्हें दूर करने के ठोस प्रयास नहीं किए गए हैं। गुरुवार को गाड़ी संख्या 82501 लखनऊ जंक्शन नई दिल्ली तेजस एक्सप्रेस की सी-6 बोगी का एक आटोमेटिक डोर जाम हो गया।
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तेजस एक्सप्रेस (फाइल फोटो)
इससे यात्री बोगी में नहीं जा सके और काफी देर बात भी जब गेट नहीं खुला तो मेंटेनेंस स्टाफ को बुलाना पड़ा। इसके बाद यह ठीक हुआ। बता दें कि डोर सेंसरयुक्त है, जिसमें दिक्कतें पैदा हो रही हैं। इतना ही नहीं मेंटेनेंस के लिए जब तेजस ऐशबाग स्थित डिपो में जाती है तो रेलकर्मियों से लेकर अधिकारियों तक को खासी माथापच्ची करनी पड़ती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
‘घटिया’ रैक पर करोड़ों खर्च
डीआरयूसीसी सदस्य एसएस उप्पल ने बताया कि तेजस का रैक रेल कोच फैक्टरी में बनाया गया है। इस पर रेलवे ने 50 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किया है। लेकिन ट्रेन में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किए जाने से दिक्कतें हो रही हैं। हादसा होने पर यही भ्रष्टाचार यात्रियों को महंगा पड़ जाता है।