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Jhansi Medical College Fire: एक बेड पर भर्ती थे तीन से चार बच्चे...होते जरूरी इंतजाम तो बच जाती मासूमों की जान
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 16 Nov 2024 04:16 PM IST
सार
एसएनसीयू में लगी आग की वजह से 10 बच्चों की मौत के लिए काफी हद तक मेडिकल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही सामने आ रही है। जानकार बताते हैं कि एक-एक बेड पर तीन से चार बच्चे भर्ती थे।
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Jhansi Medical College Fire
- फोटो : अमर उजाला
झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में आग से बचाव के इंतजामों की पोल खुल गई। यहां अगर बचाव के जरूरी इंतजाम होते तब दस मासूमों की जान बचाई जा सकती थी। परिजन ने बताया कि आग लगने के बाद वार्ड में लगा फायर सेफ्टी अलार्ट नहीं बजा। इस वजह से बचाव कार्य समय पर आरंभ नहीं हो सका। जब मरीज बाहर की ओर भागे तब जाकर आग लगने की बात मालूम चल सकी। आग लगने के कुछ देर बाद बिजली काट दी गई। पूरा इलाका अंधेरे में डूब गया। अंधेरे के बीच किसी तरह बचाव कार्य चला।
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Jhansi Medical College Fire
- फोटो : अमर उजाला
चारों ओर धुआं फैल गया। सूचना मिलने पर दमकल की गाड़ियां पहुंचनी आरंभ हुई तब जाकर आग बुझाने का काम आरंभ हो सका। मेडिकल कॉलेज में आग बुझाने का कोई इंतजाम नहीं था।
एक बेड पर तीन से चार बच्चे भर्ती थे
एसएनसीयू में लगी आग की वजह से 10 बच्चों की मौत के लिए काफी हद तक मेडिकल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही सामने आ रही है। जानकार बताते हैं कि एक-एक बेड पर तीन से चार बच्चे भर्ती थे जिसकी वजह से ऑक्सीजन कंसट्रेटर पर गर्म हो गया।
एक बेड पर तीन से चार बच्चे भर्ती थे
एसएनसीयू में लगी आग की वजह से 10 बच्चों की मौत के लिए काफी हद तक मेडिकल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही सामने आ रही है। जानकार बताते हैं कि एक-एक बेड पर तीन से चार बच्चे भर्ती थे जिसकी वजह से ऑक्सीजन कंसट्रेटर पर गर्म हो गया।
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Jhansi Medical College Fire
- फोटो : अमर उजाला
फॉग से काबू की आग
दमकल विभाग की टीम ने हादसे की गंभीरता को देख मौके पर पहुंचते ही खिड़कियां आदि तोड़कर फॉग का छिड़काव शुरू कर दिया। जिसकी वजह से आग बाहर बने कक्ष की तरफ नहीं बढ़ सकी अन्यथा गंभीर हादसा होता।
आग लगी... पर नहीं बजा अलार्म
नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष में आग से बचाव के लिए सेफ्टी अलार्म लगाए गए थे लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है आग लगने पर सेफ्टी अलार्म नहीं बजा। धुआं फैलने के बाद चारों ओर चीख-पुकार मच गई। अगर सेफ्टी अलार्म समय पर बजता तब बचाव कार्य जल्द शुरू हो सकते थे।
दमकल विभाग की टीम ने हादसे की गंभीरता को देख मौके पर पहुंचते ही खिड़कियां आदि तोड़कर फॉग का छिड़काव शुरू कर दिया। जिसकी वजह से आग बाहर बने कक्ष की तरफ नहीं बढ़ सकी अन्यथा गंभीर हादसा होता।
आग लगी... पर नहीं बजा अलार्म
नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष में आग से बचाव के लिए सेफ्टी अलार्म लगाए गए थे लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है आग लगने पर सेफ्टी अलार्म नहीं बजा। धुआं फैलने के बाद चारों ओर चीख-पुकार मच गई। अगर सेफ्टी अलार्म समय पर बजता तब बचाव कार्य जल्द शुरू हो सकते थे।
Jhansi Medical College Fire
- फोटो : अमर उजाला
नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष में लगी आग चंद मिनट में फैलकर दरवाजे तक पहुंच गई। इस वजह से भीतर जाने का रास्ता नहीं मिल रहा था। दमकलकर्मियों ने पीछे के रास्ते अंदर जाने की कोशिश की लेकिन, कामयाब नहीं हुए। इसके बाद वार्ड की खिड़की के कांच तोड़कर किसी तरह दमकलकर्मी अंदर पहुंचे।
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- फोटो : अमर उजाला
आग लगने के आधे घंटे बाद शुरू हुआ बचाव कार्य
अंदर आग की लपटों के साथ धुआं भरा था। आग लगने के करीब आधे घंटे बाद बचाव कार्य शुरू हो सका। इसके बाद दमकलकर्मियों ने नवजातों को बाहर निकालना शुरू किया। ग्राउंड फ्लोर होने से नवजात बाहर निकाले जा सके। अगर हादसा दूसरी मंजिल पर होता, तब बचाव कार्य में और मुश्किल होती। एसएनसीयू वार्ड की दो यूनिट है। एक यूनिट अंदर और दूसरी बाहर की तरफ है। सबसे पहले जो नवजात बाहर की ओर थे, उनको बाहर निकाला गया। अंदर की तरफ जो बच्चे थे, वो काफी झुलस गए। यहां भर्ती बच्चों को बचाया नहीं जा सका।
अंदर आग की लपटों के साथ धुआं भरा था। आग लगने के करीब आधे घंटे बाद बचाव कार्य शुरू हो सका। इसके बाद दमकलकर्मियों ने नवजातों को बाहर निकालना शुरू किया। ग्राउंड फ्लोर होने से नवजात बाहर निकाले जा सके। अगर हादसा दूसरी मंजिल पर होता, तब बचाव कार्य में और मुश्किल होती। एसएनसीयू वार्ड की दो यूनिट है। एक यूनिट अंदर और दूसरी बाहर की तरफ है। सबसे पहले जो नवजात बाहर की ओर थे, उनको बाहर निकाला गया। अंदर की तरफ जो बच्चे थे, वो काफी झुलस गए। यहां भर्ती बच्चों को बचाया नहीं जा सका।