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MP News: महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर मंदिरों में महाशिवरात्रि पर खास इंतजाम, जानिए कैसे कर सकेंगे दर्शन
Mon, 28 Feb 2022 01:54 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा
Updated Mon, 28 Feb 2022 01:54 PM IST
सार
मध्य प्रदेश के खंडवा और उज्जैन जिले में ओंकारेश्वर और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग है। दोनों का विशेष महत्व है। महाशिवरात्रि पर दोनों ही जगह खास इंतजाम किए गए हैं।
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नर्मदा नदी किनारे स्थित है ओंकारेश्वर
- फोटो : सोशल मीडिया
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मध्य प्रदेश के दो ज्योतिर्लिंगों- ओंकारेश्वर और महाकालेश्वर पर 1 मार्च को महाशिवरात्रि धूमधाम से मनाई जाएगी। महाकालेश्वर उज्जैन जिले में है जबकि ओंकारेश्वर खंडवा जिले में। ओंकारेश्वर नर्मदा तट पर है तो महाकालेश्वर शिप्रा नदी के किनारे पर। दोनों का अपना महत्व है।
सोमवार को ओंकारेश्वर ज्योतिर्लंग के शृंगार दर्शन
- फोटो : सोशल मीडिया
11 हजार दीपक से रोशन होगा ओंकारेश्वर
खंडवा जिले में स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग को महाशिवरात्रि पर्व पर सजाया गया है। मंदिर परिसर को महाशिवरात्रि पर 11 हजार दीपकों से रोशन किया जाएगा। दीपोत्सव कार्यक्रम में भक्तगण, धार्मिक संस्थाएं, संगठन, साधु-संत, पंडित-पुजारी भी शामिल होंगे। रात्रि में पुराने बस स्टैंड स्थित प्रेरणा मंच पर भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा। महाशिवरात्रि पर्व पर तड़के 3 बजे से भक्तों के लिए ओंकारेश्वर मंदिर के पट खोले जाएंगे। भक्तों की संख्या को देखते हुए एकाकी मार्ग से दर्शन व्यवस्था की गई है। मंदिर परिसर के नजदीक की गलियां, घाटों के रास्तों से आवागमन प्रतिबंधित रहेगा। दर्शन के लिए भक्त बड़ चौक होते हुए मुख्य बाजार से ज्योतिर्लिंग मंदिर पहुचेंगे। स्थानीय भक्तों को पर्व के दौरान सुबह 3 से 6 बजे तक सुखदेव मुनि द्वार से दर्शन की अनुमति रहेगी। 6 बजे के बाद आम भक्तों के साथ कतार में लगकर ही दर्शन के लिए पहुंचना होगा।
खंडवा जिले में स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग को महाशिवरात्रि पर्व पर सजाया गया है। मंदिर परिसर को महाशिवरात्रि पर 11 हजार दीपकों से रोशन किया जाएगा। दीपोत्सव कार्यक्रम में भक्तगण, धार्मिक संस्थाएं, संगठन, साधु-संत, पंडित-पुजारी भी शामिल होंगे। रात्रि में पुराने बस स्टैंड स्थित प्रेरणा मंच पर भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा। महाशिवरात्रि पर्व पर तड़के 3 बजे से भक्तों के लिए ओंकारेश्वर मंदिर के पट खोले जाएंगे। भक्तों की संख्या को देखते हुए एकाकी मार्ग से दर्शन व्यवस्था की गई है। मंदिर परिसर के नजदीक की गलियां, घाटों के रास्तों से आवागमन प्रतिबंधित रहेगा। दर्शन के लिए भक्त बड़ चौक होते हुए मुख्य बाजार से ज्योतिर्लिंग मंदिर पहुचेंगे। स्थानीय भक्तों को पर्व के दौरान सुबह 3 से 6 बजे तक सुखदेव मुनि द्वार से दर्शन की अनुमति रहेगी। 6 बजे के बाद आम भक्तों के साथ कतार में लगकर ही दर्शन के लिए पहुंचना होगा।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग
- फोटो : सोशल मीडिया
ओंकार पर्वत पर स्थिर है ओंकारेश्वर
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में चौथा ज्योतिर्लिंग है। नर्मदा नदी के मध्य ओंकार पर्वत पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थित है। स्कंद पुराण, शिव पुराण व वायु पुराण में इसकी महिमा का वर्णन है। मान्यता है कि भारत के सभी हिंदू तीर्थों के दर्शन के बाद ओंकारेश्वर के दर्शन व पूजन का विशेष महत्व है। तीर्थ यात्री सभी तीर्थों का जल लाकर ओंकारेश्वर को अर्पित करते हैं। इससे ही सारे तीर्थ पूर्ण होते हैं। यहां ओंकारेश्वर और ममलेश्वर (जिन्हें अमलेश्वर भी कहा जाता है) के रूप में दो शिवलिंग हैं। दोनों शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यहां पर्वतराज विंध्य ने घोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या के बाद भगवान शिव से विंध्य क्षेत्र में स्थायी निवास की प्रार्थना की थी। यहां एक ही ओंकारलिंग दो स्वरूपों में बंटा है। पार्थिवमूर्ति में जो ज्योति प्रतिष्ठित हुई थी, उसे ही परमेश्वर अथवा अमलेश्वर ज्योतिर्लिंग कहते हैं। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि 12 ज्योतिर्लिंगों में यह एकमात्र ज्योतिर्लिंग है जहां महादेव शयन करते हैं। भगवान शिव प्रतिदिन तीनों लोकों में भ्रमण के पश्चात यहां आकर विश्राम करते हैं। भोलेनाथ के साथ यहां माता पार्वती भी रहती हैं। रोज रात में यहां चौसर-पांसे खेलते हैं। यहां शयन आरती भी की जाती है। शयन आरती के बाद ज्योतिर्लिंग के सामने रोज चौसर-पांसे की बिसात सजाई जाती है। ओंकारेश्वर मंदिर में भगवान शिव की गुप्त आरती होती है, जहां पुजारियों के अलावा कोई भी गर्भगृह में नहीं जा सकता।
कैसे जाएं इंदौर से ओंकारेश्वर
इंदौर से ओंकारेश्वर की दूरी लगभग 80 किलोमीटर है। रेल मार्ग और सड़क मार्ग से यहां जा सकते हैं। ओंकारेश्वर का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन रतलाम-इंदौर-खण्डवा रेलवे लाइन पर ओंकारेश्वर रोड के नाम से बना है। यहां से ज्योतिर्लिंग मंदिर की दूरी मात्र 12 किलोमीटर है। बस, प्राइवेट टैक्सी और निजी वाहनों से यहां पहुंचा जा सकता है। इंदौर के सरवटे बस स्टैंड से ओंकारेश्वर की बसें मिलती हैं। दो से तीन घंटे में बस ओंकारेश्वर छोड़ देती है। यदि खंडवा से आते हैं तो बस या टैक्सी पहुंचा सकती है। निकटतम एयरपोर्ट इंदौर में है।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में चौथा ज्योतिर्लिंग है। नर्मदा नदी के मध्य ओंकार पर्वत पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थित है। स्कंद पुराण, शिव पुराण व वायु पुराण में इसकी महिमा का वर्णन है। मान्यता है कि भारत के सभी हिंदू तीर्थों के दर्शन के बाद ओंकारेश्वर के दर्शन व पूजन का विशेष महत्व है। तीर्थ यात्री सभी तीर्थों का जल लाकर ओंकारेश्वर को अर्पित करते हैं। इससे ही सारे तीर्थ पूर्ण होते हैं। यहां ओंकारेश्वर और ममलेश्वर (जिन्हें अमलेश्वर भी कहा जाता है) के रूप में दो शिवलिंग हैं। दोनों शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यहां पर्वतराज विंध्य ने घोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या के बाद भगवान शिव से विंध्य क्षेत्र में स्थायी निवास की प्रार्थना की थी। यहां एक ही ओंकारलिंग दो स्वरूपों में बंटा है। पार्थिवमूर्ति में जो ज्योति प्रतिष्ठित हुई थी, उसे ही परमेश्वर अथवा अमलेश्वर ज्योतिर्लिंग कहते हैं। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि 12 ज्योतिर्लिंगों में यह एकमात्र ज्योतिर्लिंग है जहां महादेव शयन करते हैं। भगवान शिव प्रतिदिन तीनों लोकों में भ्रमण के पश्चात यहां आकर विश्राम करते हैं। भोलेनाथ के साथ यहां माता पार्वती भी रहती हैं। रोज रात में यहां चौसर-पांसे खेलते हैं। यहां शयन आरती भी की जाती है। शयन आरती के बाद ज्योतिर्लिंग के सामने रोज चौसर-पांसे की बिसात सजाई जाती है। ओंकारेश्वर मंदिर में भगवान शिव की गुप्त आरती होती है, जहां पुजारियों के अलावा कोई भी गर्भगृह में नहीं जा सकता।
कैसे जाएं इंदौर से ओंकारेश्वर
इंदौर से ओंकारेश्वर की दूरी लगभग 80 किलोमीटर है। रेल मार्ग और सड़क मार्ग से यहां जा सकते हैं। ओंकारेश्वर का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन रतलाम-इंदौर-खण्डवा रेलवे लाइन पर ओंकारेश्वर रोड के नाम से बना है। यहां से ज्योतिर्लिंग मंदिर की दूरी मात्र 12 किलोमीटर है। बस, प्राइवेट टैक्सी और निजी वाहनों से यहां पहुंचा जा सकता है। इंदौर के सरवटे बस स्टैंड से ओंकारेश्वर की बसें मिलती हैं। दो से तीन घंटे में बस ओंकारेश्वर छोड़ देती है। यदि खंडवा से आते हैं तो बस या टैक्सी पहुंचा सकती है। निकटतम एयरपोर्ट इंदौर में है।
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महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन।
- फोटो : सोशल मीडिया
भस्मारती के लिए प्रसिद्ध है महाकालेश्वर
उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मोक्षदायिनी शिप्रा के तट पर स्थित है। यहां महाकाल की रोजाना भस्मारती होती है। मुर्दे की भस्म चढ़ाने का रिवाज है। महाकाल का आकर्षक शृंगार होता है।महाकाल ज्योतिर्लिंग दक्षिणमुखी है, इस वजह से इसे दक्षिणामूर्ति माना जाता है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में इसे तांत्रिक परंपरा के लिए विशेष बनाता है। महाकाल मंदिर के ऊपर गर्भगृह में ओंकारेश्वर शिव की मूर्ति प्रतिष्ठित है। गर्भगृह के पश्चिम, उत्तर और पूर्व में गणेश, पार्वती और कार्तिकेय के चित्र स्थापित हैं। दक्षिण में नंदी की प्रतिमा है। तीसरी मंजिल पर नागचंद्रेश्वर की मूर्ति के दर्शन केवल नागपंचमी के दिन होते हैं। वर्ष में केवल महाशिवरात्रि के दिन ही दोपहर में भस्मारती होती है।
उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मोक्षदायिनी शिप्रा के तट पर स्थित है। यहां महाकाल की रोजाना भस्मारती होती है। मुर्दे की भस्म चढ़ाने का रिवाज है। महाकाल का आकर्षक शृंगार होता है।महाकाल ज्योतिर्लिंग दक्षिणमुखी है, इस वजह से इसे दक्षिणामूर्ति माना जाता है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में इसे तांत्रिक परंपरा के लिए विशेष बनाता है। महाकाल मंदिर के ऊपर गर्भगृह में ओंकारेश्वर शिव की मूर्ति प्रतिष्ठित है। गर्भगृह के पश्चिम, उत्तर और पूर्व में गणेश, पार्वती और कार्तिकेय के चित्र स्थापित हैं। दक्षिण में नंदी की प्रतिमा है। तीसरी मंजिल पर नागचंद्रेश्वर की मूर्ति के दर्शन केवल नागपंचमी के दिन होते हैं। वर्ष में केवल महाशिवरात्रि के दिन ही दोपहर में भस्मारती होती है।
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सोमवार को महाकाल के शृंगार दर्शन
- फोटो : सोशल मीडिया
महाकाल दर्शन के लिए यह रहेगी व्यवस्था
महाशिवरात्रि पर महाकालेश्वर के दर्शन के लिए तीन परतों की व्यवस्था की गई है। पहली परत आम भक्तों की होगी। दूसरा प्रोटोकॉल मार्ग और तीसरे में हरिफाटक से प्रवेश मिलेगा। उज्जैन कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया कि महाशिवरात्रि पर डेढ़ लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। इंदौर, देवास, नागदा और बड़नगर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कर्क राज मंदिर में पार्किंग रखी गई है। यहां से श्रद्धालु पैदल गंगा गार्डन तक पहुंचेंगे। पास में ही रास्ते से चारधाम मंदिर तक श्रद्धालु पहुंच सकेंगे। दर्शन के बाद प्रवचन हॉल के पास बने निर्गम द्वार से बाहर जाएंगे। तीन बैरिकेडिंग से श्रद्धालुओं को प्रवेश मिलेगा। दो बैरिकेडिंग आम श्रद्धालुओं के लिए और तीसरी बैरिकेडिंग 250 रुपये की रसीद वालों के लिए होगी। श्रद्धालुओं को एक घंटे तक लाइन में इंतजार करना पड़ सकता है। श्रद्धालुओं को ज्यादा पैदल न चलना पड़े, इसके लिए पार्किंग से लेकर गंगा गार्डन तक निशुल्क ई-रिक्शा की सुविधा रहेगी। दिव्यांग और बुजुर्गों को प्राथमिकता दी जाएगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा में 1200 पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। पुलिस सीसीटीवी कैमरे से नजर रखी जाएगी।
महाशिवरात्रि पर महाकालेश्वर के दर्शन के लिए तीन परतों की व्यवस्था की गई है। पहली परत आम भक्तों की होगी। दूसरा प्रोटोकॉल मार्ग और तीसरे में हरिफाटक से प्रवेश मिलेगा। उज्जैन कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया कि महाशिवरात्रि पर डेढ़ लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। इंदौर, देवास, नागदा और बड़नगर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कर्क राज मंदिर में पार्किंग रखी गई है। यहां से श्रद्धालु पैदल गंगा गार्डन तक पहुंचेंगे। पास में ही रास्ते से चारधाम मंदिर तक श्रद्धालु पहुंच सकेंगे। दर्शन के बाद प्रवचन हॉल के पास बने निर्गम द्वार से बाहर जाएंगे। तीन बैरिकेडिंग से श्रद्धालुओं को प्रवेश मिलेगा। दो बैरिकेडिंग आम श्रद्धालुओं के लिए और तीसरी बैरिकेडिंग 250 रुपये की रसीद वालों के लिए होगी। श्रद्धालुओं को एक घंटे तक लाइन में इंतजार करना पड़ सकता है। श्रद्धालुओं को ज्यादा पैदल न चलना पड़े, इसके लिए पार्किंग से लेकर गंगा गार्डन तक निशुल्क ई-रिक्शा की सुविधा रहेगी। दिव्यांग और बुजुर्गों को प्राथमिकता दी जाएगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा में 1200 पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। पुलिस सीसीटीवी कैमरे से नजर रखी जाएगी।
