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राम मंदिर दान में डाका: 'जैसे निर्देश, वैसा ही करते थे', इसलिए ट्रस्ट पदाधिकारियों के आगे नतमस्तक थे बैंक अफसर
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Sharukh Khan
Updated Sat, 20 Jun 2026 08:59 AM IST
सार
राम मंदिर के चढ़ावे में हुए घोटाले की जांच जारी है। जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। बैंक अधिकारी ट्रस्ट पदाधिकारियों के आगे नतमस्तक रहते थे। बैंक कर्मियों की गणना प्रक्रिया में अहम भूमिका थी। घोटाले की जांच में मिले लापरवाही के साक्ष्य मिले हैं। गिनती प्रक्रिया की निर्धारित गाइडलाइन में से केवल 10 प्रतिशत का ही पालन किया गया था।
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ram mandir
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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राम मंदिर की दान राशि हेरफेर के मामले में बैंक कर्मियों की भूमिका भी बेहद गंभीर मानी जा रही है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने भी अपने एक साक्षात्कार में इसको लेकर सवाल उठाए थे। एसआईटी को बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही और संभावित मिलीभगत के कुछ साक्ष्य मिले हैं।
हालांकि हकीकत यह भी है कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों और कर्मचारियों के सामने बैंक कर्मी नतमस्तक रहते थे। उन्हें वहां से जैसे निर्देश मिलते थे, वे वैसा ही करते थे, क्योंकि ट्रस्ट के पदाधिकारियों की पहुंच और प्रभाव का सभी को अंदाजा था।
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राम मंदिर में प्रवेश करती एसआईटी की टीम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दरअसल, गिनती प्रक्रिया में जितनी भूमिका ट्रस्ट के पदाधिकारियों और कर्मचारियों की होती है, उतनी ही संबंधित बैंक के कर्मियों की भी रहती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि गिनती के दौरान किसी को गड़बड़ी न हो। मगर ऐसा नहीं हुआ। बैंकतर जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी आंखें मूंदे रहे।
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अयोध्या पहुंची एसआईटी।
- फोटो : amar ujala
बैंक अधिकारी रहे खामोश
सूत्रों ने बताया कि बैंक ने यह काम एक निजी कंपनी को सौंप रखा था। कंपनी आउटसोर्सिंग के जरिये कर्मचारियों की भर्ती कर उन्हें गणना प्रक्रिया में लगाती थी। चूंकि ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने ही अपने सगे-संबंधियों, परिचितों और उनके करीबियों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से भर्ती कराया था, इसलिए बैंक अधिकारी भी खामोश रहे। एक तरह से ट्रस्टी और उनके कर्मचारी जो चाहते थे, वही होता था।
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राम मंदिर चंदा चोरी।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
45 दिन का ही सीसीटीवी बैकअप
राम मंदिर दान की राशि चोरी करने के मामले में एसआईटी को सुबूत जुटाना बेहद चुनौतीपूर्ण है। सबसे अहम सुबूत सीसीटीवी फुटेज हैं, लेकिन उसमें छेड़छाड़ के सुबूत पहले ही मिल चुके हैं। वहीं सबसे अहम बात यह है कि वहां लगे कैमरों का बैकअप 45 दिनों का ही है। ऐसे में कई वर्षों की फुटेज जुटाना संभव नहीं है। हालांकि एसआईटी मामले की फोरेंसिक जांच कराएगी, जिससे प्रयास होगा कि अधिक से अधिक दिनों की फुटेज रिकवर हो जाए। यही वजह है कि पूछताछ में आए तथ्य मामले में बेहद अहम होने वाले हैं।
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नृपेंद्र मिश्रा।
- फोटो : amar ujala
नृपेंद्र मिश्रा ने टीवी इंटरव्यू में बताया है कि कर्मचारी रुपयों की गड्डियां रखकर गए। इसके सुबूत मिले हैं। वहीं यह भी बताया कि कैमरों का बैकअप डेढ़ महीने का है। ऐसे में पुराने फुटेज जुटा पाना मुश्किल होगा। इसलिए स्पष्ट रूप से पता कर पाना कि चोरी कब से हो रही थी, इसका सटीक समय मिलना इतना आसान नहीं होगा। सूत्रों के मुताबिक, इस वजह से एसआईटी संदिग्ध कर्मचारियों और पदाधिकारियों के बयान दर्ज कर रही है। जो पांच संदिग्ध पहले पकड़े गए थे, उनसे भी जानकारी ली जा रही है। उन्होंने लंबे समय से हेरफेर करने की बात स्वीकार की है।
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