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कवि सम्मेलन: 50 हजार श्रोताओं के बीच सजी काव्य संध्या, CM बोले-भोपाल से ओरछा पर्यटन सेवा जल्द शुरू होगी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Wed, 18 Mar 2026 11:38 PM IST
सार

भोपाल में कर्मश्री का 25वां कवि सम्मेलन भव्य तरीके से आयोजित हुआ, जिसमें हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। कुमार विश्वास समेत कई कवियों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। सीएम डॉ. मोहन यादव ने 

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Karmashree Kavi Sammelan: Poets enthralled 50,000 listeners, creating backdrops for tableaux.
विधायक रामेश्वर शर्मा, कवि कुमार विश्वास, सीएम मोहन यादव - फोटो : अमर उजाला
भोपाल में हिंदू नववर्ष के अवसर पर आयोजित “कर्मश्री” का अखिल भारतीय कवि सम्मेलन इस बार अपने 25वें वर्ष में बेहद भव्य रूप में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस मौके पर देश के प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास समेत कई नामी कवियों ने अपनी प्रस्तुतियों से माहौल को काव्यमय बना दिया। कवि सम्मेलन में हास्य, वीर, श्रृंगार और देशभक्ति से भरपूर कविताओं ने करीब 50 हजार श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। कार्यक्रम में दिनेश बावरा, सुदीप भोला, अजय अंजाम, कुशल कुशलेन्द्र और कवयित्री सान्या राय ने भी शानदार प्रस्तुतियां दीं, जिन्हें खूब सराहना मिली। यह आयोजन “कर्मश्री” संस्था द्वारा पिछले 25 वर्षों से लगातार किया जा रहा है। इस बार रजत जयंती वर्ष होने के कारण कार्यक्रम को खास तौर पर भव्य बनाया गया, जिससे यह राजधानी के बड़े सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल हो गया।



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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन देना हमारा ध्येय है। श्रीराम की नगरी को राजधानी से सीधे जोड़ने के लिए हम बहुत जल्द भोपाल से ओरछा तक धार्मिक पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने जा रहे हैं।  मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में 7 हजार भाषाएं-बोलियां बोली जाती हैं। सबका समृद्ध साहित्य है। इतनी बड़ी भाषाई विविधता और समृद्धि किसी और देश में देखने को नहीं मिलती। मध्यप्रदेश की धरती पर बाणभट्ट, कालिदास, राजशेखर, पतंजलि, भर्तहरि, अनंगहर्ष, वत्सराज, केशवदास, पद्माकर, बिहारी जैसे रत्न हुए। आज जिस नगरी भोपाल पधारे हैं, वहां के शासक स्वयं सरस्वती पुत्र राजा भोज रहे। राजा भोज स्वयं एक कालजयी कवि, प्रकांड दार्शनिक और अद्वितीय विचारक थे। उनके शासनकाल में ज्ञान और कला का निरंतर अभिषेक होता था। राजा भोज के बारे में एक ऐतिहासिक किंवदंति बहुत प्रसिद्ध है कि उनके शासनकाल में ज्ञान और कला का इतना सम्मान था कि बुनकर भी संस्कृत कविताएं रचते थे। आज फिर से भोज नगरी में सरस्वती पुत्रों का समागम हुआ है, यहाँ सबका स्वागत है।


 
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सीएम मोहन यादव और विधायक रामेश्वर शर्मा - फोटो : अमर उजाला
कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद
कवि सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विधायक रामेश्वर शर्मा, डॉ. कुमार विश्वास सहित कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक क्षेत्र के लोग मौजूद रहे। बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और खास बना दिया।

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कवि सम्मेलन में मौजूद श्रोताओं की भीड़ - फोटो : अमर उजाला
संस्कृति और परंपरा का संदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती हमेशा से धर्म और संस्कृति की पहचान रही है। उन्होंने सभी कवियों का स्वागत करते हुए नववर्ष की शुभकामनाएं दीं। वहीं, विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी नववर्ष की बधाई देते हुए कहा कि यह आयोजन भारतीय संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाने का माध्यम है। उन्होंने इस वर्ष के आयोजन को ऐतिहासिक बताया।

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कवि कुमार विश्वास - फोटो : अमर उजाला
आकर्षण का केंद्र बना भव्य मंच
कार्यक्रम के मंच पर विशेष बैकड्रॉप तैयार किया गया था, जिसमें सोमनाथ मंदिर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष, सरदार पटेल की जयंती और वंदे मातरम के 150 वर्ष जैसी झलकियां दिखाई गईं, जो दर्शकों को खूब आकर्षित कर रही थीं। यह कवि सम्मेलन सांस्कृतिक उत्साह और काव्य रस से भरपूर एक यादगार आयोजन साबित हुआ।
 
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