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Nirjala Ekadashi Vrat: वाराणसी से हरिद्वार तक उमड़े श्रद्धालु, धर्मनगरीयों में दिखा उत्साह और भक्ति का संगम

नोएडा डेस्क, अमर उजाला Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Thu, 25 Jun 2026 01:15 PM IST
सार

Nirjala Ekadashi Vrat: निर्जला एकादशी पर वाराणसी, हरिद्वार और मथुरा में श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिला। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों और घाटों पर पहुंचे। पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान और शोभायात्राओं के बीच पवित्र नगरीयों में आस्था और उत्साह का अनूठा संगम नजर आया।
 

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atmosphere of faith and devotion from Varanasi to Haridwar on occasion of Nirjala Ekadashi Vrat 2026
निर्जला एकादशी पर मंदिरों और घाटों पर दिखी आस्था - फोटो : PTI
Nirjala Ekadashi Vrat: निर्जला एकादशी के अवसर पर वाराणसी, हरिद्वार और मथुरा में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत माहौल देखने को मिला। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों और पवित्र घाटों पर पहुंचने लगे। श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर व्रत रखा और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान विभिन्न स्थानों पर धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और शोभायात्राओं का आयोजन किया गया। पवित्र नगरीयों के मंदिरों और घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने आस्था और उत्सव का अनूठा संगम प्रस्तुत किया।

 
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हरिद्वार में आस्था का सैलाब - फोटो : PTI

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी आज श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जा रही है। महिलाएं अखंड सौभाग्य, परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना के लिए बिना जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की आराधना कर रही हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत वर्ष की सभी 24 एकादशियों के बराबर पुण्य फल प्रदान करने वाला माना जाता है।

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धर्मनगरीयों में दिखा उत्साह - फोटो : PTI

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, शास्त्रों में निर्जला एकादशी को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। मान्यता है कि यदि कोई श्रद्धालु इस दिन बिना जल ग्रहण किए साधना और उपवास करता है तो उसे पूरे वर्ष की समस्त एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। 

महिलाएं अपने परिवार की खुशहाली और अखंड सौभाग्य के लिए यह कठिन व्रत रखती हैं। इस व्रत में सूर्योदय से अगले दिन के सूर्योदय तक लगभग 24 घंटे जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं या डायबिटीज से पीड़ित लोगों को निर्जल व्रत न रखने की सलाह दी जाती है।

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मंदिरों और घाटों पर उमड़ी भक्तों की भीड़ - फोटो : PTI

इस वर्ष निर्जला एकादशी विशेष शुभ संयोग में पड़ रही है। एकादशी तिथि 24 जून की शाम 6:12 बजे प्रारंभ हुई और 25 जून की रात 8:09 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार 25 जून को निर्जला एकादशी महाव्रत रखा जा रहा है।

निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी और पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी एकादशियों के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। माना जाता है कि यह व्रत जीवन में सुख-समृद्धि, सफलता, भाग्य वृद्धि और सकारात्मक बदलाव लेकर आता है।

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दिखा उत्साह और भक्ति का संगम - फोटो : PTI

शास्त्रों में इसे सबसे कठिन व्रतों में से एक माना गया है, क्योंकि इसमें पूरे दिन अन्न और जल दोनों का त्याग किया जाता है। इसे आत्मसंयम, श्रद्धा और तपस्या की परीक्षा के रूप में देखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से यह व्रत करता है, उस पर भगवान श्रीहरि विष्णु की विशेष कृपा बनी रहती है और जीवन के कष्ट दूर होने लगते हैं।

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