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महिला दिवस: हर चुनौती में कुंदन सी चमकी नारी 'शक्ति', 'अपराजिता' के हौसले को सलाम

Mon, 08 Mar 2021 10:45 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 08 Mar 2021 10:45 AM IST
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International Women's Day: Agra women achieve success with hard work and strong will power
डॉ. नेहा दयाल, क्रिकेटर दीप्ति की मां सुशीला शर्मा और बैडमिंटन खिलाड़ी आराध्या की मां प्रमोद कुमारी (बायें से दायेंं) - फोटो : अमर उजाला
ताजनगरी की अपराजिताओं ने अपने हौसले और दृढ़ इच्छाशक्ति से न केवल खुद अपना मुकाम बनाया है, बल्कि दूसरों की उड़ान के लिए जज्बा दिया है। उपलब्धियां संख्या में अधिक न हों लेकिन बड़े बदलाव की धुरी बनी हैं। कोरोना काल में सेवा का कीर्तिमान बनाने वालीं चिकित्सक हैं, वह आठ महीने तक घर से दूर रहीं, दिनभर में 18 घंटे तक काम किया। खिलाड़ी और छात्राएं हैं जिनसे असफलता भी हार मान गई, मुकाम हासिल करने तक यह अपने प्रयासों को बढ़ती गईं। इन अपराजिताओं ने अपने कार्यों से देश, दुनिया तक पहचान नहीं बनाई हो लेकिन जो काम हाथ में लिया खुद को साबित करके दिखाया। आइए, शक्ति के संघर्ष, संकल्प और सफलता की कुछ कहानियों से रूबरू होते हैं।
International Women's Day: Agra women achieve success with hard work and strong will power
महिला दिवस: डॉ. नेहा दयाल - फोटो : अमर उजाला
आठ महीने तक घर नहीं गईं, 18 घंटे तक लैब में किया काम 
नेहा दयाल, जूनियर रेजीडेंट, माइक्रोबायलॉजी विभाग, एसएन मेडिकल कॉलेज

संघर्ष: डॉ. नेहा दयाल ऐसी ही कोरोना योद्धा हैं, जिनके बलबूते पर ताजनगरी में महामारी पर नियंत्रण रखा जा सका। दिसंबर, 2019 में उनकी शादी हुई और अप्रैल में उन्होंने एसएन मेडिकल कॉलेज में ज्वाइन किया। कोरोना महामारी के दौरान के दौरान 18 घंटे तक वायरोलॉजी लैब में नमूनों की जांच की। इस बीच आठ महीने तक घर नहीं जा र्पाइं। बीते साल नवंबर में संक्रमित भी हुईं। ठीक होने के बाद गाजियाबाद स्थित ससुराल जाने का मौका मिला।

संकल्प: चिकित्सा के क्षेत्र में अपने कार्य के प्रति समर्पण जरूरी है। जीवनभर इसी समर्पण के साथ कार्य करती रहूंगी।
International Women's Day: Agra women achieve success with hard work and strong will power
महिला दिवस: डॉ. भूमिका अरोड़ा - फोटो : अमर उजाला
संक्रमितों की जान बचाने को दो बार प्लाज्मा किया दान
डॉ. भूमिका अरोड़ा, मेडिकल ऑफिसर, रुनकता स्वास्थ्य केंद्र

संघर्ष:
डॉ. भूमिका अरोड़ा ने कोरोना वायरस के मरीजों की जान बचाने के लिए दो बार प्लाज्मा दान किया। जिले में वह सर्वाधिक प्लाज्मा दान करने वाली महिला हैं। उनका पूरा परिवार कोरोना से संक्रमित हो गया था। मां आईसीयू में भर्ती थी, डॉक्टरों ने प्लाज्मा थेरेेपी देने की बात कही। बमुश्किल प्लाज्मा मिल पाया। उन्होंने तब प्रण किया कि ठीक होने के बाद वह प्लाज्मा जरूर दान करेंगी।

संकल्प: जरूरतमंदों के लिए रक्तदान करने के प्रति जागरूकता लाऊंगी। खुद भी रक्तदान करती रहूंगी। मरीजों की सेवा करना ही मकसद है। 
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International Women's Day: Agra women achieve success with hard work and strong will power
महिला दिवस: क्रिकेटर दीप्ति शर्मा की मां सुशीला शर्मा - फोटो : अमर उजाला
उन्हीं लोगों ने दी बधाई, जो देते थे नसीहत
सुशीला शर्मा, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर दीप्ति शर्मा की मां

संघर्ष:
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सदस्य दीप्ति शर्मा का टीम इंडिया तक का सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा। मां सुशीला शर्मा के संबल से यह संभव हुआ। माध्यमिक विद्यालय में शिक्षिका रहीं सुशीला शर्मा ने बताया कि करियर के शुरुआती दौर में लोग लड़की के घर से बाहर जाने पर ताने कसते, दीप्ति निराश हो जाती। ऐसे में बेटी के साथ खड़ी रही। ताने सुने लेकिन उसे नहीं टोका। हर मां यही करती। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने के बाद मेरे पास ऐसे कई लोगों के बधाई संदेश आए, जो शुरुआती दौर में दीप्ती को नहीं खेलने देने की सलाह देते थे। 

संकल्प: अपनी बच्ची का उदाहरण देकर लोगों को समझाती हूं कि बेटियों को रोको नहीं। वह किसी मायने में कम नहीं हैं।
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International Women's Day: Agra women achieve success with hard work and strong will power
कुली मुंद्रा देवी - फोटो : अमर उजाला
दूसरों का बोझा उठाकर बच्चों को पढ़ा रहीं
मुंद्रा देवी, कुली, आगरा कैंट रेलवे स्टेशन

संघर्ष:
आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर 12 साल के लंबे संघर्ष के बाद कुली नंबर 21 मुंद्रा देवी सबकी चहेती हैं। बोझ उठाने में वह किसी पुरुष कुली से कमतर नहीं हैं। वह आगरा रेल मंडल की पहली महिला कुली भी हैं। किरावली के गांव विद्यापुर की रहने वाली मुंद्रा देवी ने बच्चों की पढ़ाई के लिए यह काम शुरू किया। वर्ष 2008 में कुली की भर्ती के लिए आवेदन कर दिया। नंबर मिला 21, कुली की वर्दी पहनकर आगरा कैंट स्टेशन पहुंची तो साथियों ने मजाक उड़ाया। परवाह किए बिना अपना काम करती रहीं। दो बेटों और एक बेटी को शहर में पढ़ा रही हूं। 

संकल्प: मैं पढ़ी-लिखी नहीं हूं। जीवन ने शिक्षा का महत्व समझा दिया है। बच्चों को पढ़ने को प्रेरित करती हूं। उनको पढ़ाने में कोई कमी नहीं होने दूंगी। 

 
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