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Banda Boat Accident: बचाओ-बचाओ की चीखें, तेज बहाव में बहते लोग, प्रत्यक्षदर्शियों ने कुछ ऐसे बयां की घटना

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sat, 13 Aug 2022 12:09 AM IST
Banda Boat Accident
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बांदा जिले में यमुना नदी में नाव पलटने के बाद बड़ा खौफनाक मंजर नजर आया। ‘बचाओ-बचाओ’ की चीखों के अलावा कुछ सुनाई नहीं दे रहा था। 20-25 लोग तेज बहाव में बहते चले जा रहे थे। इनमें 5-6 ऐसी महिलाएं भी थीं, जो अपने दुधमुंहे बच्चे को गोद में समेटे बहते हुए जिंदगी की गुहार लगाती रहीं। लेकिन कोई कुछ नहीं कर सका। नदी से सुरक्षित निकले प्रत्यक्षदर्शियों ने बयां की घटना।

यह दर्दनाक मंजर बचकर निकले लोगों ने बयां किया। मर्का गांव निवासी दुर्गेश ने बताया कि पतवार टूटने से घटना हुई। उसके साथ भांजा रामप्रतीत भी नदी की जलधारा में बहने लगा। उसने तैरकर अपने भांजे को कपड़ों के सहारे पकड़ा और सुरक्षित किनारे ले आया। लेकिन उनकी आंखों के सामने और लोग भी बह रहे थे, लेकिन विवश होकर सिर्फ देखते रहे। लेखपाल मातादीन ने बताया कि उसकी आंखों ने जो देखा वह कभी नहीं भूलेगा।
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नदी की धारा में एक-एक कर बहते लोग समाते चले जा रहे थे। उधर, मर्का गांव के बुजुर्ग रामफल ने बताया कि उसे भी असोथर गांव जाना था। लेकिन नाव में भीड़ देखकर वह नहीं गया। कहा कि नाव में बहुत भीड़ होने पर उसने नाविक को टोका था। भीड़ कम करने के लिए भी कहा, लेकिन नाविक ने नहीं सुना। उसकी यह नादानी बड़े हादसे में बदल गई।
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अफसर गंभीर होते, तो न होता मर्का नाव हादसा
स्कूल जाने के लिए नाव से केन नदी पार करते बच्चों की खबर को प्रशासन ने संज्ञान ले लिया होता तो शायद मर्का में नाव पलटने से इतनी बड़ी जनहानि न होती। पहले ही उफनाती नदियों में नावों से आवागमन पर रोक लग जाना चाहिए थी। अमर उजाला ने 27 जुलाई के अंक में खबर प्रकाशित की थी कि जलस्तर बढ़ा, जान जोखिम में डालकर नाव से स्कूल जा रहे बच्चे। लेकिन प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
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गुरुवार को मर्का की यमुना नदी में नाव पलट गई। तीन की मौत हो गई और कई लोग लापता हैं। घटना के बाद जिला प्रशासन हाथ पैर मार रहा है। आंकड़ों की मानें तो जिले में केन व यमुना, बागै व चंद्रायल नदी के 11 स्थानों पर अभी भी नावों से ग्रामीण व स्कूल जाने वाले बच्चों का आवागमन होता है। यहां पर पुल की कोई व्यवस्था नहीं है। अन्य मार्गों से आने में ग्रामीणों को आठ से 10 किलोमीटर का अतिरिक्त रास्ता तय करना पड़ता है।
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नाव हादसे का पूरा घटनाक्रम
  • गुरुवार को दोपहर करीब 2.30 बजे हुआ नाव हादसा।
  • 4.30 पर आया स्टीमर, शुरू की लापता की तलाश।
  • 4.40 बजे मासूम, महिला सहित तीन के मिले शव।
  • 4.45 बजे पहुंचे जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक।
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