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इन पैरामेडिकल स्टूडेंट्स को सलाम, जोखिम उठाने का जज्बा और सेवा भाव में हर किसी से आगे
Mon, 19 Oct 2020 02:26 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 19 Oct 2020 02:26 PM IST
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पैरामेडिकल स्टूडेंट्स
- फोटो : अमर उजाला
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कोरोना के खिलाफ जंग में जब देशभर में लॉकडाउन चल रहा था और जनता घर में बंद थी, पूरा मेडिकल स्टाफ आपातकालीन व्यवस्थाओं में जुटा था, ऐसे दौर में और ज्यादा लोगों की जरूरत को देखते हुए पैरा मेडिकल स्टूडेंट्स से मदद मांगी गई। कहा गया कि जो बिना दबाव सेवा के लिए तैयार हैं आगे आएं।
पैरामेडिकल स्टूडेंट्स
- फोटो : अमर उजाला
इनमें जिन्होंने पहले-पहल हामी भरी उनमें शिवानी वर्मा, विद्या, उत्पल पल्लवी, अपूर्वा, तृप्ति सिंह, आंचल, रंजना यादव, दीपिका, रीमा, सुबिति, जुगनु शामिल हैं।
पैरामेडिकल स्टूडेंट्स
- फोटो : अमर उजाला
डीन फैकल्टी ऑफ पैरा मेडिकल साइंसेज डॉ. विनोद जैन और शिक्षक श्याम मिश्रा कहते हैं कि इन छात्राओं का जोखिम उठाने का जज्बा और सेवा भाव साबित करता है कि ये किसी शक्ति स्वरूपा से कम नहीं।
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शिवानी
- फोटो : अमर उजाला
घरवालों ने कहा, पागल हो क्या, थोड़ा विरोध किया, पर मान गए
डिप्लोमा इन मेडिकल लेबोरेट्री टेक्नीशियन, सेकंड ईयर की स्टूडेंट शिवानी वर्मा कहती हैं कि मार्च में वॉलंटियरी सर्विस की मांग की गई थी। स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि जो स्वेच्छा से आ सकते हैं, वो ही आए। घर वालों की अनुमति जरूरी होगी। हमने घर में बताया तो मम्मी यही बोलीं, कि पागल हो क्या, लेकिन समझाने पर मान गई।
डिप्लोमा इन मेडिकल लेबोरेट्री टेक्नीशियन, सेकंड ईयर की स्टूडेंट शिवानी वर्मा कहती हैं कि मार्च में वॉलंटियरी सर्विस की मांग की गई थी। स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि जो स्वेच्छा से आ सकते हैं, वो ही आए। घर वालों की अनुमति जरूरी होगी। हमने घर में बताया तो मम्मी यही बोलीं, कि पागल हो क्या, लेकिन समझाने पर मान गई।
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अपूर्वा
- फोटो : अमर उजाला
अपूर्वा दीक्षित भी अपनी बैचमेट्स के साथ ड्यूटी पर थीं। ये लोग पैरामेडिकल डायलिसिस टेक्नीशियन में फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट हैं। कहती हैं कि मेरी मां खुद एक कोरोना योद्धा है। वह लखनऊ पुलिस का हिस्सा हैं। मेरे पापा-बाबा भी पीएसी और पुलिस का हिस्सा रहे हैं। यदि वे आज होते तो कोरोना फ्रंटलाइन वॉरियर कहलाते।