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अखिलेश-मायावती की पहली सीधी मुलाकात, इन मुद्दों पर हुई चर्चा
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बधाई के आदान-प्रदान के बाद चाय पर राजनीतिक चर्चा शुरू होती है। करीब 45 मिनट तक कई मुद्दों पर बातचीत होती है। इनमें उपचुनाव के नतीजे और राज्यसभा के 23 मार्च को प्रस्तावित चुनाव मुख्य हैं। अखिलेश उन्हें बताते हैं कि किस तरह दोनों संसदीय क्षेत्रों में किसान, मजदूर, पिछड़े, दलितों, नौजवानों ने एकजुट होकर मतदान किया। दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल रहा, वोट भी ट्रांसफर हुआ। सामाजिक समीकरण अनुकूल रहा। मायावती ने उन्हें जानकारी दी कि किस तरह बसपा संगठन में ऊपर के निर्देश गांवों तक पहुंच जाते हैं। कोऑर्डिनेटरों ने उनके निर्देशों की जानकारी कार्यकर्ताओं को दी और बात मतदाताओं तक पहुंची।
राज्यसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा
मायावती व अखिलेश ने राज्यसभा चुनाव की रणनीति को लेकर चर्चा की। माया ने आशंका जताई कि भाजपा चुनाव में धनबल का सहारा ले सकती है। इसीलिए उसने नौवां प्रत्याशी उतारा है। उन्होंने बसपा प्रत्याशी भीमराव अंबेडकर के लिए वोटों के समीकरण पर बातचीत की। अखिलेश ने उन्हें आश्वस्त किया कि राज्यसभा चुनाव में भी विपक्षी एकता कायम रहेगी और दोनों दलों के प्रत्याशी जीतेंगे। उपचुनाव में जीत से दोनों दलों के विधायक उत्साहित हैं।
बुना गठबंधन का ताना-बाना
अखिलेश व मायावती के बीच हुई मुलाकात को भविष्य में गठबंधन का ताना-बाना बुनने की शुरुआत माना जा रहा है। उपचुनाव में सहयोग व समर्थन के लिए धन्यवाद के बहाने ही सही, अखिलेश यादव ने बसपा सुप्रीमो के साथ रिश्तों में जमी बर्फ को पिघलाने की पहल की है। इसलिए उनकी मायावती के साथ हुई मुलाकात को अहम माना जा रहा है। इसके सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि दोनों दल भविष्य में और निकट आ सकते हैं।
पहली बार अखिलेश की सीधी मुलाकात
अखिलेश यादव पहली बार मायावती के माल एवेन्यू स्थित आवास पर गए और पहली ही बार इनकी वन-टू-वन बातचीत हुई। सपा और बसपा के वरिष्ठ नेताओं के बीच 23 साल बाद इस तरह की बातचीत हुई है। चुनाव में एक-दूसरे का सहयोग 25 साल बाद किया है। 1993 में सपा-बसपा गठबंधन करके विधानसभा चुनाव लड़े थे।1995 में गेस्ट हाउस कांड के बाद से दोनों दलों के नेताओं, खासतौर से मायावती और मुलायम सिंह यादव के बीच कड़वाहट बढ़ गई थी।