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सद्भाव की अयोध्या :मठ व मंदिरों से मिलने वाले रोजगार, चला रहे सैकड़ों अल्पसंख्यकों के परिवार

Sat, 09 Nov 2019 09:38 AM IST
Amulya Rastogi धीरेंद्र सिंह, अमर उजाला, अयोध्या
धीरेंद्र सिंह, अमर उजाला, अयोध्या Published by: Amulya Rastogi Updated Sat, 09 Nov 2019 09:38 AM IST
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minorities get employment from monasteries and temples in ayodhya
कंठी माला देते आतिफ खान व भगवान के चित्र दिखाती आतिया - फोटो : amar ujala

दशरथ महल, बड़ा स्थान के ठीक सामने आवाज गूंजती है...महराज जी कंठी-माला ले लो। भीड़ में चल रहे एक संत के कदम रुक जाते हैं। युवक के हाथ से रुद्राक्ष की कंठी लेकर देखते हैं, फिर पूछते हैं कि बेटा क्या नाम है। जवाब मिलता है आतिफ खान। संत कहते हैं धन्य हो, तुमसे कंठी जरूर लेंगे। कंठी खरीदने वाले संत अपना नाम राममिलन दास बताते हैं। बोले- यह राम की पावन भूमि है, सब नर करहिं परस्पर प्रीती, चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती। युवा आतिफ कहता है कि यह दुकान बड़ा स्थान के महंत बिंदुगद्दाचार्य देवेंद्र प्रसादाचार्य जी की है, वे उसको बहुत मानते हैं।

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minorities get employment from monasteries and temples in ayodhya
रामजन्म भूमि पर भगवान के चित्र दिखाती आतिया - फोटो : amar ujala
रामनगरी का यह दृश्य सुरक्षा के दृष्टि से सबसे संवेदनशील श्रीरामजन्मभूमि मार्ग के बड़ा स्थान का है। संत जैसे ही कंठी लेकर आगे बढ़े बगल की दुकान से एक मासूम बेटी की आव़ाज गूंजने लगी, दुर्गा मां की फोटो ले लो, राम दरबार ले लो.. मूर्ति-माला, लॉकेट ले लो, गदा ले लो...।
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रामजन्म भूमि मार्ग - फोटो : amar ujala
रामलला का दर्शन करने जा रहे तमाम भक्त बरबस खींचे चले आए। गोरखपुर के श्रद्धालु डीपी सिंह रुक जाते हैं, चंद मिनट में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है। कूड़ेभार, सुल्तानपुर से आए उमेश मिश्रा पूछते हैं बेटी क्या नाम है, पास में खड़े शुभम मिश्रा, शिव प्रकाश व अनमोल एक साथ पूछते हैं कि क्या स्कूल जाती हो? जवाब मिलता है, मैं आतिया हूं, रोज पढ़ने जाती हूं। छुट्टी है तो मां-दादी की मदद कर रही हूं।
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रामजन्म भूमि मार्ग - फोटो : amar ujala
बिहार से आए अंकित दूबे मां दुर्गा का फोटो देखते हैं, तो खलीलाबाद से आए अंकिता उपाध्याय रामदरबार व लाकेट। यह दुकान भी बड़ा स्थान के महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य की है। श्री रामजन्मभूमि मार्ग की आखिरी बाजार रामगुलेला है। यहां बैरिकेडिंग के पास आसित खान हाथ में राम, हनुमान, शंकर समेत तमाम देवी-देवताओं के फोटो-लॉकेट, माला बेचते दिखते हैं। यहां से चूड़ी-कंगन प्रसाद के रूप में महिलाएं खरीदती हैं। आस-पास में सीडी की दुकानें हैं।
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दुकान पर मिलता सामान - फोटो : amar ujala
आसित कहते हैं कि बाबा के इंतकाल के बाद वे दुकान संभालते हैं, कभी कोई दिक्कत नहीं हुई। हां, जब बाहरी लोग बवाल के इरादे से आते हैं तो, सुरक्षा के लिए महाराज कुछ देर दुकान जरूर बंद करने को कह देते हैं। लेकिन कारसेवा से लेकर 1992 के तमाम बवाल में उसका कुछ नुकसान नहीं हुआ। वह कहता है कि यह दुकान रामगुलेला के संत शिवचरन दास ने बनवाई है, कभी उन्होंने भी खाली करने के लिए नहीं कहा, हमेशा मदद मिलती है।
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