चार महीनों बाद शुक्रवार को देवोत्थानी एकादशी से देवता जग गए। सहालग शुरू हो चुकी है। लेकिन नोट बंदी ने सहालग का ही बैंड बजा दिया है। जिनके घर आज, कल परसों में शादियां हैं, वहां चिंता ज्यादा है। हलवाई, टेंट, कैटरर्स समेत सभी का भुगतान करना है। जिनका खर्च हजारों से लेकर लाखों तक में लेकिन घर में रखे बड़े नोट बेकार हो चुके हैं। वहीं न तो एटीएम से उतने पैसे निकल पा रहे हैं और न ही बैंक से मनमर्जी रकम मिल रही है। शादियों वाले घरों में दबी जुबान चर्चा है कि इस बार बारात में उड़ाने को क्या खर्चने तक के लिए नोट नहीं मिलेंगे।
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नोट बंदी ने बजा दिया सहालग का बैंड, उड़ाना तो दूर खर्च के लिए भी नहीं नोट
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Sat, 12 Nov 2016 03:09 PM IST
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नोट बंदी से परेशान परिवार
- फोटो : amar ujala
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नोट बंदी से परेशान परिवार
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दोस्तों से जमा किए छोटे नोट
शनिवार को बेटे की शादी है और चार दिन पहले ही बड़े नोट का लेनदेन बंद हो गया। शुरूआत के दो दिन तो बहुत दिक्कत रही। गनीमत थी कि गेस्ट हाउस, कैटरर्स वगैरह की बड़ी देनदारी पहले ही दी जा चुकी थी लेकिन अब भी पर्याप्त छोटे नोट नहीं मिल पा रहे हैं। शादी में हर जगह चेक या कार्ड तो नहीं चल सकता। पिछले तीन दिनों से दोस्तों से 100-100 रुपये के नोट जमा कर रहा हूं। फिर भी अभी कसर है। बैंक की कतार में लगने का समय भी नहीं है।
आशुतोष कुमार, मुख्य अभियंता लेसा, गोमतीनगर।
शनिवार को बेटे की शादी है और चार दिन पहले ही बड़े नोट का लेनदेन बंद हो गया। शुरूआत के दो दिन तो बहुत दिक्कत रही। गनीमत थी कि गेस्ट हाउस, कैटरर्स वगैरह की बड़ी देनदारी पहले ही दी जा चुकी थी लेकिन अब भी पर्याप्त छोटे नोट नहीं मिल पा रहे हैं। शादी में हर जगह चेक या कार्ड तो नहीं चल सकता। पिछले तीन दिनों से दोस्तों से 100-100 रुपये के नोट जमा कर रहा हूं। फिर भी अभी कसर है। बैंक की कतार में लगने का समय भी नहीं है।
आशुतोष कुमार, मुख्य अभियंता लेसा, गोमतीनगर।
नोट बंदी से परेशान परिवार
- फोटो : amar ujala
चाहिए लाखों, हाथ में हजारों भी नहीं
18 नवंबर को बेटी की शादी है। टेंट हाउस, हलवाई, सर्राफ कपड़े वाले, दूध वाले सभी का भुगतान करना है। बड़े नोट बंद होने से तैयारियों पर अचानक से ब्रेक लग गया है। लाखों रुपये की जरूरत है। लेकिन हाथ में हजारों भी नहीं हैं। दोस्तों की मदद से कामचलाऊ छोटे नोट तो मिले हैं। कई घंटे लाइन में लगने के बाद आज बैंक से महज 10 हजार रुपये ही निकल पाए। अगले छह दिनों में रुपये कहां से आएंगे कुछ समझ में नहीं आ रहा।
लाल बहादुर गौतम, किसान बीकेटी।
18 नवंबर को बेटी की शादी है। टेंट हाउस, हलवाई, सर्राफ कपड़े वाले, दूध वाले सभी का भुगतान करना है। बड़े नोट बंद होने से तैयारियों पर अचानक से ब्रेक लग गया है। लाखों रुपये की जरूरत है। लेकिन हाथ में हजारों भी नहीं हैं। दोस्तों की मदद से कामचलाऊ छोटे नोट तो मिले हैं। कई घंटे लाइन में लगने के बाद आज बैंक से महज 10 हजार रुपये ही निकल पाए। अगले छह दिनों में रुपये कहां से आएंगे कुछ समझ में नहीं आ रहा।
लाल बहादुर गौतम, किसान बीकेटी।
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नोट बंदी से परेशान परिवार
- फोटो : amar ujala
कार्ड मनी के भरोसे तैयारियां
छोटे बेटे की शादी 29 नवंबर को है। कई दिनों पहले ही बलरामपुर गार्डेन की बुकिंग तो हो चुकी थी। लेकिन अब शादी में जब 15 दिन कम का समय रह गया है तो दिक्कत महसूस हो रही है। कैटरर्स बुक कराना है, टेंट वाले की पेंडिंग फाइनल करनी है। बैंक तो 10 हजार दे रहा है वो भी एक दिन में। छोटे नोट भी उतने नहीं बचे कि काम चल सके। हम कारोबारी का सारा पैसा तो बैंकों में ही रहता है। अगर काम नहीं हो पाया तो इस बार कार्ड मनी ही यूज करने का विकल्प रहेगा।
सुनील गोंबर, पब्लिकेशन इंडस्ट्री कारोबारी इंदिरानगर
छोटे बेटे की शादी 29 नवंबर को है। कई दिनों पहले ही बलरामपुर गार्डेन की बुकिंग तो हो चुकी थी। लेकिन अब शादी में जब 15 दिन कम का समय रह गया है तो दिक्कत महसूस हो रही है। कैटरर्स बुक कराना है, टेंट वाले की पेंडिंग फाइनल करनी है। बैंक तो 10 हजार दे रहा है वो भी एक दिन में। छोटे नोट भी उतने नहीं बचे कि काम चल सके। हम कारोबारी का सारा पैसा तो बैंकों में ही रहता है। अगर काम नहीं हो पाया तो इस बार कार्ड मनी ही यूज करने का विकल्प रहेगा।
सुनील गोंबर, पब्लिकेशन इंडस्ट्री कारोबारी इंदिरानगर
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- फोटो : amar ujala
बैंक से नहीं मिली कोई राहत
21 को बेटी की शादी है और नोट के लिए मारामारी मची है। बैंक में घंटों लाइन में लगकर धक्के खाने की फुर्सत नहीं है। कल ही गांव से जाकर घरवालों से 100 के नोट से 5-7 हजार रुपये के जुटाए हैं। टेंट और कैटरर्स की एडवांस बुकिंग कर पाया हूं। हलवाई व अन्य चीज के लिए लाख-सवा लाख कैश देने हैं, कैसे होगा। तमाम अन्य खर्चों के लिए परिचितों से कुछ राशि का इंतजाम करने को कहा है। शादी-ब्याह वाले घरों के लिए कुछ इंतजाम करना चाहिए।
एसपी त्रिपाठी, रिटायर्ड एकाउंट एंड लॉ ऑफिसर, नीलमथा।
21 को बेटी की शादी है और नोट के लिए मारामारी मची है। बैंक में घंटों लाइन में लगकर धक्के खाने की फुर्सत नहीं है। कल ही गांव से जाकर घरवालों से 100 के नोट से 5-7 हजार रुपये के जुटाए हैं। टेंट और कैटरर्स की एडवांस बुकिंग कर पाया हूं। हलवाई व अन्य चीज के लिए लाख-सवा लाख कैश देने हैं, कैसे होगा। तमाम अन्य खर्चों के लिए परिचितों से कुछ राशि का इंतजाम करने को कहा है। शादी-ब्याह वाले घरों के लिए कुछ इंतजाम करना चाहिए।
एसपी त्रिपाठी, रिटायर्ड एकाउंट एंड लॉ ऑफिसर, नीलमथा।