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अयोध्या विवाद की प्रमुख घटनाओं का गवाह रहा नवंबर व दिसंबर, गोलीकांड व बाबरी विध्वंस जैसी हुईं घटनाएं

Sat, 09 Nov 2019 07:44 AM IST
शाहरुख खान नितिन कुमार मिश्र, अमर उजाला, अयोध्या
नितिन कुमार मिश्र, अमर उजाला, अयोध्या Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 09 Nov 2019 07:44 AM IST
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November and December witnessed major incidents related to Ayodhya dispute
ayodhya dispute - फोटो : अमर उजाला
इतिहास पर नजर दौड़ाएं तो रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद के लिहाज से नवंबर-दिसंबर माह काफी अहम रहा है। इस विवाद की सभी महत्वपूर्ण घटनाएं नवंबर व दिसंबर में ही हुईं हैं। इन दो महीनों में ही राममंदिर के लिए शिलान्यास कार्यक्रम, गोलीकांड व बाबरी विध्वंस जैसी घटनाएं हुईं। 9 नवंबर 1989 को हुए शिलान्यास कार्यक्रम ने अयोध्या विवाद को वृहद रूप देने का काम किया था तो अब एक बार फिर नवंबर माह सुप्रीम फैसले की घड़ी से चर्चा में है। मामले में सुप्रीम कोर्ट से कभी भी निर्णय आ सकता है। वहीं दूसरी तरफ ज्योतिषियों के मुताबिक वर्तमान में ग्रहों की जो चाल व स्थिति है वह अप्रत्याशित घटनाओं व बड़े परिवर्तन की ओर इशारा कर रही है।
November and December witnessed major incidents related to Ayodhya dispute
ayodhya dispute - फोटो : Social Media
अयोध्या विवाद में 9 नवंबर 1989 की तारीख बेहद महत्वपूर्ण है। यह वही दिन था जब विहिप ने हजारों हिंदू समर्थकों संग अयोध्या में रामजन्मभूमि का शिलान्यास किया था। रामजन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य डॉ. रामविलास दास वेदांती बताते हैं कि राममंदिर शिलान्यास से पहले पूरे देश में विहिप ने इसके लिए अभियान चला रखा था। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा शिलान्यास की अनुमति दिए जाने के बाद विहिप ने मंदिर निर्माण के लिए अपना आंदोलन और तेज कर दिया। एक तरफ अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए आंदोलन चरम पर था। उधर, विहिप के आह्वान पर देशभर से लाखों श्रद्धालु ईंट लेकर अयोध्या पहुंचने लगे थे। 10-11 नवंबर 1989 को कारसेवा की घोषणा की गई। 
November and December witnessed major incidents related to Ayodhya dispute
रामनगरी का विहंगम दृश्य - फोटो : अमर उजाला
सरयू तट से साधु-संत और कार्यकर्ता कुदाल-फावड़ा लेकर चले पर जिलाधिकारी ने निर्माण नहीं होने दिया। इस तरह से अयोध्या में राममंदिर निर्माण का मुद्दा देश का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया। स्वामी स्वरूपानंद ने तब कहा था कि शिलान्यास दक्षिणायन में किया गया लिहाजा शुभ नहीं माना जा सकता। दूसरी बड़ी घटना 2 नवंबर 1990 को हुई, जब विवादित परिसर की तरफ बढ़ रहे कारसेवकों पर तत्कालीन मुलायम सरकार द्वारा गोलियां चलवाई गईं थी जिनमें कोठारी बंधुओं व अयोध्या के पांच कारसेवकों समेत कई की मौत हुई थी। 
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November and December witnessed major incidents related to Ayodhya dispute
अयोध्या में सुरक्षा कड़ी - फोटो : अमर उजाला
मामले को सुलह-समझौत से निपटाने के लिए पहली बार कोर्ट की पहल पर ही मध्यस्थता की कार्रवाई भी नवंबर माह में ही शुरू हुई थी। 16 नवंबर 2017 को आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर को मध्यस्थ बनाया गया। उन्होंने कई पक्षों से बात की और अदालत के बाहर मामले का हल निकालने का प्रयास किया। इसी तरह दिसंबर माह भी अयोध्या विवाद में अहम रहा है। अयोध्या विवाद की शुरुआत 22/23 दिसंबर 1949 की रात तब हुई जब हिंदुओं ने बाबरी मस्जिद के केंद्रीय स्थल पर कथित तौर पर भगवान राम की मूर्ति रख दी। 
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November and December witnessed major incidents related to Ayodhya dispute
अयोध्या में सुरक्षा कड़ी - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद उस स्थान पर हिंदू नियमित रूप से पूजा करने लगे। मुसलमानों ने नमाज पढ़ना बंद कर दिया। दूसरी घटना में 5 दिसंबर 1950 को महंत परमहंस रामचंद्र दास ने हिंदू प्रार्थनाएं जारी रखने और बाबरी मस्जिद में राममूर्ति को रखने के लिए मुकदमा दायर किया। मस्जिद को ढांचा नाम दिया गया। 17 दिसंबर 1959 को निर्मोही अखाड़ा ने विवादित स्थल हस्तांतरित करने के लिए मुकदमा दायर किया। जबकि उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने भी 18 दिसंबर 1961 को बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक के लिए मुकदमा दायर किया। अयोध्या मामले के सबसे बड़ी घटना जिसे बाबरी विध्वंस के नाम से जाना जाता है वह भी 6 दिसंबर 1992 को ही घटित हुई। हजारों की संख्या में कारसेवकों ने अयोध्या पहुंचकर बाबरी मस्जिद ढहा दी। जिसके बाद सांप्रदायिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। जल्दबाजी में एक अस्थाई राममंदिर बनाया गया। इसके बाद 16 दिसंबर 1992 को मस्जिद की तोड़फोड़ की जिम्मेदार स्थितियों की जांच के लिए एमएस लिब्राहन आयोग का गठन हुआ।
 
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