यादें: ‘मेरी मिल्कियत नहीं बाबरी जो मेरे बाद मेरा बेटा करेगा पैरवी’
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नेताओं के रवैये से बेहद नाराज मुद्दई हाशिम अंसारी ने कहा था, बाबरी मस्जिद कोई मेरी मिल्कियत नहीं है, जो मेरे बाद मेरा बेटा इस मुकदमे की पैरवी करे। हालांकि इस इंटरव्यू के बाद अगले साल उन्होंने ये भी कहा, हमारे जाने के बाद मुकदमे की पैरोकारी हमारा लड़का इकबाल करेगा लेकिन लाठी-डंडे से और न ही गंदी तकरीर से बल्कि सद्भावना व प्रेम से ही कर सकता है। अंसारी ने कहा, रामलला की दुर्दशा देखी नहीं जाती, उन्हें आजाद देखना चाहता हूं।
उस वक्त 94 साल के हाशिम अंसारी ने नेताओं के रवैये की वजह से बाबरी मस्जिद मुकदमे की पैरवी से हटने का मन बना लिया था। उन्होंने कहा कि छह दिसंबर 1992 को लाखों की भीड़ ने फोर्स के साथ मिलकर हमारी बाबरी मस्जिद को तोड़ दिया। क्या हुआ? रायबरेली में चल रहे मुकदमे में कोई दोषी नहीं मिला।
बाबरी मस्जिद सारे हिंदुस्तान के मुसलमानों की मिल्कियत है। हाशिम और उनके परिवार की नहीं। एक भी मुसलमान हिंदुस्तान में है तो वह बाबरी मस्जिद चाहता है।