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UP: बुर्ज खलीफा से गहरी नींव, ऊंचाई इतनी कि 80 Km दूर स्थित दिखता है ताज; चंद्रोदय मंदिर के चौंकाने वाले तथ्य
भूपेन्द्र कुमार, संपादक, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sat, 02 May 2026 08:42 PM IST
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सार
वृंदावन का 213 मीटर ऊंचा चंद्रोदय मंदिर बनकर तैयार हो चुका है, जिसे 700 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। अखिलेश यादव द्वारा रखी गई नींव के बाद अब इसके लोकार्पण को लेकर पीएम मोदी के आने की संभावनाएं तेज हो गई हैं।
चंद्रोदय मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
यह ऐसा भव्य मंदिर होगा जिसकी कोई मिसाल नहीं है। भव्यता और भक्ति का अनोखा मेल अगर आपको देखना है तो वृंदावन के चंद्रोदय मंदिर चले आइए। पूरा मंदिर बनकर तैयार हो चुका है और भगवान कृष्ण की आराधना भी शुरू हो चुकी है। इंटरनेशनल सोसाइटी फार कृष्णा कान्शियसनेस (इस्कान) बंगलूरू के तहत इसे बनाया जा रहा है। इस पर लगभग 700 करोड़ रुपये की लागत आई है। आइये जानते है दुनिया के सबसे अनोखे मंदिर के बारे में कुछ रोचक बातें।
प्राचीन नागर शैली में बन रहा यह मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचा धार्मिक स्थल है। इस मंदिर की ऊंचाई 213 मीटर की है। यानी कुतुब मीनार से तीन गुना ज्यादा। दुनिया की सबसे ऊंची इमारत दुबई के बुर्ज खलीफा की नींव 50 मीटर गहरी है तो इसकी 55 मीटर है। 26 एकड़ में फैले परिसर में 12 जंगल होंगे। यहां झरने, कृत्रिम पहाड़ियां, फूल, फलों के बाग भी होंगे।
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प्राचीन नागर शैली में बन रहा यह मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचा धार्मिक स्थल है। इस मंदिर की ऊंचाई 213 मीटर की है। यानी कुतुब मीनार से तीन गुना ज्यादा। दुनिया की सबसे ऊंची इमारत दुबई के बुर्ज खलीफा की नींव 50 मीटर गहरी है तो इसकी 55 मीटर है। 26 एकड़ में फैले परिसर में 12 जंगल होंगे। यहां झरने, कृत्रिम पहाड़ियां, फूल, फलों के बाग भी होंगे।
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इसका सारा स्वरूप कृष्ण कालीन रखा गया है। मंदिर में सभी आधुनिक व्यवस्थाएं होंगी एक कैप्सूल एलिवेटर होगा जो आगंतुकों को सेकंडों में टाप फ्लोर पर ले जाएगा। जहां से टेलीस्कोप से ब्रजमंडल का विहंगम दृश्य देखा जा सकेगा। यहां से ताजमहल भी देखा जा सकेगा जो लगभग 80 किलोमीटर दूर है। परिसर में स्काईवाक, हेरीटेज म्यूजियम, बोटिंग जोन, बच्चों के लिए फन जोन भी होंगे। मंदिर की बुनियाद 511 स्तंभों पर टिकी होगी। इसमें एक का आकार दिल्ली मेट्रो के लिए डाले गए पिलर से तीन गुना ज्यादा है।
वृंदावन-छटीकरा मार्ग स्थित अक्षय पात्र परिसर में आठ मार्च 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंदिर का शिलान्यास किया था। तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने 16 नवंबर 2014 को आधारशिला रखी थी। इस्कॉन बंगलुरू द्वारा करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से इसका निर्माण कराया जा रहा है। करीब 12 साल में 70 मंजिला मंदिर बनकर लगभग तैयार हो चुका है। इधर, पीएम मोदी के आने की संभावना को लेकर मंदिर में व्यापक तैयारियां तेज हो गई हैं।
आखिर इस अनोखे मंदिर को बनाने का विचार आया कैसे। श्रील प्रभुपाद ने मुंबई में दिए संबोधन में कहा था कि भगवान कृष्ण की आराधना के लिए वृंदावन में गगनचुंबी मंदिर बनाना भी उनके विचारों को आगे ले जाने का माध्यम है। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर को कृष्णकालीन रूप में ही तैयार किया जा रहा है। मंदिर का स्वरूप भगवान कृष्ण द्वारा भगवदगीता में दिए गए संदेशों पर आधारित है।
इस विशाल संरचना के चार छोरों पर चार मंदिर होंगे। ये कृष्ण-बलराम, राधा कृष्ण, चैतन्य महाप्रभु और इस्कान के संस्थापक स्वामी प्रभुपाद को समर्पित होंगे। 2004 में इस्कान बंगलूरू के अध्यक्ष मधु पंडित दास ने घोषणा की थी कि वृंदावन में बंगलूरू के मंदिर से ज्यादा भव्य और बड़ा आराधना स्थल बनाया जाएगा।
इस मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही लगने लगता है कि उनकी कल्पना साकार हो रही है। मंदिर का एक ही तल बना है और वहां राधा-कृष्ण तथा अन्य संतों की प्रतिमाएं हैं। यहां का अलौकिक परिवेश मन मोह लेता है। जान स्ट्रैटन हाली की किताब कृष्ण की लीलाभूमि में इस्कान के एक पदाधिकारी के हवाले से कहा गया कि महान, प्रतिष्ठित इमारतें लोगों को आकर्षित करती हैं।
कृष्ण का संदेश लोगों तक पहुंचाने का यह एक माध्यम है। आने वाले समय में इसका स्थान भारत के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में होगा। स्थानीय लोगों में एक बहस प्रदर्शन और दर्शन को लेकर जरूर है। या जैसा वाल्टर बेंजामिन ने कहा पूजा भाव या कौतुक भाव। इस पर भले ही बहस की जा सकती है पर थीम पार्क में बकासुर (कृष्ण का मारने का प्रयास बगुले के रूप में करने वाला राक्षस) और तृणावर्त (दुष्ट बवंडर वाला राक्षस) की विशायकाय प्रतिमा के पास से छोटी कार में गुजरना रोचक अनुभव तो होगा ही।
थीम पार्क में 4 डी और 5 डी तकनीक होगी। यानी कालियामर्दन की लीला भक्तों को ऐसी लगेगी जैसे यमुना में उनके सामने हो रही हो। शायद यही तो है ब्रज में कृष्ण की लीलाओं का वो अनुभव जो वृंदावन में आने वाले हर भक्त को किसी न किसी रूप में जरूर मिलता है।
