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'शिव तांडव मंदिर' जहां सावन के हर सोमवार 'उमड़ता है भक्तों का सैलाब', अनोखी है ये मूर्ति

Mon, 30 Jul 2018 12:13 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Mon, 30 Jul 2018 12:13 PM IST
सार

- सावन के पहले सोमवार पर विशेष 
- चंदेल शासक नान्नुक ने 11वीं सदी में स्थापित कराई थी प्रतिमा
- मंदिर में माथा टेकने से पूरी होती है मनोकामनाएं

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Indian Ancient Shiva tandav Temple
शिवतांडव मंदिर, डेमो पिक
गोखारगिरि की पावन धरा में स्थापित शिवतांडव मंदिर का विशेष महत्व है। चंदेल शासक नान्नुक ने 11वीं सदी में ऐतिहासिक मदन सागर सरोवर के पश्चिम में गोखारपहाड़ की उत्तर पाद भूमि में ग्रेनाइट शिला पर भगवान भोलेनाथ की महाकाल मुद्रा में तांडव नृत्य करती दस भुजी प्रतिमा का निर्माण कराया था, जो शिव तांडव के नाम से देश विदेश में प्रसिद्ध है। यह मूर्ति उत्तर भारत में अपने किस्म की अनोखी है। विश्व प्रसिद्ध यह मंदिर यूपी के बांदा जिले में है जहां सावन के हर सोमवार को शिवभक्तों का सैलाब उमड़ता है। जानिए ऐतिहासिक गोखार पहाड़ में स्थित इस मंदिर के बारे में विशेष बातें...



 
Indian Ancient Shiva tandav Temple
शिवतांडव मंदिर
ऐतिहासिक गोखार पहाड़ में स्थित शिवतांडव प्रतिमा अपने आप में अनोखी है। गजासुर के वध के उपरांत शिव जी ने जो नृत्य किया, वहीं शिवतांडव के नाम से प्रसिद्ध हुआ था। यह भव्य प्रतिमा एक चट्टान पर उत्कीर्ण की गई है। इसका वर्णन कर्मपुराण में भी मिलता है। इस प्रकार की गजासुर प्रतिमा दक्षिण में ऐलोरा, हेलविका तथा दारापुरम में भी है। शिवतांडव में शिवरात्रि, मकर संक्रांति व सावन मास के सभी सोमवार को भक्तों का भारी सैलाब उमड़ता है। मान्यता है महाकाल की तांडव प्रतिमा में मत्था टेकने से जो मांगों वह मिल जाता है।  
Indian Ancient Shiva tandav Temple
शिवतांडव मंदिर
समाजसेवी शिवकुमार गोस्वामी, दाऊ तिवारी, तारा पाटकार आदि बताते है कि त्रेता युग में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, माता सीता व लक्ष्मण के चरणों से पवित्र हुई आल्हा ऊदल की वीरभूमि महोबा का ऐतिहासिक गोखार पर्वत धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। प्रभु श्रीराम ने अपने वनवास काल के दौरान कुछ पुण्यकाल यहां भी बिताया था।
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Indian Ancient Shiva tandav Temple
शिवतांडव मंदिर
गुरु गोरखनाथ एवं उनके सातवें शिष्य दीपकनाथ के तप ने इस पहाड़ को तेज प्रदान किया। इसी पर्वत के नीचे भगवान शिव की तांडव करती सिद्ध प्रतिमा स्थापित है। दूर दराज से भगवान शिव के दर्शन के लिए भक्त यहां पहुंचते है।
 
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