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मौसम पर असर: अनियोजित विकास ने बनाया लखनऊ को 'हीट आईलैंड' एसी का उपयोग बढ़ा रहा है गर्मी, एक रिपोर्ट

Sat, 23 Apr 2022 05:27 PM IST
ishwar ashish रोली खन्ना, अमर उजाला, लखनऊ
रोली खन्ना, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 23 Apr 2022 05:27 PM IST
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why the temprature goes so high in Lucknow, see a report.
ये मिनी सचिवालय है। जहां अंदर तो तापमान ठंडा है पर इसकी गर्मी से बाहर लगा पेड़ झुलस गया। - फोटो : amar ujala

बीती सदी में पारे की ऊंची छलांग, समय से पहले गर्मी की शुरुआत और लू का चलना...। मौसम के ये बदलाव अचंभित कर रहे हैं। भू-वैज्ञानिक व मौसम विज्ञानी भी सर्दी-गर्मी के बदलते पैटर्न को लेकर चिंतित हैं और नए सिरे से अध्ययन में जुटे हैं। उनका कहना है कि राजधानी में अनियोजित विकास के चलते बदलता भू-उपयोग, ऊष्मा बजट, भू-दृश्य और हरियाली के क्षेत्र में अतिक्रमण का असर मौसम पर साफ दिख रहा है।



एलडीए के मुताबिक हर साल 20 हजार मकान बढ़ रहे हैं, जिनमें से 70 फीसदी अनियोजित इलाकों में हैं। वहीं, प्राधिकरण के पूर्व मुख्य नगर नियोजक जेएन रेड्डी कहते हैं कि अनियोजित विकास में हरियाली (खुला क्षेत्र जैसे पार्क, झील, खेल का मैदान, चौड़ी सड़कें आदि) की अनदेखी होती है। इससे कहीं न कहीं पर्यावरण प्रभावित होता है। वहीं, एसी से निकलने वाली गर्मी भी मौसम पर असर डाल रही है। लखनऊ की बात करें तो एसी का बाजार हर साल 20 फीसदी बढ़ रहा है। इसी मार्च-अप्रैल में बीते सालों की अपेक्षा चार गुना अधिक बिक्री हो चुकी है।

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सरकारी इमारतों के बड़ी संख्या में एसी का प्रयोग हो रहा है। - फोटो : amar ujala

इन उदाहरणों से समझें मौसम में आने वाले बदलावों को:
केस-1: दिसंबर की शुरुआत में न कोहरा, न हाड़ कंपाने वाली ठंड

जिस ला-नीना के चलते कड़ाके की ठंड के आसार थे, वही कमजोर पड़ गया। नतीजतन, दिसंबर के पहले हफ्ते का मौसम तेज धूप, हवा न चलना और हाफ स्वेटर में भी पसीना आने जैसा रहा। वहीं, कोहरा भी नहीं पड़ा। विज्ञानियों ने बताया कि भूमध्य रेखीय प्रशांत महासागर में ला-नीना के कमजोर पड़ने से तापमान इस महीने औसत से अधिक रहा। वहीं, पश्चिमी विक्षोभ के निष्क्रिय बने रहने से एक से सात दिंसबर तक अधिकतम तापमान 25 से 29 डिग्री तक और न्यूनतम पारा 13 से 18 डिग्री के बीच रहा।

केस-2: मार्च में ही गर्मी ने दिखाए मई से तेवर
सुबह होते ही तपन, दिन चढ़ने के साथ झुलसाती धूप और लू के थपेड़े, आमतौर पर ये मई की शुरुआत का संकेत देते हैं। हालांकि, इस साल मार्च में मौसम के तेवर कुछ ऐसे रहे हैं। 16 से 21 मार्च तक अधिकतम पारा 35 से 39 डिग्री रहा। वहीं, बीते वर्ष में 16 से 21 मार्च के बीच पारे की रफ्तार 34 से 36 के बीच थी। साल 2021 में 30 मार्च को पारे ने 40 डिग्री का आंकड़ा छुआ था, जबकि इस साल यह महीने के मध्य तक आते-आते इसके करीब पहुंच गया।

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- फोटो : amar ujala

केस-3: अप्रैल की शुरुआत में टूटा 10 वर्षों का रिकॉर्ड
चिलचिलाती धूप के साथ लू के थपेड़ों और 41 डिग्री पहुंचे पारे ने इस अप्रैल के चौथे दिन ही दस वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। बीते 10 वर्षों के आंकड़ों को देखें तो अप्रैल का दूसरा पखवारा शुरू होने के बाद ही तापमान 41 पार गया था। भू-वैज्ञानिकों का कहना है कि आम तौर पर अप्रैल के पहले सप्ताह में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो जाता था। इससे पहाड़ों में हल्की बारिश और बर्फबारी होती थी, जिससे हवा में नमी और ठंड होती थी। इस बार ऐसा हुआ नहीं और फरवरी के अंत में ही मौसम सूखा हो गया। मार्च में पूरा उत्तर भारत सूखा रह गया।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

छोटी-छोटी आदतों से होगा सुधार
यूनिसेफ लखनऊ के वॉश स्पेशलिस्ट नागेंद्र प्रसाद सिंह का कहना है कि पर्यावरण के अनुकूल छोटी-छोटी आदतें अपनाकर हम योगदान दे सकते हैं। सौर ऊर्जा का इस्तेमाल, पानी बचाना, पेड़-पौधे लगाना, प्लास्टिक आदि का इस्तेमाल न करना जैसे उपाय पहल साबित हो सकते हैं।

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इस तरह निर्मित हो रही हैं इमारतें...। - फोटो : amar ujala

विशेषज्ञों का नजरिया...भू-उपयोग से लेकर काफी कुछ बदला
वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक व इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोकार्बन एनर्जी एंड जियोरिर्सोसेज के निदेशक प्रो. ध्रुवसेन सिंह कहते हैं कि  भू-उपयोग से लेकर काफी कुछ बदलने से राजधानी हीट आईलैंड बनती जा रही है। गोमतीनगर के अधिकतर निचले इलाके में बसते लोग, प्रकृति के क्षेत्र में अतिक्रमण जैसे कुकरैल में बनी बस्तियां, सूखते जलस्रोत और झील-तालाबों-कुएं पाट देना, मिट्टी की खोदाई कर टीले खड़े कर देना जैसे कारण इसमें सहयोग कर रहे हैं।

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