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आगरा शू टेक: जूता निर्यातकों के सामने बड़ी चुनौती, 1200 रुपये का जूता, भाड़ा 600 रुपये

Thu, 07 Apr 2022 10:34 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Thu, 07 Apr 2022 10:34 AM IST
सार

कोरोना संक्रमण के दो साल बाद घरेलू जूता उद्यमियों को नई तकनीक और डिजायन का संगम एक मंच पर मिला। पहले दिन 2700 से ज्यादा विजिटर शू टेक में पहुंचे, जिन्होंने 150 करोड़ रुपये से ज्यादा के कारोबारी सौदों को तैयार किया।

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Two-day Footwear Component Fair Shoe Tech launched in Agra
फुटवियर कंपोनेंट फेयर शू टेक - फोटो : अमर उजाला
कोरोना काल में फुटवियर निर्यात में आई कमी से परेशान रहे जूता निर्यातकों के सामने एक और बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है। आगरा से दुनिया के बाजारों में निर्यात होने वाले जूते की औसतन कीमत 1200 रुपये है, लेकिन हवाई मार्ग से हर डिब्बे का भाड़ा 600 रुपये लिया जा रहा है। समुद्री रास्ते से जूते के ऑर्डर भेजने पर एक साल में 6 गुना भाड़ा बढ़ा है।  आगरा फुटवियर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स चैंबर के अध्यक्ष पूरन डावर के मुताबिक शिपिंग का पहले जो भाड़ा एक हजार डॉलर प्रति कंटेनर था, वह अब 6 हजार डॉलर तक पहुंच गया है। इससे आगरा के जूते की लागत बढ़ रही है। भाड़ा कम होना चाहिए। एफमेक संयोजक कैप्टन एएस राणा का कहना है कि माल भेजने के लिए समुद्री रास्ते की सभी शिपिंग कंपनियां विदेशी हैं। वह मनमाने रेट पर माल भेज रही हैं। हमारी अपनी शिपिंग लाइन हो या केंद्र सरकार माल भाड़े पर उद्यमियों को सब्सिडी दे, तभी प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। चंद माह में ही भाड़ा 6 गुना हो गया। लागत बढ़ रही है। कच्चे माल की कीमतों के कारण पहले ही परेशानी थी। 
Two-day Footwear Component Fair Shoe Tech launched in Agra
फुटवियर कंपोनेंट फेयर शू टेक - फोटो : अमर उजाला
बंदरगाहों तक माल भेजने के बाद अमेरिका, यूरोप के बाजारों में आगरा का जूता समुद्री रास्ते से पहुंचता है। इसमें कई माह की यात्रा के बाद माल इन देशों में पहुंचता है। नमी के कारण जूतों में फफूंदी की समस्या आम है, जो निर्यातकों को नुकसान पहुंचाती है। शू टेक में फफूंदी से बचाने वाले उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। जापानी कंपनी ने शू टेक में लगाई स्टॉल पर इन्हें प्रदर्शित किया। कंटेनर को केमिकल से सील करने के बाद नमी पाते ही यह केमिकल रंग बदलने लगते हैं। तकनीक से जुड़े ऐसे ही कई स्टॉल पर घरेलू जूता कारोबारी और निर्यातक जानकारी लेते हुए नजर आए। 
Two-day Footwear Component Fair Shoe Tech launched in Agra
फुटवियर कंपोनेंट फेयर शू टेक - फोटो : अमर उजाला
दो दिवसीय फुटवियर कंपोनेंट फेयर शू टेक का आगाज बुधवार को हुआ। कोरोना संक्रमण के दो साल बाद घरेलू जूता उद्यमियों को नई तकनीक और डिजायन का संगम एक मंच पर मिला। पहले दिन 2700 से ज्यादा विजिटर शू टेक में पहुंचे, जिन्होंने 150 करोड़ रुपये से ज्यादा के कारोबारी सौदों को तैयार किया। घरेलू जूता उद्यमियों को इस फेयर में जूते में लगने वाले 32 से ज्यादा कंपोनेंट की नई वैरायटी और डिजाइन मिले। इंडियन फुटवियर कंपोनेंट मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (इफ्कोमा) ने ताजनगरी में हर साल मार्च-अप्रैल में फुटवियर कंपोनेंट फेयर आयोजित करने की घोषणा की है।
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फुटवियर कंपोनेंट फेयर शू टेक - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली रोड स्थित मधु रिसोर्ट पर आयोजित शू टेक फेयर का उद्घाटन काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स (सीएलई) के चेयरमैन संजय लीखा ने इफ्कोमा अध्यक्ष संजय गुप्ता, मोतीलाल सेठी और एफएएफएम के अध्यक्ष कुलदीप सिंह कोहली के साथ संयुक्त रूप से किया। जूता उद्योग को कोरोना काल के बाद नई तरह से तैयार करने और तकनीक, डिजाइन के बल पर आगे बढ़ने को प्रेरित किया गया। फुटवियर उद्योग में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले उद्यमियों को सम्मानित किया गया। इफ्कोमा अध्यक्ष संजय गुप्ता ने जूता उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए कपड़ा मंत्रालय की तर्ज पर अलग मंत्रालय बनाने की मांग की। इस फेयर के जरिये घरेलू जूता कारोबारियों को उनके 6 माह के कारोबार की नींव तैयार हुई।
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फुटवियर कंपोनेंट फेयर शू टेक - फोटो : अमर उजाला
चीन के वर्तमान बाजार के हालातों में भारत के पास खुद को आगे लाने का एक अच्छा अवसर है। फुटवियर कंपोनेंट सेक्टर की इसमें बड़ी भूमिका रहेगी। सीएलई के चेयरमैन संजय लीखा ने उद्यमियों को 20 फीसदी वृद्धि का लक्ष्य दिया। उन्होंने कहा कि कोरोना के चलते भारत का जूता निर्यात 35 प्रतिशत कम हुआ है। इसे अब बढ़ाना है। ताज की तरह आगरा के जूते को दुनिया के नक्शे पर चमकाना है।
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