कहते हैं कि साहस की खिड़की बंद कर दो तो दिल-दिमाग रूपी शीशे पर भय की धूल जम ही जाती है। इस धूल को हटाने के लिए हमें हिम्मत से काम लेना होगा। ऐसे ही कुछ उदाहरण हम अपने पाठके के सामने रख रहे हैं, जिन्होंने कोरोना काल की चुनौतियों का सामना डट कर किया है। चुनौतियों से दो-दो हाथ करने वालों की इस कड़ी में हम आज बात करेंगे राजधानी के जाने-माने कलाकारों की, जो बदलाव के साथ खुद को ढालने की हर पल कोशिश कर रहे हैं।
इन युवाओं ने कोरोना काल में किया चुनौतियों का डट कर सामना और हौसले से खोले नए रास्ते
प्रिंट मेकिंग में कर डाले कई प्रयोग
- सोनल वार्ष्णेय, प्रिंटिंग आर्टिस्ट
लॉकडाउन में कुछ पल के लिए लगा कि जिंदगी ठहर गई है। मैं कुछ काम ललित कला के स्टूडियो में करती हूं, कुछ घर से करती हूं। चारों तरफ सब बंद हो गया था। हमारे पास जिंक प्लेट, पेपर, केमिकल व इंक खत्म हो चुकी थी। कहीं कुछ मिल भी नहीं रहा था। पति हरीश ओझा हरिद्वार में फंस गए थे। मैंने तय किया की खाली नहीं बैठूंगी। पेपर पर वाटर कलर से काम शुरू किया। यह प्रयोग हमारी गैलरी आर्ट हाउस, चैन्नई को पसंद आया। इसका शो मोजेटो पर ऑनलाइन देखा जा सकता है। इसके अलावा भी एक-दो और शो की तैयारी पूरी हो। हमें लगता है कि एक कलाकार में कहीं ज्यादा हौसला होता है।
पेटिंग ना सही फोटोग्राफी ही सही
- हरीश ओझा, पेंटर
मैं हरिद्वार में था, मेरा इलाज चल रहा था। अचानक से लॉकडाउन हुआ और मैं वहां फंस गया। जिस अस्पताल में था, वहां सात-आठ लोग थे। मेरे पास कैमरा था। मैंने फोटोग्राफी शुरू कर दी। यह मेरे लिए भविष्य का इनवेस्टेमेंट है। मेरे फोटो शूट जल्द ही राष्ट्रीय प्रदर्शनी का हिस्सा होंगे। मुझे लगता है कि जब एक रास्ता बंद होता है तो दूसरे रास्ते खुल जाते हैं। हमारी पेंटिंग ऑनलाइन बेचकर जिंदगी की गाड़ी आगे बढ़ रही है, अब यह फोटो शूट हमारे भविष्य के लिए एक इन्वेस्टमेंट की तरह है। हां सरकार से भी हम कलाकार चाहते हैं कि थोड़ी हमारी मदद हो जाए तो हमारा उत्साह और भी बढ़ जाएगा।
सोशल मीडिया से लेती रहीं ऑर्डर, ऑनलाइन क्लास भी शुरू कर दी
- कविता शर्मा, आर्टिस्ट
एक रास्ता बंद होता है तो दूसरे खुल जाते हैं। महामारी ने सारे रास्ते बंद किए, पर हमारी सोच तो हमारे साथ थी। शुरुआत के कुछ दिनों को छोड़ दें तो धीरे-धीरे मैंने अपना काम सोशल मीडिया पर पोस्ट करना शुरू किया और उससे मुझे ऑर्डर मिलना शुरू हो गए। इसके साथ ही साथ मैंने ऑनलाइन क्लास शुरू कर दी। कल तक सिर्फ लखनऊ के लोगों को सिखाती थी, आज दूसरे शहरों, राज्यों और यहां तक कि दुबई से भी मुझे स्टूडेंट मिल गए हैं।
बच्चों को सिखाने लगी, अब एग्जीबिशन की तैयारी
- रंजना पाल, ग्राफिक्स आर्टिस्ट
हम कलाकार तो मुश्किल से लड़ कर ही आगे बढ़ते हैं। ये कला ही है जो हमें धैर्य के साथ चुनौतियों का सामना करना सिखाती है। मुझे ग्राफिक्स आर्ट के लिए इंक चाहिए होती है, ये खत्म हो चुकी, कुछ और सामान चाहिए थे, जो मुझे नहीं मिल पा रहे थे। दूसरे हमारे काम के खरीदार भी घरों में लॉक थे।
मैंने घर में रखी चीजों से अपना काम जारी रखा, क्योंकि लॉकडाउन के बाद हालात सामान्य होने पर यदि हमें अपने काम को दिखाना होगा तो कुछ तो होना चाहिए। एग्जीबिशन की तैयारी में खुद को व्यस्त रखा और खर्च चलाने के लिए बच्चों की ट्रेनिंग शुरू कर दी। ये दो रास्ते मिले हैं कुछ और रास्ते भी मिलेंगे।

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