दशरथ महल, बड़ा स्थान के ठीक सामने आवाज गूंजती है...महराज जी कंठी-माला ले लो। भीड़ में चल रहे एक संत के कदम रुक जाते हैं। युवक के हाथ से रुद्राक्ष की कंठी लेकर देखते हैं, फिर पूछते हैं कि बेटा क्या नाम है। जवाब मिलता है आतिफ खान। संत कहते हैं धन्य हो, तुमसे कंठी जरूर लेंगे। कंठी खरीदने वाले संत अपना नाम राममिलन दास बताते हैं। बोले- यह राम की पावन भूमि है, सब नर करहिं परस्पर प्रीती, चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती। युवा आतिफ कहता है कि यह दुकान बड़ा स्थान के महंत बिंदुगद्दाचार्य देवेंद्र प्रसादाचार्य जी की है, वे उसको बहुत मानते हैं।
सद्भाव की अयोध्या :मठ व मंदिरों से मिलने वाले रोजगार, चला रहे सैकड़ों अल्पसंख्यकों के परिवार
धीरेंद्र सिंह, अमर उजाला, अयोध्या
Published by: Amulya Rastogi
Updated Sat, 09 Nov 2019 09:38 AM IST
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