विश्व प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय पुष्कर पशु मेला 2025 इस बार भी अपनी विविधता और अनोखे पशुओं के कारण चर्चा में है। इस बार जयपुर के युवा पशुपालक अभिनव तिवारी का स्टॉल मेले का आकर्षण बना हुआ है, जो अपनी छोटे कद की पुंगनूर गायों और मिनी हॉर्स की प्रदर्शनी के साथ लोगों का ध्यान खींच रहे हैं।
Pushkar Fair 2025: मेले में छोटे कद काठी वाले पशु देखने उमड़े लोग, 36 इंच ऊंचाई की गाय तो मिनी हॉर्स की चर्चा
Pushkar Mela 2025: अजमेर के पुष्कर मेले में पुंगनूर गायें और मिनी हॉर्स आकर्षण का केंद्र बने। छोटे आकार के देसी पशुओं का संरक्षण किया जा रहा है। इनके प्रति लोगों को जागृत करने का काम पशुपालक कर रहे हैं।
पुंगनूर गायों की खासियत ने जीता दिल
अभिनव तिवारी पिछले छह वर्षों से लगातार पुष्कर मेले में भाग ले रहे हैं और हर बार कुछ नया लेकर आते हैं। इस बार उन्होंने जिन पुंगनूर गायों को प्रदर्शित किया है, वे आकार में बेहद छोटी हैं। इनकी ऊंचाई मात्र 28 से 36 इंच और वजन लगभग 150 से 200 किलोग्राम है। छोटी कद-काठी के बावजूद ये गायें तीन से पांच लीटर प्रतिदिन दूध देती हैं, जो ए2 प्रोटीन और औषधीय गुणों से भरपूर होता है।
तिवारी ने बताया कि पुंगनूर नस्ल की उत्पत्ति आंध्र प्रदेश से हुई है और अब यह विलुप्तप्राय श्रेणी में आ चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भी इस नस्ल की गाय पालने के बाद देशभर में इसके प्रति रुचि बढ़ी है।
संरक्षण का संदेश और बढ़ती लोकप्रियता
अभिनव तिवारी का कहना है कि वे इन गायों को बेचने नहीं आए हैं, बल्कि उनका उद्देश्य देसी नस्लों के संरक्षण और पहचान बढ़ाने का है। उन्होंने बताया कि पुंगनूर गायें कम चारे में भी पनप जाती हैं, इनकी देखभाल आसान होती है और ये शांत स्वभाव की होती हैं। छोटे आकार के कारण इन्हें शहरों में सीमित स्थानों पर भी पाला जा सकता है, जिससे अब शहरी क्षेत्रों में भी इनकी मांग बढ़ने लगी है।
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मिनी हॉर्स बने नया आकर्षण
तिवारी के स्टॉल पर केवल गायें ही नहीं, बल्कि उनके साथ मिनी हॉर्स भी प्रदर्शित किए गए हैं, जो पशुप्रेमियों के लिए नया आकर्षण बने हुए हैं। छोटे कद के इन घोड़ों की सुंदरता और चंचलता लोगों को खूब लुभा रही है। तिवारी का कहना है कि जैसे छोटे आकार की गायों की लोकप्रियता बढ़ रही है, वैसे ही मिनी हॉर्स की मांग भी देशभर में तेजी से बढ़ रही है।
देसी नस्लों के संरक्षण की दिशा में पहल
पुष्कर मेले में रेत के धोरों के बीच तिवारी के स्टॉल पर रोज सैकड़ों की संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं और इन दुर्लभ पशुओं के बारे में जानकारी ले रहे हैं। अभिनव तिवारी ने बताया कि उनका सपना है कि भारत में छोटे आकार के देसी पशुओं का संरक्षण बढ़े और इन्हें रोजगार व आत्मनिर्भरता का माध्यम बनाया जा सके।
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