सरकारी अनाज के रखरखाव और निगरानी में लापरवाही का मामला सामने आया है। मंडला के खैरी स्थित विपणन गोदाम में रखा करीब 70 लाख रुपए का गेहूं कीटों की भेंट चढ़ गया। गोदाम में रखी कई बोरियों का गेहूं खराब होकर आटे जैसा हो गया है। इस मामले के सामने आने के बाद सरकारी अनाज की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक रबी विपणन वर्ष 2025-26 में नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा उपार्जित गेहूं को खैरी गोदाम में भंडारित किया गया था। यहां करीब 35 हजार 787 बोरियों यानी 17 हजार 859 क्विंटल गेहूं रखा गया था। बताया जा रहा है कि भंडारण के करीब पांच महीने बाद गेहूं में कीट और घुन का प्रकोप बढ़ने लगा।
गोदाम में स्थिति यह है कि कई बोरियों में गेहूं खराब होकर आटे जैसा हो गया है। कुछ बोरियों में कीड़े रेंगते हुए नजर आ रहे हैं, जबकि कई जगह कीड़े बोरियों से बाहर निकलकर अनाज को नुकसान पहुंचा रहे हैं। तीन स्टैक में रखा गेहूं भी खराब होने की स्थिति में पहुंच गया है।
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सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब गोदाम में इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी गेहूं रखा था, तो समय रहते इसकी निगरानी और आवश्यक रखरखाव क्यों नहीं किया गया। नियमों के मुताबिक भंडारित अनाज का नियमित निरीक्षण और रखरखाव किया जाना चाहिए।
मामला पहुंचा भोपाल
मामला अब विपणन विभाग के भोपाल मुख्यालय तक पहुंच चुका है। जिला विपणन अधिकारी से गेहूं के भंडारण, परिवहन और निरीक्षण से जुड़ी जानकारी मांगी गई है। वहीं जिला स्तर के अधिकारियों से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। इसके बाद कार्रवाई की बात कही जा रही है।
क्या बोले कलेक्टर?
मंडला कलेक्टर राहुल नामदेव धोटे ने बताया कि खैरी गोदाम में रखे गेहूं में घुन लगने की शिकायत सामने आई है। मामले की जांच कर कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल जांच के बाद ही साफ होगा कि इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी गेहूं खराब होने के लिए कौन जिम्मेदार है। यह मामला सिर्फ गेहूं खराब होने का नहीं, बल्कि सरकारी अनाज के भंडारण, निगरानी और रखरखाव की पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।