फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

हवा हुई हानिकारक, अक्तूबर-फरवरी तक इन राज्यों के लोग बचाएं अपने फेफड़े, शोध में खुलासा

Sat, 22 Sep 2018 02:22 PM IST
हिमांशु मिश्रा, अमर उजाला, कानपुर
हिमांशु मिश्रा, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 22 Sep 2018 02:22 PM IST
सार

- वैज्ञानिकों ने की जून 2015 से मई 2016 तक .3 से लेकर 10 माइक्रॉन तक के पार्टिकल की सैंपलिंग
 

विज्ञापन
Air harmful save the lungs from October to February
डेमो पिक
अक्तूबर से फरवरी तक की हवा सांस लेने लायक भी नहीं होती है। इन पांच महीनों की हवा में प्रदूषण के सबसे छोटे कण यानी पीएम 2.5 की मात्रा काफी अधिक होती है। ये कण सीधे इंसान की सांस की नलियों से होते हुए फेफड़े और रक्त प्लाज्मा तक पहुंचते हैं और उस पर बुरा प्रभाव डालते हैं। आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों द्वारा हाल में किए गए शोध में यह बात सामने आई है।

 
Air harmful save the lungs from October to February
डेमो पिक
शोध को इंस्टीट्यूट के डिपार्टमेंट ऑफ सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर डॉ. तरुण गुप्ता की अगुवाई में छात्र डॉ. प्रशांत राजपूत और सैफी इजहार ने पूरा किया है। डॉ. प्रशांत ने बताया कि शोध के लिए उन्होंने जून 2015 से मई 2016 तक दशमलव 3 से लेकर 10 माइक्रॉन तक के पार्टिकल की सैंपलिंग की। इसके बाद करीब एक साल तक विभिन्न स्तर पर इसका परीक्षण किया गया और बाद में यह रिपोर्ट सामने आई। इसे हाल ही एटमॉसफियरिक पॉल्यूशन रिसर्च नामक अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित किया गया है। डॉ. प्रशांत के मुताबिक मार्च से सितंबर तक के बीच में 2.5 पीएम से लेकर 10 पीएम तक के पार्टिकल हवा में अधिक हो जाते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि इस बीच धूप तेज होती है और हवा में मिट्टी घुली रहती है। इससे कण मोटे होते हैं, जो सीधे फेफड़े तक नहीं पहुंच पाते।
 
Air harmful save the lungs from October to February
डेमो पिक
हर साल सांस की बीमारी से मरते हैं पांच लाख लोग 
ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज रिसर्च प्रोग्राम के आंकड़ों को पेश करते हुए डॉ. प्रशांत ने बताया कि भारत में हर साल 10 लाख लोग बीमारियों से मरते हैं। इसमें अकेले पांच लाख लोग ऐसे होते हैं, जो सांस की दिक्कत या इससे होने वाली बीमारी के चलते मरते हैं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन
Air harmful save the lungs from October to February
डेमो पिक
इन प्रदेशों पर सबसे ज्यादा असर
उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तराखंड, झारखंड।
 
विज्ञापन
Air harmful save the lungs from October to February
डेमो पिक
क्या है पीएम 2.5
पीएम प्रदूषण के कण के बारे में बताता है, जबकि 2.5 या 10 कण के आकार के बारे में जानकारी देता है। पीएम 2.5 सबसे छोटे वायु कणों में से एक होते हैं, जो आसानी से हमारे सांस की नली से होते हुए फेफड़ों और गुर्दों के बीच पहुंच जाते हैं। इसके चलते पहले खांसी, जुकाम आदि की समस्याएं शुरू होती हैं, जो बाद में अस्थमा, लंग कैंसर और दिल की बीमारी में तब्दील हो जाती है।
 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed