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अवैध असलहा फैक्ट्री का भंडाफोड़, एक गिरफ्तार, झोपड़ी में बनाए जाते थे हथियार

Fri, 27 Jul 2018 05:26 AM IST
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Fri, 27 Jul 2018 05:26 AM IST
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police caught illegal arms factory
अवैध असलहा फैक्ट्री मिलने का खुलासा करते एसपी, गिरफ्त में आरोपी - फोटो : अमर उजाला
यूपी के कन्नौज जिले में स्वाट और कोतवाली पुलिस ने काली नदी और गंगा नदी के बीच कटरी के बाग में अवैध असलहा फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। पुलिस ने मौके से अवैध राइफलें और बंदूक के अलावा तमंचे और उन्हें बनाने के उपकरण बरामद किए है। मौके से एक को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दो अंतर्राज्यीय तस्कर पुलिस को चकमा देकर भाग निकले।


अपने कार्यालय में गुरुवार को मामले का खुलासा करते एसपी किरीट राठोड़ ने बताया कि बुधवार रात करीब 12 बजे सदर कोतवाल एके सिंह, स्वाट टीम प्रभारी पप्पू सिंह ठैनुआ और कुसुमखोर चौकी प्रभारी अमर बहादुर सिंह ने पुलिस बल के साथ गंगा और काली नदी के बीच कटरी में बसे गांव सड़ियापुर की घेराबंदी की। लल्लन मिश्रा के बाग में बनी एक झोपड़ी को चारों ओर से घेर कर पुलिस ने अवैध असलहा बना रहे श्रीपाल उर्फ गुड्डू उर्फ मलिक शर्मा पुत्र राम चरन निवासी जरौली नवादा हरदोई को गिरफ्तार लिया। इस दौरान पुलिस टीम को चकमा देकर अंतर्राज्यीय असलहा तस्कर सगे भाई वीरभान और रतिभान निवासी गोनीपुरवा अरवल हरदोई भाग निकले।

मौके से पुलिस ने दो राइफलें, एक बंदूक, एक बना हुआ और चार अधबने तमंचों के साथ असलहा बनाने के उपकरण और चार कारतूस के खोखे बरामद किए। इनसे असलहों की टेस्टिंग कर बिक्री की जाती थी। पकड़े गया श्रीपाल अवैध असलहा बनाने में माहिर है। उस पर हरदोई जनपद के थानों में आर्म्स एक्ट के तहत 10 मुकदमे दर्ज हैं। फरार हुए अंतर्राज्यीय तस्कर श्रीपाल से असलहा खरीदकर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश समेत पंजाब तक बिक्री करते  हैं। एसपी ने सदर कोतवाली पुलिस और स्वाट टीम को 10-10 हजार रुपये से पुरस्कृत किया है।
police caught illegal arms factory
पुलिस हिरासत में आरोपी - फोटो : अमर उजाला
नाव के जरिए होती तस्करी 
जिले में मिनी चंबल के नाम से मशहूर गंगा और काली नदी का कटरी का इलाका करीब 35 किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। कभी बदमाशों की शरणस्थली रही कटरी में आज भी अपराध कायम है। यहां के कई गांवों में बड़े पैमाने पर असलहे बनाने और इनकी खरीद-फरोख्त का धंधा चलता है। गिरफ्त में आए श्रीपाल ने बताया कि कई जिलों में उसके डीलर हैं। अधिकांश डीलर हरदोई के रहने वाले हैं। यह लोग सब्जी बेचने और खेतीबाड़ी करने के लिए नावों से गंगा पार आते-जाते है। नावों में ही असलहा रखकर गैर जनपदों तक खेप पहुंचती है। 


तीन हजार से 25 हजार तक में बिकते हथियार
कटरी में असलाह बनाने वाले कारीगरों से ज्यादा पैसा असलाह तस्कर कमाते है। असलाह बनाने वाले श्रीपाल ने बताया कि वह सिर्फ बनाता है। तस्कर सगे भाई वीरभान और रतिभान को तीन से लेकर पांच हजार तक में बेचता था। इसके बाद यह लोग गैर जनपदों में इन असलहों को 25 हजार तक में बेचते हैं। पुलिस ने हरदोई पुलिस से संपर्क कर फरार तस्कर सगे भाई वीरभान और रतिभान की तलाश शुरू की है।
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