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धूप में तंदूर सी बसें और भट्ठी जैसा बस अड्डा, प्रचंड गर्मी से बेहाल लोग, देखें तस्वीरें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रशांत कुमार Updated Mon, 03 Jun 2019 03:04 PM IST
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बस अड्डे पर धूप में बसें खड़ी होने से यात्री बेहाल - फोटो : अमर उजाला
कानपुर के झकरकटी बस अड्डे पर टीनशेड न होने की वजह से धूप में ही बसें खड़ी होने से यात्री बेहाल हैं। जब तक बस भर नहीं जाती, ड्राइवर उसे लेकर निकलता नहीं। खुली धूप में बसें तंदूर की तरह तपने लगती हैं। इस बीच बस में बैठे यात्री पसीना-पसीना हो जाते हैं। सीट जाने के डर से यात्री भी बस से नीचे नहीं उतरते। मजबूरन उन्हें गर्मी में उबलना पड़ता है। 


आगे की स्लाइड में- धूप में तंदूर सी बसें और भट्ठी जैसा बस अड्डा
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धूप में बसें खड़ी होने से यात्री बेहाल - फोटो : अमर उजाला
रविवार को भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला। दोपहर सवा तीन बजे झकरकटी के खुले मैदान में आगरा जाने वाली बस में बैठे यात्री गर्मी से बेहाल नजर आए। बस के जाने का समय दोपहर तीन बजे था लेकिन पूरी बस भरने के चक्कर में ड्राइवर और कंडक्टर बस लेकर नहीं निकले। अंदर बैठे यात्री हाथ से पंखा करते नजर आए। भीषण गर्मी में कमोबेश हर नॉन एसी बस का ऐसा ही नजारा दिखा। इकलौते वॉटर कूलर के सामने भी यात्रियों की लंबी लाइन लगी रही। जनरथ बसों से जाने वाले यात्री भी मुुंह में कपड़ा लपेटे खुले मैदान में खड़े होकर बस के चलने का इंतजार करते रहे।
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बस अड्डे पर धूप में बसें खड़ी होने से यात्री बेहाल - फोटो : अमर उजाला
अपने घर खुर्जा जाने के लिए बस का इंतजार पिछले दो घंटे से कर रहा हूं। न यहां बैठने के लिए पर्याप्त सीटें हैं और न ही छांव। इतने बड़े बस अड्डे का इतना बुरा हाल है। बस अड्डे के नाम पर सिर्फ एक मैदान है।- कुशल पाल

लखनऊ से आ रहे अपने रिश्तेदार से मिलने बस अड्डे आई हूं। यहां न तो साफ ठंडा पानी है और न ही बड़े वृक्ष, जिनके नीचे बैठा जा सके। कम से कम लखनऊ की तरह एक यात्री सुविधाओं वाला बस अड्डा अपने शहर में होना चाहिए।- मुस्कान
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बस अड्डे पर धूप में बसें खड़ी होने से यात्री बेहाल - फोटो : अमर उजाला
बस अड्डे पर यात्रियों के बैठने के लिए सीमित सीटें हैं। तीन तरफ से खुला होने की वजह से लू से नहीं बचा जा सकता है। एक वातानुकूलित वेटिंग रूम बना है लेकिन अक्सर उसके एसी नहीं चलते हैं। यात्री भी अंदर बैठकर घंटों इंतजार करने से बचते हैं। यहां से प्रमुख शहराें के लिए एसी बसों में जनरथ, स्कैनिया, वोल्वो सेवाएं भी हैं। रेलवे की तरह रोडवेज के पास यात्री के बीमार होने पर इलाज की कोई अतिरिक्त व्यवस्था नहीं है। जिस तरह से अन्य जगहों से एंबुलेंस बुलाकर मरीज अस्पताल भेजे जाते हैं, वैसे ही यहां भी है।
 
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धूप से बेहाल यात्री - फोटो : अमर उजाला
झकरकटी बस अड्डे से 24 घंटे में करीब 1200 बसों का आवागमन होता है। इससे करीब 40 हजार यात्री रोजाना आते जाते हैं। कन्नौज, फर्रुखाबाद रूट पर चुन्नीगंज बस अड्डे, बिधूना रूट पर रावतपुर बस अड्डे के अलावा सभी रूटों की बसें झकरकटी से मिलती हैं। प्रदेश के हर जिले, दिल्ली, एमपी, राजस्थान के लिए बसें मिलती हैं।

‘सीमित संसाधनों में यात्री सुविधाओं की व्यवस्थाएं हैं। यात्री चाहें तो बस अड्डे पर लगी बेंच पर छांव पर बैठकर इंतजार कर सकते हैं। हालांकि यहां पर आने वाले ज्यादातर बसों को पकड़ने की जल्दी में होते हैं, जो सीधे बस की तरफ भागते हैं। पीपीपी मॉडल के तहत बस अड्डे को संवारने के प्रोजेक्ट में झकरकटी शामिल है।’
अतुल जैन, क्षेत्रीय प्रबंधक, परिवहन निगम

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