तस्वीरों से कुदरत की खूबसूरती की खिड़की खुल गई। बोलतीं तस्वीरों ने प्रकृति के हर रंग से रूबरू कराया। आयोजन था अमर उजाला कार्यालय के संस्कृति हाल में ‘कलर्स ऑफ नेचर’ फोटो प्रदर्शनी। प्रकृति के चित्रों के साथ ही 200 साल पुरानी वस्तुओं ने भी लोगों को आकर्षित किया। रंग सिंदूरी और फोटोग्राफर्स क्लब ऑफ आगरा की ओर से आयोजित दोदिवसीय प्रदर्शनी का शुभारंभ मुख्य अतिथि पर्यावरण अभियंता इंजीनियर पंकज भूषण ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। प्रदर्शनी में फोटोग्राफर अनिल सिंदूर की मोबाइल से खींचे गए चित्र आकर्षण का केंद्र रहे। कानपुर निवासी सिंदूर के लगभग 100 चित्रों में से अधिकांश में सवेरे की जीवंत तस्वीरें हैं। सूर्योदय के साथ आसमान से बात करतीं चिड़िया से लेकर सुबह-सुबह खेतों में लहराती फसल के चित्रों ने प्रदर्शनी में आए लोगों को ताजगी से भर दिया। प्रदर्शनी में लांबा म्यूजियम कानपुर के बब्बू लांबा की एंटीक वस्तुओं ने दर्शकों को अभिभूत किया।
आगरा: ‘कलर्स ऑफ नेचर’ फोटो प्रदर्शनी का आयोजन, तस्वीरों से खुली कुदरत की खूबसूरती की खिड़की
एंटीक पीस की ओर बढ़ रहा रुझान: बब्बू लांबा
लांबा म्यूजियम के बब्बू लांबा ने बताया कि एंटीक पीस की ओर लोगों का तेजी से रुझान बढ़ा है। खासतौर से युवाओं को ये काफी पसंद आ रहे हैं। दशकों पुरानी वस्तुएं उनको आश्चर्यचकित करती हैं। उनको आभास होता है कि दुनिया में विज्ञान ने तेजी से प्रगति की है।
मोबाइल से खींचता हूं तस्वीर: अनिल सिंदूर
कोरोना काल जहां लोगों की समस्याएं बढ़ाईं तो वहीं कुछ लोगों ने इसे अवसर में बदल लिया। कानपुर निवासी फोटोग्राफर अनिल सिंदूर भी उनमें से हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में खाली समय में मोबाइल से ही फोटो खींचना शुरू कर दिया। एक-दो फोटो खींचने के बाद धीरे-धीरे फोटोग्राफी शौक बन गया। प्रकृति के चित्र ही उनकी फोटोग्राफी का मुख्य विषय रहता है। उन्होंने बताया कि उनके पास कैमरा नहीं है, वह मोबाइल से ही फोटो खींचते हैं।
अमर उजाला की यह पहल निश्चित रूप से युवा पीढ़ी को नए सृजन की ओर ले जाने का काम करेगी। प्रदर्शनी प्रेरणादायक है। कुदरत के विभिन्न रंग दिखे। -पीयूष सचदेवा, सचिव, फोटोग्राफी क्लब आगरा
पर्यावरण के प्रति जागरूक होंगे लोग
प्राकृतिक सौंदर्य को एक ही स्थान पर देख मन गद्गद् हो उठा। इस प्रदर्शन से पर्यावरण को सुरक्षित बनाए रखने के साथ ही प्रकृति के प्रति प्रेम का भाव बढ़ेगा। लोग जागरूक होंगे। -सिद्धार्थ जैन, शास्त्रीपुरम
एक ही स्थान पर प्रकृति के कई सुंदर रूपों को देखने का अवसर मिला। इस तरह की प्रदर्शनी सकारात्मक ऊर्जा देने का काम करती हैं। चित्र देखकर मन काफी खुश हुआ। -सौरभ गांगिल, शमसाबाद
लुभावने एंटीक
. 200 साल पुराना ताला
. 140 साल पुराना मिट्टी के तेल से चलने वाला पंखा
. 120 साल पुराना चाबी से चलने वाला ग्रामोफोन
. 100 साल पुराना चाबी से चलने वाला फ्रेंच लैंप
. 120 साल पुराना वायर टेप रिकॉर्ड
. 110 साल पुराना खाना बनाने वाला कुकर
. 115 साल पुरानी मिट्टी के तेल से चलने वाली प्रेस
. 98 साल पुराना मिट्टी के तेल से चलने वाला प्रोजेक्टर
. 97 साल पुराना स्विट्जरलैंड कंपनी का कैमरा का
. 70 साल पुराना दुनिया का तीन इंच का सबसे छोटा कैमरा
अमर उजाला कार्यालय पर चित्र प्रदर्शनी: खूबसूरत तस्वीरों के साथ देखिए 100 से 150 साल पुरानी धरोहरें भी
