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महिला को जिंदा जलाने का मामला: सामने आई पुलिस की बड़ी लापरवाही, पंचों पर भी होगी कार्रवाई
Wed, 14 Oct 2020 12:02 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Wed, 14 Oct 2020 12:02 AM IST
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मृतका संगीता का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा के थाना ताजगंज क्षेत्र में पंचायत के बाद जिंदा जली संगीता की मौत के मामले में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। पूर्व फौजी अनिल और उनकी पत्नी संगीता पर एससी-एसटी एक्ट का मुकदमा दर्ज होने पर पुलिस चार दिन तक मौका मुआयना करने नहीं गई। बगैर जांच पड़ताल के लिए ही दंपती को चौकी पर बुला लिया गया। 10 घंटे बैठाकर रखा गया। इसके बाद छोड़ दिया गया। इससे पूर्व पंचायत में अनिल और संगीता से माफी मंगवाई गई। उन्हें अपमानित किया गया। पुलिस पंचायत में शामिल लोगों का पता लगाने में जुटी है।
आरोपी दंपती भरत खरे और सुनीता
- फोटो : अमर उजाला
ताजगंज की पुष्पांजलि ईको सिटी कॉलोनी निवासी सेवानिवृत्त फौजी अनिल कुमार रजावत की पत्नी संगीता (37) की जलकर मौत हो गई थी। 11 अक्तूबर को बच्चों के झगड़े को लेकर हुई पंचायत के बाद यह घटना हुई। इस मामले में कॉलोनी भरत खरे और उसकी पत्नी सुनीता खरे को जेल भेज दिया गया। पुलिस ने इन दोनों सहित चार नामजद और 10-12 अज्ञात पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया है।
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घटनास्थल पर जांच करते एसपी सिटी
- फोटो : अमर उजाला
भरत खरे ने अनिल और संगीता पर एससी एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया था। पुलिस ने बिना जांच के बाद ही दंपती को थाने बुला लिया था। पुलिस ने कॉलोनी के लोगों के बयान तक दर्ज नहीं किए, जिससे घटना की सच्चाई सामने आ सकती थी। इस लापरवाही पर एडीजी जोन अजय आनंद ने ताजगंज थाना के निरीक्षक और सदर के सीओ से स्पष्टीकरण मांगा है। उनसे यह भी सवाल किया है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद पहले दिन क्या जांच की गई।
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सेवानिवृत्त फौजी अनिल कुमार और उनकी पत्नी संगीता का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
पूर्व फौजी अनिल कुमार रजावत की पत्नी संगीता की मौत के दो दिन बाद मंगलवार तक पुलिस ने मौका-ए-वारदात से सुबूतों को कब्जे में नहीं लिया। अनिल के घर के ठीक सामने संगीता के बाल पड़े हुए। उसे जब बचाने की कोशिश की गई, तब ये बाल गिर गए थे। वह घर के पास पड़े रेत पर गिरी थी। इस रेत पर रखी पन्नी भी जगह-जगह से जल गई, पुलिस ने इसे भी कब्जे में नहीं लिया है।
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घटनास्थल पर जांच करती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने क्राइम सीन को संरक्षित नहीं किया है। इसके लिए पीले रंग की टेप लगाई जाती है, जो नहीं लगाई गई। घर के गेट पर ही संगीता की चप्पलें पड़ी हैं। कॉलोनी के लोगों ने बताया कि पुलिस मौका मुआयना करने आई थी लेकिन अनिल संगीता को उपचार के लिए लेकर दिल्ली जा चुके थे। इसकी जानकारी होने पर पुलिस चली गई। घटनास्थल से कोई भी सामान कब्जे में नहीं लिया। फील्ड यूनिट को जांच के लिए भेजा ही नहीं गया।