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पंचायत चुनाव: साठ साल बाद यूपी के इस जिले में पहली बार होगी महिला की सरकार
Wed, 07 Apr 2021 08:34 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 07 Apr 2021 08:34 AM IST
सार
- आजादी के बाद सीट सामान्य महिला की होने से खुशी
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आशा तिवारी और मिथलेश शुक्ला
- फोटो : अमर उजाला
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जालौन जिले के ग्राम पंचायत आटा में पिछले छह दशक से अभी तक कोई भी महिला प्रधान नहीं बनी है। इस बार पंचायत चुनाव में प्रधान की सीट सामान्य महिला के लिए आरक्षित की गई है। इससे महिलाओं में खुशी की लहर है। वहीं ग्रामीणों में भी किसी महिला के हाथों में गांव के विकास की बागडोर देखने का उत्साह है।
आटा में पंचायत भवन
- फोटो : अमर उजाला
1969 में पहली बार बैलेट पेपर व्यवस्था लागू हुई, जिसमें प्रधान पद पर रामप्रसाद अहिरवार विजयी हुए। कार्यकाल के बाद एक बार सीट फिर बदली और अनारक्षित हुई, तो ग्रामीणों को लगा था कि अब कोई महिला दावेदार होगी, लेकिन किसी भी महिला प्रत्याशी के मैदान में न आने से शिवनारायण पांडे ग्राम प्रधान निर्वाचित हुए।
खराब पड़ा नल
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद क्रमश: डालचंद्र अहिरवार, दयाराम वर्मा, रामौतार अहिरवार, फिर श्यामनाथ तिवारी, लालसिंह कुशवाहा के बाद निवर्तमान प्रधान सत्यनारायण वर्मा निर्वाचित हुए। अबतक यह सीट न तो महिला प्रत्याशियों के लिए आरक्षित हुई और न ही अनारक्षित के समय किसी महिला ने दावेदारी की। यह पहली बार है जब इस सीट को सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित किया गया है। जिससे गांव की आधी आबादी उत्साह में है।
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जिले में समस्याओं का है अंबार
- फोटो : अमर उजाला
आंकड़ों में यह है पंचायत
ग्राम पंचायत आटा में वर्तमान मतदाता सूची के अनुसार कुल 5204 मतदाता हैं। जिसमें 40 प्रतिशत के करीब 2000 महिला व 3204 पुरुष मतदाता हैं। जिसमें 42 प्रतिशत हरिजन मतदाता हैं 2100 व 40 प्रतिशत पिछड़ी जाति 2000 मतदाता एवं 17 प्रतिशत सामान्य मतदाता 750 व 500 अनुसूचित जनजाति के मतदाता हैं।
ग्राम पंचायत आटा में वर्तमान मतदाता सूची के अनुसार कुल 5204 मतदाता हैं। जिसमें 40 प्रतिशत के करीब 2000 महिला व 3204 पुरुष मतदाता हैं। जिसमें 42 प्रतिशत हरिजन मतदाता हैं 2100 व 40 प्रतिशत पिछड़ी जाति 2000 मतदाता एवं 17 प्रतिशत सामान्य मतदाता 750 व 500 अनुसूचित जनजाति के मतदाता हैं।
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जिले में समस्याओं का है अंबार
- फोटो : अमर उजाला
क्या कहती हैं महिलाएं
भागीदारी के लिए करना पड़ा 60 साल तक इंतजार
आटा निवासी महिला आशा तिवारी का कहना है कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी की बात सभी करते हैं, लेकिन तब बात धरातल पर कुछ देने की आती है, तो महिलाओं को 60 साल तक का इंतजार करना पड़ता है।
अब मिलेगा नेतृत्व होगा विकास
आटा निवासी महिला मिथलेश शुक्ला का कहना है कि गांव की महिलाओं को नेतृत्व न मिलने से गांव की महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक उत्थान पर ध्यान नहीं दिया गया। अब जब महिला प्रधान बनेंगी तो महिलाओं को प्राथमिकता मिलेगी।
भागीदारी के लिए करना पड़ा 60 साल तक इंतजार
आटा निवासी महिला आशा तिवारी का कहना है कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी की बात सभी करते हैं, लेकिन तब बात धरातल पर कुछ देने की आती है, तो महिलाओं को 60 साल तक का इंतजार करना पड़ता है।
अब मिलेगा नेतृत्व होगा विकास
आटा निवासी महिला मिथलेश शुक्ला का कहना है कि गांव की महिलाओं को नेतृत्व न मिलने से गांव की महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक उत्थान पर ध्यान नहीं दिया गया। अब जब महिला प्रधान बनेंगी तो महिलाओं को प्राथमिकता मिलेगी।