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अवैध असलहा फैक्ट्री का भंडाफोड़, एक गिरफ्तार, झोपड़ी में बनाए जाते थे हथियार
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 27 Jul 2018 05:26 AM IST
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अवैध असलहा फैक्ट्री मिलने का खुलासा करते एसपी, गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
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यूपी के कन्नौज जिले में स्वाट और कोतवाली पुलिस ने काली नदी और गंगा नदी के बीच कटरी के बाग में अवैध असलहा फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। पुलिस ने मौके से अवैध राइफलें और बंदूक के अलावा तमंचे और उन्हें बनाने के उपकरण बरामद किए है। मौके से एक को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दो अंतर्राज्यीय तस्कर पुलिस को चकमा देकर भाग निकले।
पुलिस हिरासत में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
नाव के जरिए होती तस्करी
जिले में मिनी चंबल के नाम से मशहूर गंगा और काली नदी का कटरी का इलाका करीब 35 किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। कभी बदमाशों की शरणस्थली रही कटरी में आज भी अपराध कायम है। यहां के कई गांवों में बड़े पैमाने पर असलहे बनाने और इनकी खरीद-फरोख्त का धंधा चलता है। गिरफ्त में आए श्रीपाल ने बताया कि कई जिलों में उसके डीलर हैं। अधिकांश डीलर हरदोई के रहने वाले हैं। यह लोग सब्जी बेचने और खेतीबाड़ी करने के लिए नावों से गंगा पार आते-जाते है। नावों में ही असलहा रखकर गैर जनपदों तक खेप पहुंचती है।
तीन हजार से 25 हजार तक में बिकते हथियार
कटरी में असलाह बनाने वाले कारीगरों से ज्यादा पैसा असलाह तस्कर कमाते है। असलाह बनाने वाले श्रीपाल ने बताया कि वह सिर्फ बनाता है। तस्कर सगे भाई वीरभान और रतिभान को तीन से लेकर पांच हजार तक में बेचता था। इसके बाद यह लोग गैर जनपदों में इन असलहों को 25 हजार तक में बेचते हैं। पुलिस ने हरदोई पुलिस से संपर्क कर फरार तस्कर सगे भाई वीरभान और रतिभान की तलाश शुरू की है।
जिले में मिनी चंबल के नाम से मशहूर गंगा और काली नदी का कटरी का इलाका करीब 35 किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। कभी बदमाशों की शरणस्थली रही कटरी में आज भी अपराध कायम है। यहां के कई गांवों में बड़े पैमाने पर असलहे बनाने और इनकी खरीद-फरोख्त का धंधा चलता है। गिरफ्त में आए श्रीपाल ने बताया कि कई जिलों में उसके डीलर हैं। अधिकांश डीलर हरदोई के रहने वाले हैं। यह लोग सब्जी बेचने और खेतीबाड़ी करने के लिए नावों से गंगा पार आते-जाते है। नावों में ही असलहा रखकर गैर जनपदों तक खेप पहुंचती है।
तीन हजार से 25 हजार तक में बिकते हथियार
कटरी में असलाह बनाने वाले कारीगरों से ज्यादा पैसा असलाह तस्कर कमाते है। असलाह बनाने वाले श्रीपाल ने बताया कि वह सिर्फ बनाता है। तस्कर सगे भाई वीरभान और रतिभान को तीन से लेकर पांच हजार तक में बेचता था। इसके बाद यह लोग गैर जनपदों में इन असलहों को 25 हजार तक में बेचते हैं। पुलिस ने हरदोई पुलिस से संपर्क कर फरार तस्कर सगे भाई वीरभान और रतिभान की तलाश शुरू की है।